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लड़कियां बोलीं- आधी रात को घुस अाते हैं लड़के, करते हैं बदतमीजी का काम

अाधी रात में लड़के हॉस्टल में घुस जाते हैं और बदतमीजी करते हैं।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 06:55 AM IST
सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

जयपुर. घरों को छोड़कर दूसरे जिलों में पढ़ाई कर रहे अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की रिहाइश, खानपान के लिए सरकार ने काफी अव्यवस्थाओं के बावजूद पुख्ता बंदोबस्त नहीं किया। प्रदेश में केवल पांच अल्पसंख्यक हॉस्टल सरकारी भवनों में चल रहे हैं, बाकी 47 अल्पसंख्यकों हॉस्टलों का जिम्मा निजी संस्थाओं पर छोड़ दिया, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय की 2000 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की रिहाइश, रहना, सोना, खाना, नाश्ता निजी संस्थाओं के भरोसे है।ऐसे में टोंक में अनियमितताओं, छात्राओं की असुरक्षा, उन्हें पर्याप्त खाना नहीं दिए जाने का मामला सामने आया तो अल्पसंख्यक आयोग को प्रसंज्ञान लेना पड़ा।

- आयोग ने टोंक जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व एसडीएम से चार दिन में मामले की तथ्यात्मक जानकारी चाही है।

- टोंक में जिस तरह जिला अधिकारी व एसडीएम के दौरे में छात्राओं ने पीड़ा बताई है, उसे आयोग ने गंभीरता से लिया है।

- छात्राओं ने बताया कि अाधी रात में लड़के हॉस्टल में घुस जाते हैं और बदतमीजी करते हैं। लड़कियां खाना ज्यादा न खाएं, ऐसे में हॉस्टल संचालक संस्था खाने में मिर्च तेज कर देती है।

- गौरतलब है कि सरकार ने प्रदेश में जयपुर के दो में से एक सहित 47 स्थानों में ऐसी ही निजी संस्थाओं को हॉस्टल संचालन का जिम्मा दे रखा है।

- संस्थाएं प्रत्येक छात्र-छात्रा के खर्च के रूप में करीब 2 हजार रुपए मासिक मिलते हैं और संस्थाएं मुनाफा बढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाएं तक नहीं देती। जबकि सरकार को ये सभी हॉस्टल अपने स्तर पर चलाने थे, जिनमें अब तक सरकार केवल 5 हॉस्टल चला रही है, बाकी निजी संस्थाओं के जिम्मे छोड़ रखी है।

तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है
टोंक में जो मामला सामने आया है वह वाकई गंभीर है। हमने प्रसंज्ञान लेकर टोंक के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और एसडीएम से चार दिन में मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग ली है।
- जसबीर सिंह, चेयरमैन, राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग

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