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थाना प्रभारी को बताए बिना ले गए थे अस्पताल, 20 सेकंड में ठग फरार

भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़ पुलिस रिमांड पर चल रहे ठग ने पुलिसकर्मियों को ऐसा झांसे में लिया कि वे थाना...

Dainik Bhaskar

Aug 01, 2018, 05:15 AM IST
थाना प्रभारी को बताए बिना ले गए थे अस्पताल, 20 सेकंड में ठग फरार
भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़

पुलिस रिमांड पर चल रहे ठग ने पुलिसकर्मियों को ऐसा झांसे में लिया कि वे थाना प्रभारी को बताए बिना पुलिस की जीप में लेकर अस्पताल आ गए। सीआई को भी आरोपी के बीमार होने तक की जानकारी नहीं दी।अस्पताल में जब एक पुलिसकर्मी रह गया तो ठग महज 20 सेकंड में उड़नछू हो गया।

पुलिसकर्मी थाना प्रभारी राजेंद्र खंडेलवाल को बिना बताए ठग को सुबह राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल लेकर पहुंचे। ठग को लेकर एएसआई भंवर, कांस्टेबल सीताराम और चालक दीपक पुलिस की जीप में लेकर अस्पताल पहुंचे। सुबह 8.30 बजे डॉक्टर ने ठग का चैकअप शुरू कर दिया। ठग को दवाइयां दी गई, इंजेक्शन लगाए गए और उसके द्वारा बार-बार पेट में दर्द और शौच में खून आने की शिकायत पर तीन तरह की जांचें लिख दीं। जांच कराने के दौरान मदनगंज थाना प्रभारी को जीप की आवश्यकता पड़ी, उन्हे किसी काम से जाना था। उन्हाेंने फोन किया तो ठग के बीमार होने पर अस्पताल चैकअप के लिए लाने का पता चला। सीआई ने तुरंत वाहन थाने लाने के लिए कहा। दीपक वाहन थाने ले गया। पीछे से अस्पताल में एएसआई भंवर और कांस्टेबल सीताराम ही रह गए।

कांस्टेबल सीताराम को जाना था अजमेर, एएसआई के भरोसे रह गया आरोपी : सुबह 8.30 बजे ठग वीरसिंह को लेकर अस्पताल आए पुलिसकर्मियों को उसकी जांचें, दवाइयां दिलाने और इलाज करवाने में करीब दो घंटे का समय लग गया। करीब 10.30 बज चुके थे। कांस्टेबल सीताराम विभागीय कार्य के लिए अजमेर जाना था। एएसआई भंवर से अनुमति लेकर अजमेर के लिए रवाना हो गया। उस वक्त एएसआई अकेला था और सुरक्षा की जिम्मेदारी अकेले पर थी।

ठग जोर से चिल्लाया, डॉक्टर बुलाने गया एएसआई, तब तक भाग छूटा

अस्पताल में एएसआई भंवर ठग के साथ अकेला रह गया। ठग के पेट दर्द और शौच में खून निकलने पर ठग के सोनोग्राफी, पेशाब और खून की जांच करा ली गई। इसके अलावा अन्य जांचें भी हो गई। लेकिन आखिर में ठग ने दर्द ठीक नहीं होने पर शौच के दौरान खून आने की बात कही। इस पर डॉक्टर ने आखिरी जांच कराने के लिए लिख दिया। एएसआई भंवर अकेले इमरजेंसी वार्ड के भीतर ठग को ले गए। ठग बार-बार शौच करने के लिए शौचालय में जाने की बात कह रहा था। केज्युल्टी में ले जाने के बाद ठग जोर-जाेर से चिल्लाने लगा। इस पर एएसआई भंवर घबरा गए और उन्हाेंने ठग की तबीयत ज्यादा बिगड़ना समझा और ठग को छोड़कर सीधे डॉक्टर सुनील बैरवा के पास पहुंचे। बस इसी का फायदा उठाते हुए ठग महज 15 सैकंड के मौके में ही भागने में कामयाब हो गया। ठग वार्ड के भीतर से घुसकर रफूचक्कर हो गया।

काफी देर तक ढूंढता रहा एएसआई, बाद में थाना प्रभारी को बताया

घटना के बाद एएसआई के हाथ पैर फूल गए। वह अकेले ही ठग को अस्पताल में चारों ओर ढूंढते रहे। इसके बाद कांस्टेबल सीताराम को घटना की सूचना दी। बीच रास्ते से सीताराम वापस घूमकर अस्पताल पहुंचा और दोनों मिलकर ठग को ढूंढने लगे। लेकिन काफी देर तक थाना प्रभारी को घटना के बारें में नहीं बताया। बाद में पुलिस को पता चला और जाप्ता भेजकर आरोपी की तलाश शुरू की।

शाहरूख के इलाज में खड़े थे दो सिपाही, उनके सुपुर्द कर जाते आरोपी को : मदनगंज थाना प्रभारी राजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि मुझसे बिना बताए ठग को अस्पताल ले आए थे। बीमारी के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई। व्यापारी मोहल्ले में हुए विवाद के मामले में शाहरूख यज्ञनारायण अस्पताल में ही भर्ती था। उसके इलाज के दौरान दो सिपाही उसके पास थे। सीताराम के जाने पर एएसआई भंवर उन दोनों सिपाही के सुपुर्द ठग को कर जाते। पुलिसकर्मियाें की कमी नहीं है।

ठग वीरसिंह

कम्युनिकेशन गेप का फायदा उठाया बदमाश ने, तीन पुलिसकर्मी अस्पताल लेकर पहुंचे थे ठग काे, बाद में सिर्फ एएसआई के भरोसे रह गया ठग

ठग की प|ी की आखिरी लोकेशन मिली जयपुर

वृद्धा से ठगी के प्रकरण में दो दिन के रिमांड पर चल रहे ठग वीरसिंह के अस्पताल में इलाज के बहाने पुलिस कस्टडी से भागने के मामले में दूसरे दिन भी पुलिस हाथ पैर मारती रही लेकिन उसका कहीं सुराग नहीं मिला। पुलिस ने ठग की प|ी की कॉल लोकेशन निकलवाई जिसमें सोमवार दोपहर तक उसकी लोकेशन जयपुर आई। उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। पुलिस को संदेह है कि ठग प|ी के साथ ही भूमिगत हो गया है।ठग को वृद्धा से ठगी के मामले में रिमांड अवधि पूरी होने पर मंगलवार को कोर्ट में पेश करना था। लेकिन उसके फरार होने से पुलिस उसे पेश नहीं कर पाई। कोर्ट में पुलिसकर्मी और फाइल ही पहुंची। आरोपी के खिलाफ ठगी के कईं मुकदमे दर्ज है और उसने प्रदेश में कईं जगह ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है। दूसरे दिन भी ठग के नहीं मिलने से पुलिस की मुसीबतें बढ़ गई है। लापरवाह पुलिसकर्मियाें पर गाज गिर सकती है। ठग वीरसिंह के भागने के मामले में दोनों दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है।

भागकर प|ी को फोन लगाने का संदेह, साथी कहीं आसपास ही थे : पुलिस को अंदेशा है कि ठग ने अस्पताल से भागकर अपनी प|ी के मोबाइल पर फोन किया। उसके बाद तक प|ी की लोकेशन जयपुर आ रही थी। उसके बाद फोन बंद हो गया। प|ी के मोबाइल पर करीब छह-सात कॉल किए गए। पुलिस को शक है कि ये कॉल ठग वीरसिंह ने ही किए हैं। पुलिस को ये भी संदेह है कि ठग के साथी आसपास ही घूम रहे थे। जिन्होंने ठग की मदद की होगी। ठग के पास एक रुपया भी नहीं था। ना ही माेबाइल था।

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