90 हजार मरीजों की बनाई बीमारी व दवाइयों की कुंडली, एक क्लिक पर कहीं भी देख सकेंगे डॉक्टर पुराना रिकॉर्ड

Kishangarh News - अभी तक तो कुंडली का उपयोग बच्चों का भविष्य और शादी ब्याह के उपयोग में किया जाता था। लेकिन अब इसका उपयोग...

Feb 17, 2020, 09:11 AM IST
Kishangarh News - rajasthan news horoscope of medicines and medicines made by 90 thousand patients doctors will be able to see old records anywhere on one click

अभी तक तो कुंडली का उपयोग बच्चों का भविष्य और शादी ब्याह के उपयोग में किया जाता था। लेकिन अब इसका उपयोग व्यक्तियों के इलाज के लिए भी होना शुरू हो गया है। इसका नजारा किशनगढ़ के राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में देखने को मिल रहा है। यहां पर मरीजों की बीमारियों और दवाइयों की कुंडली बनाई जा रही है। किसी कारणवश मरीज दूसरे शहर के सरकारी अस्पताल में अपना इलाज कराता है तो उसको अपने साथ पुराने दस्तावेज नहीं ले जाने होंगे। डॉक्टर कम्प्यूटर पर यूनिक कोड नंबर डालकर मरीज की बीमारी से सभी बीमारियों की जानकारी ले सकेगा और इसका अच्छा इलाज करेगा। यज्ञनारायण अस्पताल में यह व्यवस्था लागू हुए तीन माह हो गए। इस नई व्यवस्था का नाम इंटिग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज आते है। अस्पताल प्रशासन आउटडोर पर मरीज के पर्ची कटाते समय एक यूनिक नंबर पर्ची पर लिख दिया जाता है। यही यूनिक नंबर बाद में कम्प्यूटर पर ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। अभी तक प्रशासन करीब 90 हजार मरीजों की कुंडली तैयार कर चुका है। अाॅनलाइन व्यवस्था शुरू होने के साथ दवाओं का भी पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा। इससे निशुल्क मिलने वाली दवाओं का फर्जीवाड़ा भी रूकेगा।

अभी तक अस्पताल में मरीजों का पुराना रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। इसके चलते मरीज को अस्पताल में दिखाते समय अपने संपूर्ण बीमारी के कागजात साथ लेकर आने पड़ते थे। कई बार मरीज के पुराने कागजात खो भी जाते थे। इसके चलते मरीज को डॉक्टर को अपनी पुरानी बीमारी का ब्यौरा देने में काफी समय लग जाता था। इसकी वजह से अस्पताल में आए दूसरे मरीजों को आउटडोर के बाहर इंतजार करना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था के बाद अब मरीज अथवा उनके परिजनों को डॉक्टर को पुरानी बीमारी का हिसाब नहीं देना पड़ेगा। डॉक्टर स्वयं कम्प्यूटर पर यूनिक नंबर से उसका उपचार कर देगा। इसका फायदा मरीज को भी मिलेगा।

यूनिक नंबर याद ना हो तो भी कोई परेशानी नहीं होगी

वैसे तो मरीज को पर्ची संभालकर रखनी चाहिए। यदि किसी कारणवश खो भी जाए तो वह इस सुविधा का लाभ ले सकता है। इसके लिए मरीज को दूसरे सरकारी अस्पताल के ओपीडी पर पर्ची कटाते समय अपना नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर बताने होंगे। ओपीडी पर तैनात कर्मचारी इस सूचना को कम्प्यूटर पर दर्ज कर आपकी यूनिक नंबर बता देगा। इससे मरीज द्वारा पूर्व में लिए गए उपचार की जानकारी सामने आ जाएगी।


मरीज को बीमारी के कागजात साथ लेकर नहीं जाना पड़ेगा

इंटिग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर
ऐसे करता
है काम


इंटिग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों से जोड़ा गया है। मरीज को अस्पताल में आउटडोर पर पर्ची कटवाने पर मरीज का नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर और पता दर्ज किया जाता है। दर्ज करने के साथ ही मरीज को ऑनलाइन स्पेशल यूनिक नंबर दिया जाता है। जो पर्ची पर अंकित किया जाता है। मरीज डॉक्टर से उपचार लेने के बाद दवा वितरण केंद्र पर जाता है। यहां एक पर्ची डीडीसी पर फार्मासिस्ट द्वारा रख ली जाती है जबकि दूसरी पर्ची मरीज को दी जाती है। पर्ची को डीडीसी के कम्प्यूटर पर एंट्री की जाती है। जिससे मरीज द्वारा किस डॉक्टर से इलाज लिया गया, कौन-कौनसी दवा ली गई सहित अन्य जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो जाती है।

मदनगंज-किशनगढ़ मरीज की कुंडली को कम्प्यूटर में दर्ज करती महिला कर्मचारी।

राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में इंटिग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम के जरिये मरीजों की दर्ज किया जा रहा है ऑनलाइन रिकॉर्ड, यूनिक नंबर के आधार पर प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में ले सकता है उपचार

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