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शव जल गया, हडि्डयां व खोपड़ी का कंकाल पुलिस ने रखा, राख से किया अंतिम संस्कार
भारतीय संस्कृति में पति और प|ी का रिश्ता सात जन्मों का माना जाता है, लेकिन पुखराज की प|ी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या करने के बाद यह मिथक तोड़ दिया। सबसे ज्यादा कहर पुखराज के परिजनों पर टूटा है। पूरा परिवार जवान बेटे की मौत में गमगीन है, लेकिन यह दुख उस समय ज्यादा गहरा हो गया, जब परिजनों को अंतिम संस्कार करने के लिए पुखराज का शव नहीं मिला। मजबूरी में घटनास्थल पर पुखराज के शव की राख का अंतिम संस्कार कर पीसांगन में क्रियाक्रम की रस्म अदा की गई। पुखराज पीसांगन का रहने वाला था जबकि वह मजदूरी करने के लिए किशनगढ़ के गांधीनगर में किराये के मकान में रहता था। पुखराज का बड़ा भाई दिलीप ही उसकी राख लेकर अपने गांव पीसांगन गया था।
पुखराज की प|ी लीला और उसके प्रेमी रामस्वरूप ने मिलकर 22 फरवरी को हत्या कर दी थी। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए आरोपियों ने 23 फरवरी को लाश के टुकड़े करने के बाद एक कट्टे में बंद कर ले गए और टिकावड़ा के पास सुनसान स्थान पर जला दिया। हत्या का राज खुलने के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर मृतक पुखराज की खोपड़ी का कंकाल सहित शरीर के कुछ हिस्से की हड्डियां मिली थी। पुलिस ने डीएनए की जांच करने के लिए शव के सभी हिस्सों को अपने पास रख लिए थे।
प|ी के नाम को कलंकित किया
मृतक के भाई दिलीप ने बताया कि लीला ने प|ी नाम को ही कलंकित कर दिया है। लीला ने मानवता की सारी हदें पार कर दी। हत्या करने के बाद शव के टुकड़े कर जला देना जैसा कार्य इंसान नहीं कर सकता है। हत्या के बाद शव मिल जाता तो कम से कम अपने भाई का अंतिम संस्कार तो रीति रिवाज से कर पाते। इसका पूरे परिवार को हमेशा मलाल रहेगा। दिलीप ने बताया कि 12 दिन तक सभी रस्में की जाएगी। अब उनका उद्देश्य हत्यारों को सजा दिलाना है।
परिजनों को इसलिए नहीं मिले कंकाल के टुकड़े
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पुखराज का कंकाल के टुकड़े जब्त किए है। पुलिस को अदालत में यह साक्ष्य देना होगा कि कंकाल के टुकड़े मृतक पुखराज के ही है। साक्ष्य को मजबूत करने के लिए पुलिस ने मौके पर मिले कंकाल के सभी हिस्सों काे डीएनए जांच के लिए भेजा है। डीएनए में यह स्पष्ट हो जाएगा कि शव पुखराज का था या नहीं। कहीं आरोपियों ने गुमराह तो नहीं किया। मालूम हो कि डीएनए रिपोर्ट को न्यायालय भी मान्यता
देता है।
इनका कहना है
मृतक की पहचान करने के शव के टुकड़ों को डीएनए जांच के लिए भेज दिया है। परिजनों के दुख से वाकिफ है, लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से परिजनों को शव के टुकड़े नहीं सौंप सकते हैं।
राजेश मीणा, एसएचओ, गांधीनगर
डेढ़ साल की बेटी पर ना पिता ना मां की छाया
मृतक पुखराज की मौत का से पूरे परिवार पर दुखी है, लेकिन इस परिवार में डेढ़ साल की अनुप्रिया ऐसी बच्ची है, जिसको यह पता नहीं है कि उसके पिता इस संसार से चले गए है। उसके पिता की हत्या करने में उसकी मां शामिल थी। अनुप्रिया को अब कभी मां-बाप की गोदी में खेलने का सौभाग्य नहीं मिलेगा। मृतक के भाई दिलीप का कहना है कि अनुप्रिया उनके भाई की आखिरी निशानी है, वे इसको अपने साथ ही रखेंगे। मालूम हो कि अनुप्रिया के पैदा होते ही माता-पिता में विवाद होने का सिलसिला शुरु हो गया था। पति-प|ी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों ने कोर्ट के हलफनामे के आधार पर एक दूसरे से अलग रहने का निर्णय लिया था। लीला बेटी को अपने पास रखना चाह रही थी कि बेटी को पुखराज अपने पास रख रहा था। इसको लेकर कई बार दोनों में विवाद हुए। अब बच्ची ना पुखराज के पास रहेगी और ना मां के पास। बच्ची को बड़ा होने पर इसका दुख हमेशा सताता रहेगा।
मृतक की बेटी।
पीसांगन. मृतक के दाह संस्कार के बाद शोक में डूबा परिवार।
मृतक पुखराज।