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60 फीसदी मरीज सुविधाओं से असंतुष्ट, फिर भी वाईएनएच मिसाल योजना में शामिल नहींं

भास्कर न्यूज | मदनगंज-किशनगढ़ प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को सुधारने के लिए शुरू की गई मिसाल योजना...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 05, 2018, 05:10 AM IST

60 फीसदी मरीज सुविधाओं से असंतुष्ट, फिर भी वाईएनएच मिसाल योजना में शामिल नहींं
भास्कर न्यूज | मदनगंज-किशनगढ़

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को सुधारने के लिए शुरू की गई मिसाल योजना में यज्ञनारायण अस्पताल को शामिल नहीं किया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि अस्पताल प्रशासन से लगातार जयपुर मुख्यालय की ओर से फीडबैक मांगा जा रहा है। पिछले एक साल से लगातार अस्पताल प्रशासन फीडबैक भी भेज रहा है लेकिन अब तक 17-18 में हमारे अस्पताल को शामिल नहीं किया गया है। जबकि यज्ञनारायण अस्पताल के अलावा पीएचसी, सीएचसी भी हैं। इसके बावजूद इस अस्पताल को रैंकिंग में शामिल नहीं किया गया।

प्रदेश में यज्ञनारायण अस्पताल से छोटे अस्पतालों में शामिल है लेकिन हमारे अस्पताल को अब तक इस योजना से वंचित रखा गया है। इसमें करीब 60 फीसदी लोग अस्पताल की सुविधाओं से संतुष्ट नहीं है। यहां की व्यवस्था से अधिकांश मरीज और उनके परिजन नाराज हैं लेकिन इस योजना में शामिल नहीं किए जाने से अस्पताल की रैंकिंग नहीं बन पाई।

प्रतिदिन 1500 से ज्यादा आउटडोर

अस्पताल प्रशासन से पिछले एक साल से मिसाल योजना के तहत सूचनाएं और फीडबैक मांगा जा रहा है। प्रशासन हर महीने फीडबैक भी भेज रहा है। इसके बावजूद इस अस्पताल को इस योजना में शामिल नही किया गया। जबकि उपखंड का सबसे बड़ा अस्पताल होने के अलावा दूदू, नागौर, टोंक तक से मरीज यहां आते हैं। प्रतिदिन 1500 से ज्यादा आउटडोर होने के बावजूद वाई एनएच को शामिल नहीं किया गया। जबकि इस योजना से अस्पताल की कमियों को सुधारने का मौका मिलता है।

इन कारणों से पिछड़ रहे हैं हम, नेगेटिव फीडबैक के ये कारण

यज्ञनारायण अस्पताल में मरीजों ने फीडबैक दिया जिसमें ज्यादातर मरीज असंतुष्ट नजर आए। नेगेटिव फीडबैक के कारणों में मलेरिया स्लाइड कलेक्शन, डायरिया-निमोनिया केसेज की रिपोर्ट नहीं करना है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव के गेप में इजाफा, आदर्श पीएचसी की ऑनलाइन रिपोर्टिंग ठीक से नहीं, अस्पताल में गंदगी, साफ-सफाई नहीं होना, मरीजों को समय पर परामर्श, दवा नहीं मिलना, मरीजों को संतुष्ट नहीं करना जैसे कारण है।

भास्कर नॉलेज : जाने क्या है योजना और ऐसे मिलती है रैंकिंग

दरअसल सरकार की ओर से लोगों को अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए मेरा अस्पताल योजना लागू की गई है। जिसमें एक पोर्टल बनाया गया है, मिसाल। इसमें डॉक्टरों की कार्यप्रणाली, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, चिकित्सा सुविधा आदि का डेटा रहता है। इन सबके आधार पर चिकित्सा विभाग के अाला अधिकारी उस संस्था को रैंकिंग देते हैं। यह ऑनलाइन होता है।

ऐसे मिलते हैं अंक

1. इनपुट 20 प्रतिशत: दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधा, डॉक्टर की उपस्थिति, संस्थागत प्रसव, जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या, मेडिकल मोबाइल यूनिट की ओर से आयोजित शिविर के आधार पर 20 प्रतिशत अंक मिलते हैं।

2. इंटरमीडिएट-55 प्रतिशत: संस्थागत प्रसव, कम वजनी बच्चे, प्रसव पूर्व जांच, रजिस्ट्रेशन, परिवार कल्याण (नसबंदी, आई यूसीडी), एनसीडी (हाइपरटेंशन, डायबिटीज व कार्डियो वेस्कुलर डिजीज), सीडी (मलेरिया, डेंगू, निमोनिया, डायरिया), टीबी की दर, एचआईवी मरीज, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, आउटडोर, सीएचसी, पीएचसी में सुविधाओं का 55 फीसदी स्कोर है।

3. आउटकम-25 प्रतिशत: रिपोर्टिंग (शिशु व मातृ मृत्यु दर), स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में बच्चों के बचने की दर, पूर्ण टीकाकरण कवरेज व पेशेंट संतुष्ट के आधार पर 25 फीसदी स्कोर मिलता है।

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