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इन सात गांवों में पिछले दस साल से नहीं हुई लड़कों की शादी, 200 रह गए कुंवारे

हालत यह हो गई है कि कई लोगों की तो शादी की उम्र तक गुजर चुकी है।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 03:35 AM IST
कोटा के ताकली डैम के डूब क्षेत्र में आ रहे गांवों में घरों की हालत खस्ता हो गई है। कोटा के ताकली डैम के डूब क्षेत्र में आ रहे गांवों में घरों की हालत खस्ता हो गई है।

कोटा/नई दिल्ली. विकास के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है और राजस्थान के रामगंजमंडी इलाके के 7 गांवों के लोगों पर यह बात सटीक बैठती है। यहां के ताकली डैम के डूब क्षेत्र में आ रहे गांवों के लोगों को 10 साल से पुनर्वास (रिहेबिलिटेशन) के मुआवजे का इंतजार है। इसी आस में लोग न तो मकानों की मरम्मत करा रहे हैं और न ही कोई नया मकान बना रहे हैं। इसी वजह सेे उनकी खुशियों पर ग्रहण लगा हुअा है। नतीजा ये है कि 10 साल से इलाके में शादी की शहनाई नहीं गूंजी। करीब 200 लड़के शादी का इंतजार कर रहे हैं। हालत ये हो गई है कि कई की तो शादी की उम्र तक गुजर चुकी है।

20 साल पहले शुरू हुआ था डैम का काम

- दरअसल, ताकली नदी पर बनने वाले डैम के लिए करीब 20 साल पहले सर्वे हुआ था। लेकिन इसे 2007 में आई वसुंधरा सरकार के वक्त मंजूरी मिली। डैम से इलाके के 31 गांवों की 7386 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई होगी, लेकिन वक्त पर काम पूरा नहीं होने का खामियाजा गांववाले भुगत रहे हैं।

- अब डैम बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन नहरों के साथ डूब क्षेत्र में आ रहे 7 गांवों का पुनर्वास बाकी है। डैम के पानी में 12 गांवों की 850 हेक्टेयर जमीन डूब में आ रही है। इनमें 7 गांव सोहनपुरा, सारनखेड़ी, रघुनाथपुरा, तालियाबरडी, दड़िया, दुड़कली, तमोलिया का अभी तक पुनर्वास नहीं हो सका है।

- गांवों के लोगों का कहना है कि बीते 10 सालों में उन्होंने नए मकान तो दूर, पुराने घरों की मरम्मत तक नहीं करवाई है, क्योंकि घर-खेत सब डूब जाएगा और मुआवजा तो उतना ही मिलना है।

बेटियों की शादी

- तमोलिया में गांव की चौपाल पर बैठे छीतरलाल कहते हैं कि जब से डैम बनने की चर्चा शुरू हुई थी। गांव की बेटियों की शादी तो कर दी, लेकिन बेटों के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं। यहां के देवकरण गुर्जर कहते हैं कि रकम काफी कम है, इसलिए हमने अभी तक मुआवजा नहीं लिया।

- डूब क्षेत्र में रहने वाले बिशनलाल, सीताराम बताते हैं कि जमीन और घर पानी में डूबने वाले हैं। इससे डूब क्षेत्र के 7 गांवों में करीब 200 से ज्यादा लड़के कुंवारे हैं। गांव में रामस्वरूप (45), मगनराम (35), नैनाराम (40), रमेशचंद (30) समेत करीब 35 युवकों की शादी के इंतजार में उम्र निकल गई।

कम है मुआवजे की रकम

- डूब क्षेत्र के तालियाबरडी गांव के रामसिंह, नैनसिंह ने बताया कि दस साल से न मरने के हैं और न जीने के। सरकार बहुत कम मुआवजा दे रही है। किसी को 40 तो किसी के 50 हजार रुपए मिलेगा।

- डूब क्षेत्र के किसानों ने जमीन का मुआवजा तो ले लिया, लेकिन मकानों का मुआवजा नहीं लिया है। सरकार ने डूब क्षेत्र के 566 परिवारों के लिए कुछ साल पहले 7.29 करोड़ रुपए मुआवजे को मंजूरी दी, लेकिन लोगों की मांग है कि उन्हें मकानों के लिए 10 लाख रुपए के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

डूब में आने से लोग अपने मकानों की मरम्मत नहीं करा रहे हैं। डूब में आने से लोग अपने मकानों की मरम्मत नहीं करा रहे हैं।