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6 साल की खुशबू को यह तक नहीं पता, किस बात की मिल रही सजा, मां को छू भी नहीं सकी पूरे 10 दिन

हरिपुरा के सरकारी प्राइमरी स्कूल में 2 जुलाई को सरकार की दूध वितरण योजना का आगाज भी था।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 11:04 AM IST

बूंदी. खुशबू पहली बार ही स्कूल गई थी। हरिपुरा के सरकारी प्राइमरी स्कूल में 2 जुलाई को सरकार की दूध वितरण योजना का आगाज भी था। ग्रामीण भी आए हुए थे। बच्ची प्रार्थना सभा के बाद दूध के लिए लाइन में लगी थी, भीड़ में धक्का लगा तो पास ही जमीन पर बने टिटहरी के घोंसले पर 6 साल की मासूम खुशबू का पैर पड़ गया, एक अंडा फूट गया। बात गांव में फैल गई। शाम को समाज की जातीय पंचायत बैठी। फैसला हुआ कि बच्ची ने जीवहत्या की है। सजा के तौर पर उसे जात बाहर करने का फरमान सुना दिया गया। जुर्माना तय हुआ कि शंकेश्वर महादेव मंदिर में बच्ची को नहलाया जाए। एक किलो भूंगड़े, एक किलो नमकीन, अंग्रेजी शराब की बोतल बच्ची का पिता पंचायत को दे, गायों को चारा, मछलियों को आटा, कबूतरों को ज्वार डाला जाए। बूंदी की ब्रह्मांडेश्वर गोशाला में मजदूर पिता हुकमचंद ने जो कहा, कर दिया। तीन दिन बाद फिर पंचायत बैठी, पर बात इस पर अड़ गई कि हुकमचंद एक पंच से कुछ साल पहले उधार लिए डेढ़ हजार रुपए चुकाए, तभी बच्ची को जात में शामिल किया जाएगा। हुकमचंद ने एक महीने में चुकाने काे कहा, पर पंचायत ने नहीं माना।

- सथूर पंचायत के हरिपुरा गांव में मासूम खुशबू पर जातीय पंचायत के फरमान पर जुल्म होता रहा, 10 दिन तक अछूत बनी रही, मां को छूने और घर में प्रवेश तक की इजाजत उसे नहीं थी। खाना-पानी भी उसे अछूत की तरह ऊपर से ही डाला गया। आंगन में खाट पर अपने स्कूल बैग को गोद में लिए बैठी खुशबू को पता ही नहीं था कि उसे किस बात की सजा दी जा रही है। वह कभी बैग से किताब निकालकर उसके फोटो देखती तो कभी मां के पास जाने के लिए रोने लगती। पिता हुकमचंद के पास हाथ से लिखी पर्ची थी, उसके मुताबिक यह पंचायत के लोगों ने दी है, जिस पर पंच रामदेव, छीतरमल, औंकार, रंगनाथ, चंद्रभान, रमेश, कालू, मोडू, ग्यारसीलाल, मोहन आदि के नाम थे, पर्ची में दारू की बोतल, एक किलो नमकीन, आधा किलो भूंगड़ा लाने की बात भी लिखी हुई थी। खुशबू की नानी कंचनबाई के मुताबिक पंचायत की सारी बात मान ली, सात गौत्र के लोगों को भी इकट़्ठा कर लिया, फिर भी बच्ची को वापस जात में शामिल नहीं किया गया।
- कलेक्टर-एसपी के पास बात पहुंची तो हिंडौली तहसीलदार भावनासिंह, एसएचओ लक्ष्मणसिंह पुलिस जाब्ते के साथ हरिपुरा आए। प्रमुख पंचों को बुलाया गया। थोड़ा समझाया-थोड़ा हड़काया गया। चना-भूंगड़े और नमकीन बांटकर बच्ची को घर में प्रवेश कराया गया। बच्ची अंदर जाते ही मां से लिपट गई। पुलिस व तहसीलदार के समझाने के बाद पंच मान गए। कोई केस दर्ज नहीं किया।

माता-पिता बोले- खाट पर ही खेलती थी

पंचायत ने बच्ची को जात बाहर कर दिया, वह कमरे में नहीं जा सकती थी, खाना-पानी, बस्ता घर के बाहर आंगन में ही खाट पर दे दिया जाता था, दिन-रात कमरे से बाहर ही रहती थी, उसे छू भी नहीं सकते थे, ऊपर से ही खाना-पानी देते थे। अपनी खाट पर ही वह खेलती थी। -मीना, खुशबू की मां
बच्ची को जात बाहर कर देने के बाद मुझे व परिवार को भी पास बैठाने या शादी, नुक्ते या दूसरे काम में नहीं बुलाया जाता था। जातीय पंचायत ने जो कहा, सब कर दिया, पर पंचायत पंच छीतर से उधार लिए डेढ़ हजार देने पर बात अड़ गई। मैंने एक माह का नाम लिया, पर उन्होंने नहीं माना। -हुकमचंद, खुशबू के पिता

स्कूल और पंचायत ने नहीं बताया : प्रधानाध्यापक

हमने भी खुशबू को जात बाहर करने के बारे में सुना तो था, पर स्कूल में उसके साथ अछूत जैसा बर्ताव नहीं किया गया। वह रोज स्कूल आती थी, बच्चों में बैठकर पढ़ती थी। इस पर किसी ने ऐतराज भी नहीं किया, इसलिए हमने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। -छोटूलाल मीणा, प्रधानाध्यापक, राप्रावि, हरिपुरा

मां को फिक्र, मेरे बाद कौन देखेगा

खुशबू की गर्भवती मां 9वें महीने से है। खुशबू को इस हालत में देखकर वह दिन-रात चिंता में डूबी रहती है, उसे कुछ हो गया तो क्या होगा। पुलिस के दबाव में पंचों ने बच्ची को जात में तो शामिल कर लिया, पर चिंता है कि डिलीवरी या बाकी काम में समाज के लोग परिवार का बहिष्कार कर देंगे। हमारी मदद अब कौन करेगा।
समझाइश करते प्रशासन की ओर से भेजे अधिकारी।

पंच बोले-हुकमा ने गांव में पुलिस बुलाकर मिट्‌टी में मिला दी इज्जत

बड़े-बुजुर्गों की चली आ रही रीत निभाई है। जीव हत्या पर समाज की पंचायत कुछ दंड लगाती है। जिसे पूरा करने पर वापस जात में शामिल कर लिया जाता है। यह भी हमारे ही परिवार की बच्ची है, हम भी जानते हैं बच्ची के साथ ऐसा नहीं हो। बच्ची को महादेवजी के यहां नहलाकर उसके हाथ से पंचाें को गंगा जल पिलाने, चने, नमकीन, गायों को चारा डालने को कहा था। बच्ची का पिता शराबी है, वह पंचों से गाली-गलौच करने लगा। हम तो खुद ही बच्ची को जाति में शामिल करने वाले थे, पर हुकमा ने पुलिस बुलाकर समाज के बड़े-बुजुर्गों की इज्जत मिट्‌टी में मिला दी। समाज का सहयोग चाहिए तो साथ देना जरूरी है। -(जैसा कि आैंकार, कालू, मोहन, सभी पंच समाज ने बताया)

गरीब परिवार, घर में बिजली तक नहीं

टूटे-फूटे से दो कमरों में रह रहा हुकमचंद का परिवार काफी गरीब है, न बिजली कनेक्शन है, न रसोई गैस मिली है, न शौचालय है। किसी सरकारी योजना का फायदा परिवार को नहीं मिला है। पानी सार्वजनिक टंकी से भरकर लाते हैं। तहसीलदार भावनासिंह को बताया कि 5 महीने पहले बिजली कनेक्शन की फाइल लगाई थी, पर कनेक्शन नहीं मिला।