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कोटा में फ्री एंजियोग्राफी मुश्किल, मरीजों को बाजार से लाना पड़ता है सामान

मुख्यमंत्री ने की सरकारी अस्पतालों में फ्री एंजियोग्राफी की घोषणा, कोटा में हर माह होती है 25 एंजियोग्राफी

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 07:29 AM IST

कोटा. चार साल पूरे होने पर राज्य सरकार ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एंजियोग्राफी निशुल्क करने की घोषणा की है। लेकिन कोटा मेडिकल कॉलेज में न तो अभी एंजियोग्राफी फ्री की जा रही है और न ही आने वाले दिनों में ऐसा संभव होने की कोई उम्मीद है। पिछले 2 दिनों में कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जितनी भी एंजियोग्राफी हुई, सभी से तय शुल्क लिया गया है। शुल्क वसूली के सवाल पर अधीक्षक डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय कहते हैं कि अभी सरकार से ऑर्डर ही नहीं मिले, ऑर्डर मिलने के बाद हमारे यहां भी फ्री कर देंगे।

खैर... सरकारी ऑर्डर मिलने के बाद एंजियोग्राफी फ्री तो हो जाएगी, लेकिन बगैर सामान के फ्री का क्या औचित्य? अस्पताल के पास एंजियोग्राफी में जरूरी कंज्यूमेबल्स व अन्य सामान नहीं हैं, ऐसे में यदि ये सारे सामान फ्री होने के बाद भी मरीजों से मंगवाए गए तो उन्हें 3 से 4 हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इन सामान की खरीद की प्रक्रिया पिछले 6 माह से चल रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन अब तक फर्में ढूंढ रहा है। कोटा में अभी हर माह 20 से 25 एंजियोग्राफी हो रही है।

इन सामान की नहीं होती सरकारी खरीद

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हंसराज मीणा ने बताया कि एक एंजियोग्राफी के लिए बहुत सारे कंज्यूमेबल्स आइटम की जरूरत होती है। हाथ से एंजियोग्राफी करने पर रेडियल शीट किट, टाइगर कैथेटर, थर्मो वायर तथा पैर के रास्ते एंजियोग्राफी करने पर फिमोरल शीट किट, जेएलजेआर कैथेटर, जेटिप वायर, प्रेशर लाइन, आईवी सैट आदि की जरूरत होती है। सरकार की तरफ से 1 हजार रुपए शुल्क तय है, सामान मरीज को खुद ही लाने होते हैं। यह सारा सामान करीब 3-4 हजार रुपए का आता है। फ्री तो तब कर पाएंगे, जब हमारे पास गवर्नमेंट सप्लाई में यह सारा सामान आ जाएगा।

मई से काम कर रही है कैथ लैब

कॉर्डियोलॉजी विभाग में मई, 2017 में कैथ लैब लगी। तब से एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी शुरू हुई। अब विभाग की कमोबेश हर दिन ओपीडी भी शुरू हो गई है।

एंजियोग्राफी फ्री करने के ऑर्डर नहीं मिले हैं। रहा सवाल सामान का तो उसकी खरीद अगले एक सप्ताह में कर ली जाएगी। देरी इसलिए हुई, क्योंकि पहले फर्मों ने सामान ही सप्लाई नहीं किए।

- डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय, अधीक्षक, न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल