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वाईएनएच में भारी भीड़, मरीज से ज्यादा परिजन

एक वर्ष पहले
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कोरोना को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री की अपील भी राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में बेअसर नजर आ रही है। शनिवार को अस्पताल का अाउटडोर करीब 1300 के बाहर रहा। लोग सामान्य बुखार और रूटीन चैकअप के लिए भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। गंभीर बात तो यह है कि इनके साथ इनके परिजन भी आ रहे हैं। अस्पताल में अधिकांश मरीज और परिजनों ने मास्क भी पहना हुआ नहीं था।

पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टर कक्ष, दवा वितरण केंद्र और जांच केंद्र में लंबी कतारें नजर आई। मरीजों के बीच कोई दूरी नहीं थी। एक दूसरे के पास खांसते, छींकते दिखे। इसी तरह वार्डों में भर्ती मरीजों के साथ दो से तीन मरीज मौजूद थे। जबकि चिकित्सा विभाग की एडवाइजरी के तहत मरीज के साथ एक ही परिजन होना चाहिए। लेकिन वायरस के भय के बावजूद लोग अलर्ट नहीं दिखे। जबकि अस्पताल के डॉक्टर से लेकर स्टाफ मास्क बांधे नजर आया। मरीज और परिजनों को भी मास्क लगाने या मुंह पर स्कार्फ, रूमाल बांधने की सलाह दी गई। अस्पताल को सेनेटाइज करने के लिए बार-बार दवाओं का छिड़काव किया जा रहा था। भास्कर ने इस संबंध में पीएमओ डॉ. अशोक जैन से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

मौसमी बीमारियों के रोगी ज्यादा, लेकिन बचाव के उपाय नहीं: राजकीय अस्पताल में इन दिनों मौसमी बीमारियों की रोगियों से आउटडोर भरा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, हाथ पैर दर्द, डायरिया और उल्टी के रोगी ज्यादा है। कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार की अपील के बावजूद शनिवार को कईं मरीज रूटीन चैकअप और हल्की बुखार के बावजूद अस्पताल पहुंच गए। जबकि सरकार ने ऐसे मरीजों को अपनी परिचित या निजी डॉक्टरों को ही दिखाने की सलाह दी है। गंभीर बात यह है कि अस्पताल में महज 40 फीसदी रोगी और उनके परिजन ही मास्क या रूमाल बांधे नजर आए। जो कि दूसरों के लिए काफी खतरनाक है।

सभी वार्डों की यही हालत, मरीज से ज्यादा परिजन ज्यादा: अस्पताल में आउटडाेर में मरीज के साथ दो परिजन आ रहे हैं। यही स्थिती वार्डों में देखने को मिल रही है। शनिवार को भास्कर ने अस्पताल के वार्डों की हालत देखी तो अधिकांश बैड पर मरीज से ज्यादा उनके परिजन बैठे नजर आए। जरनल वार्ड, सर्जिकल, शिशु वार्ड, गायनिक वार्ड में एक बैड पर तीन से चार की संख्या में परिवार के सदस्य बैठे हुए है। जबकि मरीज के साथ एक ही परिवार का सदस्य को अनुमति है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन सहित परिजन खुद भी लापरवाही बरत रहे है। इधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके पास स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में परिजनों को रोक पाने के लिए गार्ड नहीं है। एक वार्ड को एक ही नर्सिंगकर्मी संभाल रहा है।

हर पंद्रह मिनट में दवाआंे का छिड़काव: अस्पताल प्रशासन हर पंद्रह मिनट में जगह-जगह दवाओं का छिड़काव कर सेनेटाइज करने का प्रयास कर रहे थे। मुंह पर मास्क लगाए टीम भीड़ वाली जगह पर ज्यादा छिड़काव कर रही थी। डॉक्टर और नर्सिंगकर्मी मरीज और उनके परिजनांे को मास्क लगाने की हिदायत दे रहे थे।

राजकीय अस्पताल में वार्ड में मरीज से ज्यादा रिश्तेदार आए नजर।
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