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अध्यात्म के क्षेत्र में विकास के लिए संतों की शरण जरूरी

Kishangarh News - मदनगंज-किशनगढ़| मुनि पूज्य सागर महाराज ने जैन भवन में चौथे दिन प्रवचन देते हुए कहा कि जो अरिहंत, सिद्ध, साधु और धर्म...

Dainik Bhaskar

Jun 26, 2018, 04:35 PM IST
अध्यात्म के क्षेत्र में विकास के लिए संतों की शरण जरूरी
मदनगंज-किशनगढ़| मुनि पूज्य सागर महाराज ने जैन भवन में चौथे दिन प्रवचन देते हुए कहा कि जो अरिहंत, सिद्ध, साधु और धर्म की शरण में जाता है वह अपने आपको परमात्मा बनाने के योग्य कर लेता है। आध्यात्म के क्षेत्र में विकास करने के लिए इन चार लोगों की शरण की जरूरत है।

मुनि श्री ने कहा कि सामाजिक और गृहस्थ धर्म को चलाने के लिए माता-पिता के आशीर्वाद और प|ी की सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही व्यापार-नौकरी में सफलता की ऊंचाइयां प्राप्त करने के लिए मिलनसार और विवेक बेहद आवश्यक है। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं को मुनि श्री ने णमोकार मंत्र का महत्व समझाया। मुनिश्री ने कहा कि अंतरंग से शरण में जाने वाला व्यक्ति ही मन को पवित्र कर सकता है। एक सेठ ने मरते हुए कुत्ते को णमोकार मंत्र सुनाया तो वह मर कर देव बन गया। यहां पर मंत्र सुनाने वाले ओर सुनने वाले दोनों के मन पवित्र थे इसलिय यह हो पाया। मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक, सामजिक और पारिवारिक सभी तरह के कार्य के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। अनुभव के बिना किया कार्य गलत और पाप का कारण बन जाते हैं।

आचार्यों ने कहा है की जो व्यक्ति विवेक के साथ कार्य नहीं करता है वह पुण्य से तो दूर रहता ही है और वह लौकिक सुख भी प्राप्त नहीं कर सकता। यही नहीं वह परिवार तक को खुश नहीं रख सकता है। मुनि श्री ने परिवार के सहयोग पर कहा कि हम धार्मिक अनुष्ठान करें और परिवार में खुशी नहीं हों तो वह अनुष्ठान कषाय का कारण हो जाता है। यही वजह है कि धार्मिक अनुष्ठान से पहले परिवार में इसे लेकर अनुकूल वातावरण तैयार करना जरूरी है। मुनि श्री ने जोर देकर कहा कि कोशिश करो की हर व्यक्ति अनुष्ठान से जुड़े और सहयोग करे तभी वह अनुष्ठान हजारों गुणा वाला फल देता है। जैन समाज के सीपी वैद ने बताया कि प्रवचन के दौरान जैन समाज के मोहनलाल पाटनी,विमल पापल्या, मांगीलाल झांझरी, पिंटू पाटनी, सुभाष चौधरी, मुकेश पापड़ीवाल, जीतू पाटनी, राहुल गंगवाल सहित अनेक श्रावक एवम श्राविका मौजूद रहे। प्रवचन का शुभारंभ नवर| देवी दागड़ा द्वारा मंगलाचरण कर किया गया। रीना बज ने भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन चंद्रप्रकाश बैद ने किया।

किशनगढ़.जैन भवन में प्रवचन देते मुनिश्री।

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