Hindi News »Rajasthan »Kishangarh» ‘पाप के कारण व्यक्ति होता है दुखी’

‘पाप के कारण व्यक्ति होता है दुखी’

मदनगंज-किशनगढ़|मदनगंज के संभवनाथ मंदिर में जय प्रवचन माला के अंतर्गत गुरुवार को सांप के खतरनाक विषय पर उद्बोधन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 05:30 AM IST

मदनगंज-किशनगढ़|मदनगंज के संभवनाथ मंदिर में जय प्रवचन माला के अंतर्गत गुरुवार को सांप के खतरनाक विषय पर उद्बोधन देते हुए साध्वी जयप्रभा की शिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा कि दुख भीरूता कायरता की निशानी है और पाप भीरूता धार्मिकता की निशानी है। दुख भीरू आक्रमण नहीं करता। दुख भीरू दुख मिलने पर निमित्तों पर दोषारोपण करता है। दुख के कारण का विचार नहीं करता, जिस कारण दुख आता है। उस कारण से नहीं बचता। पाप के कारण दुख आता है अगर व्यक्ति पाप नहीं करेगा तो दुख नहीं आएगा। साध्वी ने कहा कि पाप भीरू में सिंह वृत्ति होती है। शेर बाण को नहीं सूंघता, बाण मारने वाले पर तुरंत आक्रमण करता है। वस्तुत: पाप भीरू व्यक्ति दुख के कारण पर विचार करता है। दुख का कारण पाप है। साध्वी ने कहा कि पाप कर्मों का बंधन व्यक्ति के भाव, परिणाम, अध्यवसाय पर निर्भर करता है। जिसे पाप से घृणा होती है। वह दुखी ह्रदय से कांपते हाथों से मजबूरी से पाप करता है। उसे पाप का पश्चात होता है। उसके शिथिल कर्मों का बंधन होता है परंतु उत्तम वृत्ति वाले व्यक्ति जान की बाजी लगाना पसंद करते हैं। किसी भी स्थिति में पाप नहीं करते। साध्वी ने कहा कि पाप व्यक्ति का पतन करता है। उसका इहलोक परलोक दोनों ही बिगड़ जाते हैं। वह मनुष्य जीवन की जीती हुई बाजी हार जाता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Kishangarh

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×