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हॉस्टल में नहीं मिला विजिटर्स का ब्यौरा, टीम के सदस्य बोले-कैसे होगी छात्राओं की सुरक्षा

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने किया हॉस्टल व थानों का निरीक्षण

Danik Bhaskar | Jan 19, 2018, 06:17 AM IST

कोटा. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम गुरुवार को निरीक्षण के लिए कोटा पहुंची तो हॉस्टलों की हालत देखकर चौंक गई। टीम एक गर्ल्स हॉस्टल में पहुंची तो लड़कियों के अलावा किसी के भी आने व जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला। परिजनों के नाम पर कोई भी फर्जी आईडी दिखाकर हॉस्टल में आ सकता है।

टीम में आयोग सदस्य एसपी सिंह, उमा रत्नू और डॉ. साधना सिंह शामिल थीं। आयोग ने विज्ञान नगर व महावीर नगर थाने का निरीक्षण करके जेजे एक्ट की पालना की भी व्यवस्थाएं चेक कीं। दोनों ही थानों में बाल डेस्क नहीं मिली। बालकों की शिकायतों के लिए बनाई गई टीम में समाजसेवी की जगह महिला पुलिसकर्मी को शामिल कर रखा था।


इससे पहले टीम हॉस्टल के हालातों का जायजा लेने के लिए प्रज्ञा रेजीडेंसी में गई। टीम ने सबसे पहले हॉस्टल में आने व जाने वालों का रजिस्टर देखा। इस रजिस्टर में मात्र छात्राओं के ही आने व जाने का टाइम था। इससे टीम के सदस्य खुश नजर नहीं आए। वहां मौजूद वार्डन ने कहा कि यहां छात्राओं के अलावा उनके पैरेंट्स ही आते हैं। इस पर आयोग सदस्य एसपी सिंह ने कहा कि अगर कोई फर्जी आई कार्ड लेकर हॉस्टल में आ जाए तब क्या करोगे। छात्राओं की सुरक्षा के लिए आने व जाने वाले हरेक व्यक्ति की एंट्री की व्यवस्था करवाई जाए। हॉस्टल की सफाई व्यवस्था और कमरों की साइज से भी आयोग के सदस्य संतुष्ट नहीं लगे।

मीटिंग में अधूरे आंकड़े लेकर पहुंचे अफसर, जताई नाराजगी

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने हॉस्टल संचालकों की बैठक भी ली। एसपी सिंह ने साफ कहा कि हॉस्टल संचालक पूरी तरह से गंभीर हो जाएं। अब सीधा मुकदमा दर्ज होगा। आप बच्चों से कमाई के लालच में सुरक्षा नहीं दे रहे हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा। हॉस्टल संचालक अपने जमीर को जिंदा रखें। उन्होंने यहां शिक्षा, चिकित्सा, आंगनबाड़ी, लेबर, परिवहन, पुलिस सहित अन्य विभागों के अधिकारियों की भी मीटिंग ली। अधिकारियों द्वारा आधे-अधूरे आंकड़े बताने पर नाराजगी भी जताई।


प्रदेश के लिए बनेगी गाइड लाइन
हॉस्टल संचालकों को हिदायत देते हुए सिंह ने कहा कि मीटिंग में लिए निर्णय की पालना नहीं होगी तो आयोग सख्ती बरतेगा। हॉस्टल के लिए बनने वाली गाइड लाइन पूरे स्टेट के लिए होगी। इसकी पालना नहीं हुई तो हॉस्टल बंद कर देंगे। एडीएम सिटी बीएल मीणा को 15 दिन में पालना रिपोर्ट आयोग को भिजवाने के निर्देश दिए। उमा रत्नू ने आंगनबाड़ी सीडीपीओ सरोज मेहर के प्रति उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कार्यवाहक डिप्टी डायरेक्टर कृष्णा शुक्ला को बुलवाया और केंद्रों के निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

फिर उठा हॉस्टल संचालकों की लापरवाही का मुद्दा

- सोशल वर्कर ईशा यादव ने कहा कि हॉस्टल गाइडलाइन की पालना नहीं कर रहे हैं। हॉस्टल वार्डन के नाम भवनों पर नहीं लिखे हुए हैं। बंद कमरे में निर्णय होते हैं इनकी पालना नहीं होती है। इनके लिए कोई कानून व्यवस्था नहीं है। सिंह ने बाद में हॉस्टल में सुधार के लिए सुझाव भी मांगे।
-हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल ने कहा कि हॉस्टल संचालकों की गाइड लाइन के संबंध में मीटिंग हो चुकी है। 24 जनवरी को हम एग्जीबिशन लगा रहे हैं। इसमें बॉयोमेट्रिक उपस्थिति सहित अन्य प्रक्रिया होगी। बच्चों के हॉस्टल से आने जाने की सूचना पैरेंट्स को भी मिलेगी।

अन्य विभागों को भी दिए निर्देश
चिकित्सा विभाग : सदस्य सिंह ने चिकित्सा विभाग के अधिकारी डाॅ . सुधींद्र से पालना गृह में आए बच्चों का आंकड़ा पूछा तो वो जवाब नहीं दे पाए। इस पर सिंह ने हिदायत दी की मीटिंग में पूरे आंकड़ों के साथ ही आएं।
शिक्षा विभाग : एडीईओ नरेंद्र गहलोत से राइट टु एजुकेशन में एडमिशन के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर सही आंकड़ा बताने की बात कही। उन्होंने एडीएम को सही आंकड़े भिजवाने के निर्देश दिए।
सामाजिक एवं न्याय एवं अधिकारिता विभाग : सिंह ने विभाग के डिप्टी डायरेक्टर से नवीन जेजे एक्ट 2015 को प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा। बालिकागृह रजिस्टर्ड नहीं हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।
श्रम विभाग : उन्होंने श्रम विभाग के अधिकारियों से बंधुआ मजूदरों की संख्या और टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही अपने यहां बजट के उपयोग करने की बात भी कही।
परिवहन विभाग : परिवहन विभाग से बाल वाहिनियों की रेगुलर जांच करने और वाहनों में अग्निशमन यंत्र को अनिवार्यता से लागू करने के निर्देश देकर फरवरी में स्कूल संचालकों के सहयोग से बाल वाहिनियाें के स्टाफ को ट्रेनिंग कैंप फरवरी में लगवाने की बात कही।