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अलग-अलग कोटा पहुंची गैंग, नाइट गश्त खत्म होने के बाद की चोरी

शहर में लगातार हो रही चोरियाें के बीच पुलिस ने बिहार के घोड़ासन गैंग के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

Danik Bhaskar | Dec 03, 2017, 07:43 AM IST

कोटा. शहर में लगातार हो रही चोरियाें के बीच पुलिस ने बिहार के घोड़ासन गैंग के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये गैंग इतनी शातिर है कि पूरे देश की पुलिस इससे माल बरामद करने को चुनौती मानती है। कोटा में हुई वारदात में शामिल सभी 8 बदमाशों को गिरफ्तार करके पुलिस ने पूरा माल बरामद कर लिया है।


गैंग के सदस्य विशेष तौर पर मोबाइल चोरी करते थे और नेपाल के एजेंट को आधे रेट में बेच देते थे। ये गैंग बड़ी वारदातें करने के लिए सर्दियों में ही निकलती है। इस बार कोटा शहर को टारगेट बनाया और यहां सबसे पहले साढ़े 6 लाख की 3 चोरियां की। इसके बाद उज्जैन, रतलाम और दिल्ली सहित कई राज्यों के बड़े शहरों को टारगेट बनाया। कोटा पुलिस को इस गैंग से करीब 50 से ज्यादा वारदातों के खुलासे की उम्मीद है। बदमाशों को 7 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। गैंग का सरगना अरुण शाह के खिलाफ इतने मुकदमे हैं कि खुद पुलिस को भी अभी तक नहीं पता। एसपी अंशुमन भौमिया ने बताया कि टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन और सीनियर ऑफिसर्स के एक्सपीरियंस से पूरी वारदात को सुलझाया गया। पढ़िए, वारदात के बाद कैसे कोटा पुलिस ने इंटरनेशनल गैंग को दबोचा।

वारदात हुई तो उड़ी नींद, 30 बार खंगाले सीसीटीवी कैमरे

गैंग ने 13 नवंबर को गुमानपुरा स्थित अरविंद एक्सक्लूसिव व बॉम्बे डाइंग शोरूम से करीब 89 हजार की चोरी की। वहीं, ओप्पो मोबाइल के शोरूम से कुल 32 महंगे मोबाइल चोरी किए। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की करीब 30 बार अलग-अलग एक्सपर्ट से जांच करवाई तो कुछ चेहरे नजर आए, जिन्होंने वारदात को अंजाम दिया था। चेहरे नजर आने के बाद भी यह तय नहीं हो सका कि चोर लोकल हैं या बाहर के। पुलिस के सीनियर ऑफिसर्स की मदद ली गई, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद टेक्निकल इनवेस्टीगेशन की गई।
हर बदमाश का अलग काम, पुलिस की सोच से आगे
बदमाश इतने शातिर थे कि पुलिस का हर दांव फेल होता चला गया। गिरोह के हर बदमाश का काम बंटा होता है। जैसे- कौन ताला तोड़ेगा, कौन सीसीटीवी कैमरे बंद करेगा, कौन माल लेकर फरार होगा और कौन अगला टारगेट तय करेगा।
1. अलग-अलग जगह से कोटा आए ताकि ट्रेस नहीं हो पाएं। अभी कोई नहीं बता पा रहा कौन कहां से आया।
2. कोटा में सभी अलग होटलों में ठहरे। यहां तक कि गैंग के सदस्यों को भी ये खबर नहीं थी कि कौन कहां ठहरा हुआ है ताकि कोई पकड़ में आए तो भी वारदात को अंजाम दिया जा सके।
3. चोरी करने के बाद गैंग का भरोसेमंद आदमी सबसे पहले माल लेकर रेलवे स्टेशन से जो भी पहली ट्रेन मिली, उसी से फरार हो गया।
4. बाद में भी सभी एक जगह एकत्रित नहीं हुए, सभी अलग-अलग रवाना हुए और फिर दूसरे शहर में मिले।
5. मोबाइल का कम से कम यूज करते थे।
6. गैंग के सदस्य सुबह 4 से 5 बजे तक नाइट गश्त खत्म होने का इंतजार करते हैं।
कानपुर में पुलिस ने घेरा तो पथराव कर भागने की कोशिश की
पुलिस ने बताया कि बदमाशों ने 20 दिन तक माल नहीं बेचा। वो 50 प्रतिशत कम रेट में पूरा माल नेपाल के एजेंट को बेचना चाहते थे। इसलिए पूरी गैंग कानपुर गई। पुलिस ने वहां जाल बिछाकर उन्हें पकड़ा। पूरा जाल टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन के आधार पर बिछाया गया ताकि सभी बदमाशों को एक साथ पकड़ा जा सके। वहां भी लोगों ने पुलिस को घेर लिया और पथराव जैसी नौबत आ गई। पुलिस ने कोटा के 89 हजार नकद, 32 मोबाइल, उज्जैन से चोरी 31 मोबाइल भी बरामद किए हैं।
6 राज्यों में की 13 चोरी की वारदातें, 759 मोबाइल चुराए
-कोटा के बॉम्बे डाइंग व अरविंद एक्सक्लूसिव शोरूम से चोरी गए 89,535 रुपए बरामद।
- रावतभाटा रोड स्थित ओप्पो शोरूम से 5.5 लाख के 32 मोबाइल बरामद
- उज्जैन, मप्र. से ओप्पो शोरूम से 4.5 लाख रुपए के 31 मोबाइल बरामद
- रतलाम, म.प्र. स्थित वसुंधरा मोबाइल से 98 मोबाइल चोरी। (कीमत करीब 12 लाख रुपए)
- वडोदरा, गुजरात से 73 मोबाइल चोरी। (कीमत करीब 12 लाख रुपए व 3 लाख 20 हजार नकद)
- पहाड़गंज, दिल्ली में चूना मंडी से 40 हजार चोरी।
- शाहदरा, दिल्ली में दुकान से 38 मोबाइल चोरी।
- सुल्तानपुरी दिल्ली से दुकान से 58 मोबाइल चोरी।
- आसनसोल, पश्चिम बंगाल से 40 मोबाइल चोरी।
- जयगांव, पश्चिम बंगाल से 40 मोबाइल चोरी।
- अलीपुरद्वार, पश्चिम बंगाल के हशिमारा से 175 मोबाइल चोरी।
- त्रिपुरा से 60000 रुपए व महंगे मोबाइल चोरी।
- झारखण्ड-धनबाद से 173 मोबाइल चोरी।
टीम के अच्छे काम के लिए डीजीपी से करेंगे पुरस्कार की अनुशंसा
टीम में सीआई आनन्द यादव, मुनींद्र, हैड कांस्टेबल रणधीर सिंह, रविन्द्र, कांस्टेबल इन्द्र सिंह शामिल रहे। टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन में हैड कांस्टेबल प्रताप सिंह के नेतृत्व में हैड कांस्टेबल अजय सिंह, कांस्टेबल राजन, लक्ष्मण सिंह, विष्णु और मनमोहन सिंह शामिल रहे। वहीं, इनको पुरस्कृत करने के लिए डीजीपी से अनुशंसा करेंगे।


टीम के अच्छे काम के लिए डीजीपी से करेंगे पुरस्कार की अनुशंसा
टीम में सीआई आनन्द यादव, मुनींद्र, हैड कांस्टेबल रणधीर सिंह, रविन्द्र, कांस्टेबल इन्द्र सिंह शामिल रहे। टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन में हैड कांस्टेबल प्रताप सिंह के नेतृत्व में हैड कांस्टेबल अजय सिंह, कांस्टेबल राजन, लक्ष्मण सिंह, विष्णु और मनमोहन सिंह शामिल रहे। वहीं, इनको पुरस्कृत करने के लिए डीजीपी से अनुशंसा करेंगे।