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1000 बीघा में लहसुन की खेती, बुवाई के लिए दूसरे गांवों से बुलाने पड़े मजदूर

किसानों का दावा: इस साल 25 प्रतिशत रकबा बढ़ेगा, 70 फीसदी निराई-गुड़ाई पूरी, एक बीघा में खर्च हो जाते हैं 10 हजार रुपए

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 01:08 AM IST
Garlic cultivation in one thousand bigha land near bundi kota

बूंदी/कोटा. राजस्थान के झालीजी का बराना इलाके के काली तलाई और नयागांव के ज्यादातर किसान लहसुन की फसल में जुटे हुए हैं। इन गांवों के खेतों में जिधर देखो उधर ही लहसुन लगा हुआ है। 2 माह की फसल पर निराई-गुड़ाई करने में मजदूरों की इन दिनों खेतों पर लाइनें लगी नजर आ रही है। इस गांव के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रोजाना आसपास के गांवों के अलावा कस्बे से भी करीबन 500 महिलाएं मजदूरी को पहुंच रही हैं।


- काली तलाई गांव के किसान भवनेश मालव ने बताया कि गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष गांव के 25 प्रतिशत किसानों ने ज्यादा लहसुन लगाया है। करीब 75 प्रतिशत रकबा में अर्थात एक हजार बीघा में इस वर्ष लहसुन की खेती की जा रही है। इससे यहां मजदूरों की कमी खलने लगी है।

- इस बार एक बीघा लहसुन से कचरा निकलवाने में करीबन 30 मजदूरों को लगाना पड़ रहा है। जिसका खर्च एक दिन में 4500 आ रहा है, जबकि 2 माह की फसल होने से पूर्व ही डीएपी खाद का एक कट्टा सहित एक क्विंटल बीघा पर बीज डालना सहित अन्य खर्चा तो लग चुका है।

- इस फसल को 6 माह के अंतराल में निराई-गुड़ाई कर 10 हजार रुपए बीघा खर्चा हो जाता है।

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Garlic cultivation in one thousand bigha land near bundi kota
Garlic cultivation in one thousand bigha land near bundi kota
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