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10 फीट का हेलमेट बनाया, क्योंकि शहर के 80 फीसदी लोग इसे गैरजरूरी समझते हैं

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 07:55 AM IST

हेलमेट लगा होता तो 70 फीसदी यानी 11 महीने में 60 जान बचाई जा सकती थीं।

helmet of 10 feet in kota

कोटा. पारिजात कॉलोनी के पार्क में लॉयंस क्लब कोटा नार्थ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने 10 फीट का विशालकाय हेलमेट बनवाया है। इसका मकसद उन लोगों को संदेश देना है जो हेलमेट लगाने में शर्माते हैं। इसे चालान के डर से मजबूरी में लगाते हैं और सर पर बेवजह का बोझ मानते है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ मैनेजमेंट रिसर्च यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट की मानें तो कोटा में 80% लोग हेलमेट नहीं लगाते। हर साल हादसों में इस वजह से 5% लोग मौके पर और 12% लोग अस्पताल में दम तोड़ देते हैं। वहीं, 50% लोग जीवनभर इसका दंश टूटे हाथ, पैर के रूप में झेलते हैं।

तीसरी रैंक पर है कोटा पुलिस चालान बनाने में
जयपुर में 75,417, जोधपुर में 46,325, कोटा में 43 हजार, बीकानेर में 41,859, भरतपुर में 10,822, अजमेर में 7,209, उदयपुर में 10,634 हेलमेट के चालान बने हैं। जनवरी से सितंबर 2017 तक।

एक्सपर्ट व्यू : सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. एसएन गौतम ने 2016 में अस्पतालों में आने वाले 322 लोगों पर सर्वे किया। 83% हादसे तेज स्पीड में बाइक चालने से हुए। 70% लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था। निष्कर्ष... निकाला कि हेलमेट लगा होता तो 70 फीसदी यानी 11 महीने में 60 जान बचाई जा सकती थीं।

#kotahelmet

प्रोजेक्ट चेयरमेन वरूण रस्सेवट की अपील है कि यहां आइए और हेलमेट के साथ सेल्फी लीजिए... सेल्फी हमेशा इसकी याद दिलाएगी कि जब भी बाइक पर घर से निकले, हेलमेट सर पर लगा हो। #kotahelmet इस हैशटैग से यह संदेश पूरे देश में जाए।

- 100 जान जाती है औसतन हर साल कोटा में सड़क हादसों में।
- 10 से 15 जगहों पर ही चालान बनाती है पुलिस, तब यह स्थिति।

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