- Hindi News
- National
- Kishangarh News Rajasthan News Rayleigh Spent The Night Sleeping Near The Tracks He Put Clothes On But His Mother Was Able To Make Daughters
रेले पटरियों के पास सोकर बिताई रात, कपड़े का ठेला लगाया पर मां ने बेटियों काे बनाया काबिल
कहते हैं कि बच्चे की सबसे पहली गुरु मां होती है। इसको समय- समय पर माताओं ने साबित भी किया है। किशनगढ़ की एक मां ने अपनी चार बेटियों का भविष्य को संवारने के लिए अपना जीवन झोंक दिया। नतीजा यह हुआ है उसकी मेहनत की वजह से आज उसकी चारों बेटियां परिवार के साथ के साथ शहर का नाम रोशन कर रही है।
ऐसे संवारा भविष्य
भैरू लाल वर्मा और उनकी धर्मप|ी शायरी देवी के चार बेटियां थी। आर्थिक हालत खराब होने की वर्मा ने पावरलूम फैक्ट्री में काम किया। कई बार फैक्ट्री में देर रात तक काम करते हुए रेलवे पटरियों के पास सोकर रात बिताई। प|ी शायरी देवी परिवार की माली हालत को देखते हुए खुद कमाने का निर्णय लिया और बालाजी मंदिर के सामने कपड़े का ठेला लगाने लगी। ठेले पर बेटियां भी मां की मदद करवाती। स्कूल से लौटने के बाद मां के साथ कपड़े बेचती थी।
कईं बार खाने के लाले तक पड़ गए
पारिवारिक की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि परिवार के लिए कई बार खाने के लाले पड़ जाते लेकिन मां शायरी देवी ने इससे हार नहीं मानी। उसका सपना था कि उसकी चारों बेटियों पढ़ लिखकर अफसर बनें। समय बीतता गया और चार बेटियां बड़ी हो गई। इनमें बड़ी बेटी सीता, छोटी ममता, पिंकी और सबसे छोटी मीनू वर्मा है। बेटियां पढ़ाई के साथ परिवार चलाने में माता-पिता का हाथ बंटाती रही। वर्ष 2008 में बड़ी बेटी सीता वर्मा को कड़ी मेहनत के बाद सरकारी नौकरी मिल गई। पहले वह आरओ बनी और उसके बाद पुष्कर पालिका और किशनगढ़ नगर परिषद में आयुक्त बनी।
बड़ी बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज
सरकारी नौकरी लगने के बाद सीता ने मां का बोझ हल्का कर दिया। मां और बड़ी बेटी के प्रयास की वजह से छोटी बेटी ममता मेडिकल ऑफिसर बन गई। वर्तमान में किशनगढ़ एयरपोर्ट पर पोस्टेड है। उससे छोटी पिंकी ने आईआईटी से एमटेक किया और आईएएस की तैयारी कर रही है। जबकि सबसे छोटी मीनू दिल्ली में एनजीओ में प्रोजेक्ट मैनेजर के साथ सामाजिक सेवा के कार्य कर रही है। चारों बेटियों अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार और शहर का नाम रोशन कर रही है।
फर्श से अर्श पर पहुंची चारों बेटियां
{ पिंकी ने आईआईटी से एमटेक,
आईएएस की तैयारी
{ सबसे छाेटी लाडाे मीनू दिल्ली में एनजीओ में प्रोजेक्ट मैनेजर
{ सीता वर्मा बनीं अारअाे
फिर किशनगढ़ अायुक्त
{ ममता बनीं मेडिकल ऑफिसर
{ सीता के आयुक्त बनने के बाद भी मां ने ठेला लगाना बंद नहीं किया
{ छाेटी बेटी मीनू के साथ वर्ष 2013 तक वह कपड़े का काम करती रही, बेटी भी स्कूल से लौटकर मां के साथ बेचती थी कपड़े