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कंप्यूटर पर काम करने से हाथ में झनझनाहट की बीमारी हो रही

नयापुरा स्थित आईएमए हॉल में हुई अपर लिंब से जुड़ी बीमारियों पर सीएमई

Bhaskar News | Last Modified - Mar 04, 2018, 07:59 AM IST

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    कोटा. घंटों तक कंप्यूटर-लैपटॉप पर काम करने से कामकाजी युवाओं में अब एक नई बीमारी उभरकर सामने आई है। इस बीमारी को मेडिकल साइंस में “कारपल टनल सिंड्रोम’ नाम दिया गया है। जिसमें हाथों में झनझनाहट होती है और दर्द महसूस होता है। यह दर्द मरीज को अनिद्रा का शिकार बनाता है। एम्स के अस्थि रोग विभाग से रिटायर्ड एचओडी प्रोफेसर डॉ. पीपी कोटवाल ने भास्कर से खास बातचीत में इस बीमारी के बारे में जानकारी दी।


    कोटा में शनिवार रात आईएमए की सीएमई में बतौर स्पीकर भाग लेने आए डॉ. कोटवाल ने बताया कि पहले यह बीमारी चोट लगने या फ्रैक्चर वाले मरीजों में ही देखी जाती थी, लेकिन अब काफी कॉमन हो चुकी। इसकी सबसे बड़ी वजह है लंबे समय तक कंप्यूटर-लैपटॉप पर काम करना। उन्होंने बताया कि कलाई पर एक मीडियन नर्व होती है, जिस पर अत्यधिक दबाव आने से यह बीमारी होती है। अब इसके डायग्नोस करने के कई तरीके प्रचलित हैं। सामान्य लक्षणों के साथ-साथ एमआरआई या ईएमजी टेस्ट से भी नर्व का दबाव पता किया जा सकता है। सामान्य स्थिति में दवाइयों से और गंभीर स्थिति में ऑपरेशन से इसका इलाज हो रहा है।

    ऐसे बचें बीमारी से

    डॉ. कोटवाल ने वे टिप्स भी बताए, जिनसे घंटों कंप्यूटर-पर काम करने वाले लोग इस बीमारी से बच सकते हैं-
    2-2 घंटे में ब्रेक लें, प्रॉपर कंप्यूटर चेयर-टेबल हो।
    माउस के लिए पैड का यूज करें। कलाई प्रॉपर ढंग से रखी जाए।
    कंप्यूटर की स्क्रीन आपकी आंखों के ठीक सामने हो। न ऊपर और न नीचे।

    नर्व ग्राफ्टिंग के बाद अब नर्व ट्रांसफर से इलाज
    जयपुर से आए सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित व्यास ने “ब्रेकियल प्लेक्सस इंजरी’ पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भास्कर से बातचीत में बताया कि हाथ को सप्लाई पहुंचाने वाली 5 नसों का एक गुच्छा होता है, जिसमें से कई बार नसें डैमेज हो जाती है। इसमें 5 नंबर नस कंधे को चलाती है, 6 नंबर वाली कोहनी मोड़ती है, 7 नंबर वाली कोहनी को सीधा करती है और 8 नंबर तथा टी-1 वाली नर्व अंगुलियां चलाती है। इनमें से कोई भी नर्व डेमेज होने पर फंक्शन बिगड़ जाता है। आम तौर पर रोड एक्सीडेंट में इसमें चोट आती है। पहले इस तरह की नसों में चोट आने के बाद स्थिति को लाइलाज समझ लिया जाता था और फिर पैर से नर्व की ग्राफ्टिंग करके सर्जरी शुरू हुई। लेकिन अब नर्व ट्रांसफर होने लगा है, जो उससे भी बेहतर रिजल्ट दे रहा है। नर्व ट्रांसफर में दूसरी अच्छी नर्व का कुछ अंश लेकर डैमेज नर्व में ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह एक तरह से नर्व का फंक्शन चेंज करने का प्रोसेस है। इसके अलावा कोटा के ऑर्थोपेडिक सर्जन व आईएमए के अध्यक्ष डॉ. जसवंत सिंह ने अपर लिंब से जुड़ी अन्य बीमारियों पर व्याख्यान दिया।

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Web Title: CME On Diseases Related To Upper Limb In Kota
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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