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भास्कर एक्सक्लूसिव: 14 माह की बच्ची को डायबिटीज, जिंदगीभर लेना होगा इंसुलिन

वजन कम होता है, बार-बार प्यास लगती है। लेवल बढ़ जाता है तो यूरीन में कीटोंस आने लगते हैं, इसे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस कहत

Bhaskar News | Last Modified - Mar 09, 2018, 08:17 AM IST

भास्कर एक्सक्लूसिव:  14 माह की बच्ची को डायबिटीज, जिंदगीभर लेना होगा इंसुलिन

कोटा. 4 माह की बच्ची को डायबिटीज... चौंकिए नहीं, यह सच है। कोटा के एक क्लीनिक पर झालावाड़ की इस बच्ची की बीमारी पकड़ में आई तो डॉक्टर भी हैरान थे। डायबिटीज भी टाइप-1 निकली, जिसमें ताउम्र इंसुलिन इंजेक्शन लगाने होते हैं।

- सीनियर डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. जीडी रामचंदानी ने बताया कि गत दिनों झालावाड़ से रैफर होकर 14 माह की बच्ची आशा हमारे पास आई। जांच से पता चला कि उसका शुगर 500 से 580 के बीच था। उसके पिता गोविंद सिंह और मां को समझाया कि बच्ची को जिंदगीभर इंसुलिन देना होगा। इंटरनेशनल डायबिटिक फेडरेशन के प्रोजेक्ट "लाइफ फॉर ए चाइल्ड' के तहत इस बच्ची का चयन कर लिया गया।

- इस प्रोजेक्ट के तहत भारत में सिर्फ 9 सेंटर जुड़े हुए हैं, इनमें से कोटा में डॉ. रामचंदानी का सेंटर भी है। अब इस बच्ची के लिए यहीं से निशुल्क इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, ग्लूको स्ट्रिप्स आदि दिए जा रहे हैं।

इतनी कम उम्र में बीमारी का पहला केस,परिवार के पास फ्रिज नहीं, कुल्हड़ में मेंटेन कर रहे इंजेक्शन का तापमान

भास्कर नॉलेज : बीटा सेल्स खत्म होने से नहीं बनता इंसुलिन
बीमारी :
डायबिटीज टाइप-1 के मरीजों के पेनक्रियाज में बीटा सेल्स खत्म हो जाती है। यही सेल्स इंसुलिन बनाती है। इंसुलिन का निर्माण बंद होने से ब्लड व शुगर कंट्रोल नहीं रह पाते। यह इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्या है।


पेरेंट्स को दी गई विशेष ट्रेनिंग
इंसुलिन देने के बाद जब उसे फ्रिज में रखने को कहा तो बच्ची के पिता गोविंद ने कहा कि उसके पास फ्रिज नहीं है और गांव में लाइट भी कम ही आती है। ऐसे में उसे दूसरे विकल्प के तौर पर कुल्हड़ में इंसुलिन रखने की ट्रेनिंग दी गई। वहीं उन्हें नियमित जांच करने, दिनभर में 3 से 4 बार इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की ट्रेनिंग दी गई।


इतनी कम उम्र का पहला केस

डॉ. रामचंदानी ने बताया कि हमारे सेंटर पर 130 बच्चे इस प्रोजेक्ट के तहत रजिस्टर्ड हैं और 280 बच्चे परामर्श के लिए आते हैं। अब तक आए बच्चों में न्यूनतम 2 साल का बच्चा टाइप-1 डायबिटीज वाला था, यह 14 माह के बच्चे का पहला केस आया है। हालांकि ऐसा नहीं है कि इतनी कम उम्र के बच्चों में यह बीमारी नहीं हो सकती, क्योंकि यह बच्चे के इम्युन सिस्टम से जुड़ी समस्या होती है।
लक्षण :बच्चा बार-बार बाथरूम जाता है, वजन कम होता है, बार-बार प्यास लगती है। लेवल बढ़ जाता है तो यूरीन में कीटोंस आने लगते हैं, इसे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस कहते हैं।
इलाज :बच्चे में जब भी ऐसे लक्षण दिखें तो शुगर जांचें। यदि बच्चे की सीबीसी या खून से जुड़ी जांच कराई जा रही है तो एक बार शुगर की जांच जरूर करा लें। बीमारी सामने आने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इंसुलिन दें।

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Web Title: bhaaskar eksklusiv: 14 maah ki bachchi ko daaybitij, jindgaibhar lenaa hoga insulin
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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