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मगरमच्छों के बीच चंबल नदी पार कर लकड़ियां बीनने जाती हैं महिलाएं

जिंदगी के लिए रोज मौत से जूझने की मजबूरी।

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 07:31 AM IST
elderly Women cross chambal river with tube boat support

कोटा. कृशकाय शरीर, उम्र 75 वर्ष और हर रोज घड़ियाल सेंचुरी में खतरनाक मगरमच्छों के बीच मात्र ट्यूब के सहारे चंबल नदी को दो बार पार करना। हर पल मौत का खतरा। कभी मगरमच्छ के हमले का डर तो कभी ट्यूब के धोखा देने का खतरा, लेकिन इसके बावजूद बिरदी बाई अपने परिवार का पेट पालने के लिए ये जोखिम उठाती हैं। ये दास्तान भीतरिया कुंड के निकट भील बस्ती में रहने वाली बिरदी बाई की ही नहीं हैं, बल्कि 50 वर्षीय सुगना बाई, 55 साल की रामकन्या बाई सहित कई महिलाओं की है।

- दरअसल, ये हर सुबह नदी पार करके जंगल में जाती हैं और वहां पड़ी सूखी लकड़ियां बिनकर लाती हैं। जिससे इनका चूल्हा जलता है।

- कुछ लकड़ियां खुद के परिवार का खाना बनाने के काम आ जाती हैं और बाकी लकड़ियों को बाजार में बेचकर दो वक्त की रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाता है।

तीन पीढ़ियों से उठा रही ये खतरा

- बिरदी बाई बताती है कि उनकी तीन पीढ़ियां ये काम कर रही है। तीन दशक से अधिक हो गए, इसी तरह लकड़ियां लाते हैं और परिवार चलाते हैं। उसकी बेटी संतोष भी अब इसी कार्य को कर रही है।

न राशन, न वृद्धावस्था पेंशन
- इनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं है। आज तक इस बस्ती वालों को न तो राशन का गेहूं मिलता है और न ही इन्हें कोई वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। भामाशाह कार्ड तक नहीं बन पाया।

- पुरुष वर्ग फुटकर मजदूरी करता है। कभी मिल गई तो ठीक नहीं तो कई-कई दिन बेरोजगार घूमना पड़ता है।

- दर्जनों महिलाएं चंबल पार करके लकड़ी बीनने जाती हैं।

- 700 मीटर चौड़ाई है चंबल की

- 130 फीट गहराई है नदी की

- 1080घड़ियाल और मगरमच्छ हैं सेंचुरी में

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