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शिकायत पर दर्ज करना ही होगा मामला

भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़ आमजन को अब पुलिस थानों में मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोर्ट का सहारा नहीं लेना...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 05:30 AM IST

भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़

आमजन को अब पुलिस थानों में मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोर्ट का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। पीड़ित लोगों के थाने पर पहुंचते ही एसएचओ को केस रजिस्टर्ड करना पड़ेगा। अगर शिकायत मिलने के बाद भी पुलिसकर्मियों द्वारा केस रजिस्टर्ड नहीं किया जाता है तो संबंधित थाने के एसएचओ की एसीआर खराब हो जाएगी। किशनगढ़ सीओ सर्किल में सात थाने आते हैं। इसमें मदनगंज, गांधीनगर, किशनगढ़, बांदरसिंदरी, अरांई, बाेराड़ा और रूपनगढ़ थाना शामिल हैं। इन थानों में भी 20 प्रतिशत परिवाद पर मुकदमे दर्ज नहीं होते। पुलिस मुकदमा दर्ज करने में जानबूझकर ढिलाई बरतती है।

इस संबंध में डीजीपी ओपी गहलोत्रा ने एक परिपत्र जारी कर सभी जिला एसपी, डीसीपी, रेंज आईजी और कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक पुलिसकर्मी को इन आदेशों की सख्ती से पालना करनी होगी। प्रदेश में 865 पुलिस थाने हैं। पिछले तीन साल की औसत के अनुसार इन थानों में सालाना पौने दो लाख मुकदमे दर्ज होते हैं। थानों में सुनवाई नहीं होने के कारण हर साल करीब 60 हजार पीड़िताें को कोर्ट का सहारा लेकर आरोपियों के खिलाफ इस्तगासे से मुकदमा दर्ज कराना पड़ता है। बाद में पुलिस इस्तगासे से दर्ज होने वाले 25 फीसदी मुकदमों में आरोप प्रमाणित मानकर आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान कर देते हैं। यानि हर साल करीब 14 हजार पीड़ित लोगों की शिकायत थाने में अाने के बाद पुलिस उस पर केस रजिस्टर्ड नहीं करती है, जबकि परिवादों का आंकड़ा तो लाखों में है। अब पुलिस महानिदेशक ने भी माना है कि थानों में मुकदमे दर्ज नहीं किए जाने संबंधी शिकायतें सही हैं।

गौरतलब है कि गंभीर अपराध होने के बाद भी अगर पुलिस परिवादी का केस रजिस्टर्ड नहीं करती है तो उसमें सजा का प्रावधान भी है। मुकदमा दर्ज नहीं करने पर परिवादी संबंधित थाना एसएचओ, एसपी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस कर सकता है। मुकदमा दर्ज नहीं करने पर छह माह कारावास की सजा, जुर्माना या फिर दोनाें के प्रावधान हैं।

एसपी करेंगे एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई

डीजीपी के आदेशों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति जिला एसपी या डीसीपी को शिकायत करता है कि गंभीर अपराध होने के बाद भी थाना एसएचओ द्वारा मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया। शिकायत के बाद जिला एसपी द्वारा नियमानुसार तत्काल एसएचओ के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करनी पड़ेगी। कार्रवाई का रिकॉर्ड संबंधित एसएचओ की सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। एसएचओ के खिलाफ 16 सीसीए या फिर 17 सीसीए के तहत चार्जशीट देकर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में पदोन्नति के दौरान संबंधित एसएचओ को विभागीय कार्रवाई के कारण वंचित रहना पड़ेगा। आदेशों के अनुसार परिवादी की रिपोर्ट लेने वाले पुलिसकर्मी और एसएचओ दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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