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आसमान से बरसी राहत, सड़क पर आफत

भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़ शहर में करीब 20 दिनों के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार सुबह 11:30 बजे बारिश हुई। सावन की...

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 05:25 AM IST
आसमान से बरसी राहत, सड़क पर आफत
भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़

शहर में करीब 20 दिनों के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार सुबह 11:30 बजे बारिश हुई। सावन की पहली बारिश देख लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हालांकि महज 20 से 25 मिनट बारिश हुई, लेकिन ये भी उपखंड में आधी जगह ही देखने को मिली। बारिश से किसानों ने भी राहत की सांस ली है।

बारिश बंद होते ही धूप खिल गई और उमस बढ़ गई। बारिश से गांधीनगर क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भर गया। पहले तेज व बाद में कुछ देर तक धीमी गति से हुई बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया। सवेरे से आसमान में छाए बादलों के कारण शहरवासी उमस भरी गर्मी से परेशान थे। 11:30 बजे से बारिश का दौर शुरू हुआ। तापमान तीन डिग्री गिरकर 32 डिग्री पर पहुंच गया, लेकिन बारिश खत्म होने के महज आधे घंटे बाद धूप निकल आई। धूप में तेजी और उमस से लोगों को परेशानी हुई। 21 जुलाई के बाद गुरुवार को बारिश हुई है।

शहर में आधे हिस्से में बारिश, आधे में फुहार

किशनगढ़ उपखंड में गुरुवार को बारिश के अलग-अलग नजारे देखने को मिले। मदनगंज मुख्य चौराहा क्षेत्र में 20 से 25 मिनट तक तेज बारिश हुई। जबकि अजमेर रोड कृष्णापुरी पावर हाउस, फरासिया गांव, सिटी रोड किशनगढ़ कोर्ट परिसर पुराना शहर नया शहर में मामूली फुहार देखने को मिली। मार्बल एरिया में भी बारिश हुई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश हुई। शहर में हुई बारिश से मौसम खुशनुमा हो गया। मौसम सुहावना होने से डंपिंग यार्ड पर घूमने का आनंद लिया।

आगे क्या: मौसम विभाग ने अगले दो दिन तक बारिश की संभावना जताई है। 11 और 12 अगस्त को शहर में बारिश संभावना जताई है। यहां दिन का तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और रात का 17 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

ऐसे चढ़ा और लुढ़का पारा

शहर में सवेरे 7 बजे तापमान 25 डिग्री, 9 बजे 29 डिग्री, 11 बजे 35 डिग्री, 11.30 बजे बारिश के साथ फिर से पारा 32 डिग्री तक पहुंच गया। बारिश की वजह से मौसम में 73% तक नमी हुई। बारिश के दौरान 5 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली और गर्मी से राहत मिली।

ये गड्‌ढे‌ बारिश के नहीं, अफसरों की नाकामी के सबूत हैं

सड़क पर दिख रहे ये गड्ढ़े बारिश की वजह से नहीं हैं। बल्कि अफसरों की नाकामी की वजह से हैं। नाकामी नगर परिषद की ही नहीं, सार्वजनिक निर्माण विभाग की भी है। आपदा प्रबंधन से निबटने के लिए पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद हर बार बरसात के बाद हालात खराब हो जाते हैं। परिषद के पास बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी, पम्पसेट, जनरेटर, बरमे, पंखियां, ट्रैक्टर ट्रालियां मौजूद हैं, लेकिन नागरिक सुरक्षा विभाग का अभाव है। डीएफसीसी प्रोजेक्ट ने परिषद क्षेत्र को दो भागों में बांट रखा है। एक लाख की आबादी परिषद से कटी हुई है।

1. पांच घंटे में धंस गई सड़क : जयपुर रोड पर चैनपुरिया के सामने अचानक सड़क धंस गई। इसके बाद हर आधे-आधे घंटे में सड़क गहरी होती गई। दोपहर में डम्पर व रोडवेज बस निकलने के तीस सेकंड बाद दाे ओर से सड़क धंस गई। ईश कृपा रही की कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

2. नाले ऊंचे, सड़कें नीची : सुभाष कालोनी, सिंधी कालोनी, भाट मोहल्ला, निचली बस्ती सहित अन्य क्षेत्र में पुराना शहर पर नालों का लेवल सड़क से कई ऊंचा है। हनुमानगढ़ मेगा हाइवे पर सड़क के एक तरफ नाला ही नहीं है। बरसात का पानी आखिर जाए भी कहां।

3. गड्ढों पर डाली मिट्टी: जयपुर रोड पर भट्‌ट गेस्ट हाउस के सामने, मझेला लिंक रोड, अजमेर रोड, सहित अन्य सड़कों पर गड्‌ढों में मिट्टी डलवाकर भरवा दिया जो बरसात में बहकर कीचड़ बन गई।

4. सीवरेज की धीमी गति: शहर में 130 करोड़ रुपए से बनाए जा रहे सीवरेज व 24 घंटे पेयजल प्रोजेक्ट में पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी जा रही सड़क कोढ़ में खाज का कार्य कर रही है। दोनों कार्यों की धीमी गति से हाल बेहाल हो रखा है।

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