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सावन के पहले सोमवार पर शिवमय हुआ शहर

भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़ श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर पूजा अर्चना के लिए शहर के प्रमुख शिवालयों में शिवभक्त...

Dainik Bhaskar

Jul 31, 2018, 05:20 AM IST
सावन के पहले सोमवार पर शिवमय हुआ शहर
भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़

श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर पूजा अर्चना के लिए शहर के प्रमुख शिवालयों में शिवभक्त पूजा अर्चना के लिए उमड़े। प्रथम सोमवार को शिव भक्तो ने विशेष योग व नक्षत्र में भगवान की पूजा अर्चना की। पहले सोमवार को धनिष्ठा नक्षत्र व सौभाग्य व द्विपुष्कर योग में शिवालयों में पूजा अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा हुई। शिवालय जय जय शिव लहरी जय जय बम भोले से गूंज रहा था। शहर की कई कालोनियाें सेे शिव भक्तों की टोली पुष्कर से पवित्र जल कावड़ में लेकर आई। इसी जल से शिवालयों में जलधारा की गई।

श्रावण मास में प्रति दिन शिव भक्तों का हुजूम शिवालयों में उमड़ रहा है। भगवान भोले का अभिषेक करने की भक्तों में होड़ मची हुई है। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को शिव मंदिरों में भगवान भोले को रिझाने के लिए भक्तगण मंदिर में आए। शिव भक्तों ने भगवान भोले का बिल्वपत्र, आक, धतूरे तथा अन्य सामग्रियों से भोले व उनके परिवार की पूजा अर्चन की। मंदिरों में भोले की जयकार गूंज रही थी। चारों ओर से रुद्राष्टाध्यायी पाठ के स्वर सुनाए दे रहे थे। शाम को भोले का नयनाभिराम शृंगार किया गया। भोले की आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया।

शिवालयों में हुआ अभिषेक

मदनगंज किशनगढ़ के कई शिव मंदिरों में श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर भगवान भोले का अभिषेक किया गया। बालाजी बगीची स्थित शिवालय, डाक बंगला स्थित शिवालय, पुराना शहर स्थित राजराजेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, सिटी रोड दधिचि रंग वाटिका स्थित भोला का मंदिर, अमरनाथ छतरी महादेव मंदिर, बाबा अमरनाथ महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर महादेव मंदिर, कृष्णापुरी स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, लक्ष्मीनगर स्थित सत्य शिव साई मंदिर तथा लक्ष्मीनारायण मंदिर स्थित रामेश्वरम शिव मंदिर में रुद्राष्टाध्यायी पाठ के बीच अभिषेक किया गया। शिवभक्तों ने भगवान भोले व परिवार पर पंचामृत से बना जल चढ़ाया। इसके अलावा पुराना शहर, नया शहर, इन्द्रा कालोनी, हाउसिंग बोर्ड, सांवतसर, बजरंग कालोनी तथा अन्य मंदिरों पर भगवान भोले का जलाभिषेक कर शाम को नयनाभिराम शृंगार किया गया। भोले की महाआरती कर प्रसाद का वितरण किया गया।

इस बार श्रावण में चार सोमवार

सावन मास शनिवार से शुरू हो गया। इस बार श्रावण में चार सोमवार, जबकि रविवार और शनिवार पांच-पांच होंगे। इसके साथ हरियाली अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या रहेगी। पंडित एसपी दाधीच ने बताया कि यह पहला संयोग है कि सावन इस बार शनिवार से शुरू हुआ है, जो अपने आप में खास होता है। दूसरे इस बार सावन में चार सोमवार होंगे और तीसरे यह कि ऐसा 19 साल बाद संयोग बना है, जब सावन का महीना पूरे 30 दिनों का होगा।

श्रेष्ठकर है सोमवार की पूजा

ज्योतिषाचार्य पंडित एसपी दाधीच ने बताया कि श्रावण में धनिष्ठा नक्षत्र द्वि-पुष्कर योग में भगवान शिव की उपासना मंगलकारी होती है। द्वि-पुष्कर योग वार, तिथि व नक्षत्र तीनों के संयोग से बनने वाला विशिष्ट योग है। इसमें किए गए काम को दोहराना नहीं होता है। यह संयोग कई वर्षों बाद इस बार श्रावण के दौरान कई वर्षों के बाद बना है। इस योग में दूध, दही, शहद, चावल, पुष्प, बिल्व पत्र और गंगाजल से पूजा करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते है। शस्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु इस एकादशी से चार माह क्षोर सागर में विश्राम करते है। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते है। श्रावण में इस बार हर दूसरे अथवा तीसरे दिन कोई न कोई पर्व, व्रत अथवा शुभ तिथि के साथ संयोग रहेगा।

श्रावण मास में शिव की पूजा-आराधना का खास योग

सौभाग्य योग: इसे मंगलदायक योग भी कहते है। इस योग में की गई शादी से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। अक्सर विवाह आदि मुहूर्त में यह योग देखा जाता है।

धनिष्ठा योग: इसका अर्थ होता है सबसे धनवान। ज्योतिष की गणनाओं में 27 नक्षत्र में से धनिष्ठा को उच्च नक्षत्र माना जाता है। इस योग में जन्मे लोग बहुमुखी प्रतिभा, बुद्धि के धनी होते हैं।

द्वि-पुष्कर योग: यह योग वार, तिथि व नक्षत्र तीनों के संयोग से बनने वाला विशिष्ट योग है। इसमें धन लाभ होता है।

बालाजी बगीची में सोमवार को रुद्राध्यायी पाठ के बीच हुए अभिषेक में जलधारा करते भक्त।

चातुर्मास में सृष्टि का संचालन करते हैं भगवान शिव

हिंदूधर्म में मान्यता है कि सृष्टि के संचालन का कार्य भगवान विष्णु के हाथ में रहता है, लेकिन उनके विश्राम काल के दौरान चातुर्मास में सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव परिवार पर आ जाता है। इसलिए चातुर्मास में भगवान शिव और उनके परिवार से जुड़े व्रत-त्योहार आदि मनाए जाते हैं। जहां एक माह तक शिव मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजन आदि के बाद भाद्रपद में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद भगवान श्री गणेश का दस दिवसीय जन्मोत्सव और आश्विन माह में शारदीय नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। कार्तिक के महीने में पुन: भगवान विष्णु का जागरण और तुलसी विवाह के साथ सृष्टि में मंगल कार्य आरंभ हो जाते हैं।

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