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कलेक्टर ऑफिस के बाहर किसान बने मुर्गा, देखने के लिए उमड़ा लोगों का हुजूम

चेहरे पर गुस्सा व हाथों में मुरझाई फसल लिए नारेबाजी, करीब 3-4 मिनिट मुर्गा बनने के बाद किसानों ने सुखी हुई गेहूं की फसल

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2018, 02:37 AM IST
farmers demonstration in front of collector office in bundi

बूंदी/कोटा. नहरी पानी की आस लगाए बैठे बूंदी ब्रांच केनाल के अंतिम छाेर के किसानों का आखिरकार सब्र का बांध टूट गया। अपनी पीड़ा बताने के लिए किसान जब बूंदी सीएडी कार्यालय पहुंचे तो वहां अधिकारी को नहीं पाकर गुस्साए किसानों ने नारेबाजी करना शुरू कर दिया। हालांकि पुलिस को पहले सूचना मिलने जाने से यहां जाब्ता तैनात था। किसानों ने कार्यालय के अंदर घुसना चाहा, लेकिन पुलिस ने उन्हें बाहर ही रोके रखा।


गुस्साए किसानों ने जूतों की माला लेकर घुसना चाहा, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। बिना समय गंवाए किसान पंचायत समिति सदस्य महेंद्र डोई के नेतृत्व में एक्सईएन का पुतला लेकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर जा पहुंचे। पूरे रास्ते किसानों ने जलती हुई पेट्रोमैक्स अपने सिर पर उठाए रखी।

- कलेक्ट्रेट के बाहर पुतला दहन के बाद महिला किसान रामप्यारी, मुकेशी बाई, शांतिबाई मुर्गा बन गई। महिला किसानों को मुर्गा बना देख किसान लोकेश माली, पृथ्वीराज गुर्जर, रामहेत राठौर, मांगीलाल कहार, जुगराज डोई भी मुर्गा बन गए। करीब 3-4 मिनिट मुर्गा बनने के बाद किसानों ने सुखी हुई गेहूं की फसल को दिखाते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की।


कलेक्टर और एक्सईएन को बाहर बुलाने की मांग पर अड़े किसान

पुलिस ने किसानों को राेकना चाहा, लेकिन वे नहीं रुके और कलेक्ट्रेट के अंदर आ पहुंचे। बैरिकेडिंग पर रुके किसान नारेबाजी करते हुए कलेक्टर व एक्सईएन को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। बाद में किसानों को प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए भेजने के लिए समझाइश की। इस पर पंचायत समिति सदस्य महेंद्र डोई, तुलसीराम शर्मा, लटूरलाल मीणा, ख्यावदा सरपंच विमला डोई, मस्तराम गुर्जर एडीएम नरेश मालव से वार्ता के लिए पहुंचे।


रोटेशन के हिसाब से नहरों में पानी चलाया जा रहा है। 24 जनवरी को अंतिम छोर के गांवों में पानी ऐंटर हो गया था, लेकिन कुछ किसानों ने जो पहले भी पानी ले चुके थे उन्होंने अपने सिस्टम खोलकर रिपीट कर दिया। इससे जो पानी अंतिम छोर की ओर बढ़ा था वो भी चला गया। इसकी सूचना लगी तो 25 जनवरी को मैं स्वयं वहां पहुंचा और अंतिम छोर के किसानों से सिस्टम को बंद करने के लिए सहयोग मांगा, लेकिन किसानों ने सहयोग नहीं किया। इस पर शाम को जेसीबी मशीन मंगवाकर धोरों को बंद कर दिया। पिछले तीन दिन से यही स्थिति बनी हुई है। आगे बढ़ते हैं तो पीछे के किसान सिस्टम खोल देते हैं।

पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रही, दूसरे में बनी बात

किसान प्रतिनिधिमंडल की पहले दौर की वार्ता एडीएम नरेश मालव से हुई, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। पंसस महेंद्र डोई का कहना है कि बूंदी ब्रांच केनाल के अंतिम छोर में पड़ने वाले छापरदा, हनोतिया, बिचड़ी, ख्यावदा, छावनी, भाटों का खेड़ा गांवों में फसल 85 से 90 दिन की होने को आई। इन फसलों को अब तक एक ही पानी मिला है। नहरी पानी नहीं मिलने से 50 प्रतिशत फसलों में खराबा हो चुका है। सीएडी अधिकारी तमाम निर्देशों को नजरअंदाज कर हेड के प्रभावशाली किसानों के दबाव में आकर हेड के माइनर खोल देते हैं। ऐसे में हमारी फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई। एडीएम ने किसानों की बात गंभीरता से सुनकर सीएडी अधिकारियों से मोबाइल पर बात कर किसानों को कहा कि वे 15 दिन बाद पानी देने की बात कह रहे हैं। इस पर किसान उखड़ गए और कहा कि 15 दिन बाद हम पानी का क्या करेंगे। फसलों को तो अभी पानी चाहिए। वार्ता चलने के दौरान प्रदर्शन कर रहे किसान सीनियर सैकंडरी स्कूल ग्राउंड में जाकर बैठ गए थे। वार्ता विफल होने की सूचना लगते ही वे सब वापस कलेक्ट्रेट में आ गए।


पहले दौर की वार्ता विफल होने के बाद किसानों की दूसरे दौर की वार्ता कलेक्टर शिवांगी स्वर्णकार से हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को पूरी स्थिति से अवगत करवाया। किसानों ने सारी स्थिति के लिए सीएडी अभियंता को जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबित करने की मांग की। किसानों का कहना था कि चैन संख्या 1244 पर 155से 160 का गेज लेवल मेंटेन किया जाए, चैन संख्या 1865 पर 80 से 85 का गेज लेवल मेंटेन रहे, दिन-रात पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जाए, बार-बार पानी खोलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस पर कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को अाश्वस्त करते हुए कहा कि मंगलवार को सीएडी एसई व तहसीलदार मौका स्थिति का जायजा लेने के लिए अंतिम छोर का जायजा लेंगे।

farmers demonstration in front of collector office in bundi
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