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10.30 बजे तक पहुंचा गिनती का स्टाफ, लंच के बाद लौटे ही नहीं रसद विभाग के कर्मचारी

सुबह 9.30 बजे ऑफिस में नहीं मिला कोई अफसर, काम के लिए आने वाले लोगों को होती है परेशानी

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 07:39 AM IST
लंच के बाद खाली कार्यालय। लंच के बाद खाली कार्यालय।

कोटा. जिले भर से आने वाले लोगों की सुनवाई तथा उनकी समस्याएं हल करने वाले कलेक्ट्रेट के ऑफिसों के काम को लेकर लगातार शिकायतें आती रहती हैं। आम तौर पर लोगों की शिकायत रहती है कि कर्मचारी मिलते ही नहीं हैं। कई बार चक्कर लगाने के बाद मिलते भी हैं तो कोई बहाना बनाकर काम टाल देते हैं। अधिकारियों से मिलना तो सपना सच होने जैसा है।

इस तरह की लगातार शिकायतों के बाद भास्कर रिपोर्टर ने सोमवार का दिन कलेक्ट्रेट में बिताया। सुबह 9 बजे से शाम 6 तक अफसरों और कर्मचारियों की गतिविधियों को देखा। इस दौरान अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी लेट आए। लंच के बाद तो रसद विभाग के कर्मचारी लौटे ही नहीं। वहीं अफसर मीटिंग में व्यस्त रहे। इसके चलते आम आदमी की सुनवाई ही नहीं हुई। 9 घंटे के दौरान अधिकारी मुश्किल से 1 घंटे ही अपने चैंबर में बैठे। सबसे बड़ी हैरानी वाली बात ये है कि कलेक्ट्रेट के किसी भी ऑफिस में अटेंडेंस के लिए बायोमैट्रिक मशीन नहीं है।

सभी को पाबंद करेंगे

यह सही है कि कर्मचारी व अधिकारी देरी से आते हैं। इसमें सुधार किया जाएगा, लेकिन कई बार कर्मचारियों को देर तक रुकना पड़ता है, अवकाश में भी उन्हें बुलाया जाता है। इसलिए थोड़ी रियायत देते हैं, फिर भी पाबंद करेंगे। मीटिंग के समय जनसुनवाई के लिए एडीएम रहते हैं, फरियादी उनसे मिल सकते हैं।
-रोहित गुप्ता, कलेक्टर

भास्कर लाइव : यूं गुजरा कलेक्टर का पूरा दिन

- कलेक्टर रोहित गुप्ता सुबह 10.20 बजे ऑफिस पहुंचे। यहां कुछ देर रुकने के बाद वे जल स्वावलंबन की बैठक में चले गए। यह करीब 12 बजे तक चली।
- इसके बाद वे रेवेन्यू से संबंधित वीसी में चले गए। यह करीब 12.55 तक चली।
- मीिटंग से फ्री होकर ऑफिस में बैठे तथा आने वाले लोगों से मिले।
- इसके बाद फिर से 1.28 पर नीचे उतरे और राजस्थान दिवस की तैयारियों पर टैगोर हाल में चल रही बैठक में शामिल हुए। यहां से 1.57 पर बाहर निकले और एडीएम सिटी बीएल मीणा से बात करते हुए लंच पर चले गए।
- शाम 3.58 पर वापस लौटे और अपने ऑफिस में बैठे रहे। इस दौरान वकीलों व चंबल सिंचाई परियोजना के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
- इसके बाद पुलिस व अन्य विभाग के अधिकारियों से मिले।

...और जनसुनवाई के समय में मीटिंग में व्यस्त रहे
- कलेक्टर की जनसुनवाई का समय दोपहर 1 से 2 बजे तक है। सोमवार को इस दौरान वो मीटिंग में व्यस्त रहे। सीएडी कर्मचारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतीश चंद्र अग्रवाल पौने 2 बजे कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे। बताया गया कि कलेक्टर राजस्थान दिवस की तैयारी बैठक में हैं। वे इंतजार करते रहे, बाद में पता चला कि लंच पर चले गए। करीब 3.50 बजे कलेक्टर रोहित गुप्ता लौटे तब उनके कक्ष के दरवाजे ही पर समस्या बताई।

- अग्रवाल ने बताया कि कलेक्टर इस अवधि में अक्सर नहीं मिलते, मीटिंग में होते हैं। कलेक्टर के बैठक में होने के कारण अलग-अलग मुद्दों को लेकर पहुंचे वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों, एमबीएस, जेके लोन व मेडिकल कॉलेज के ठेका श्रमिकों को एडीएम से मिलकर ही लौटना पड़ा।

10 बजे तक कर्मचारी, अधिकारी गायब
ऑफिस आने का समय सुबह 9.30 बजे है, लेकिन 10 बजे तक नाममात्र कर्मचारी ही पहुंचे थे। भास्कर टीम कमरा नंबर 21, 27 और 28 में पहुंची तो यहां 2 से 3 कर्मचारी ही थे। एसडीएम व एडीएम सिटी भी नहीं थे। उनके कार्यालय में कर्मचारियों की मौजूदगी भी नाममात्र की थी। कंट्रोलरूम पूरे दिन बंद रहा। रसद विभाग के कार्यालय में प्रवर्तन अधिकारी, वितरण प्रथम, स्थापना शाखा, कम्प्यूटर अनुभाग तथा कर्मचारियों की सीट खाली थी। रसद अधिकारी का कक्ष भी उनकी अनुपस्थिति बता रहा था। यही हाल लाडपुरा तहसील का था, तहसीलदार गजेंद्र सिंह दुर्घटना के कारण अवकाश पर हैं, लेकिन नायब तहसीलदार जगदीश गहलोत कार्यालय में नहीं थे।

ये कलेक्ट्रेट का नोटिस बोर्ड है जहां लिखा है बातें कम, काम ज्यादा। ये कलेक्ट्रेट का नोटिस बोर्ड है जहां लिखा है बातें कम, काम ज्यादा।
1. एकल खिड़की से नहीं मिली जमीन की नकल 1. एकल खिड़की से नहीं मिली जमीन की नकल

कलेक्ट्रेट परिसर की एकल खिड़की पर रामगंजमंडी से आए दुर्गाशंकर काफी देर से खड़े थे। उनसे पूछा तो बताया कि अपनी जमीन की नकल लेने के लिए आया हूं। खिड़की तो खुल गई, लेकिन अंदर कोई कर्मचारी नहीं था। सुबह 10.15 बजे हालत ये थी कि यहां झाड़ू लग रही थी। दुर्गाशंकर ने बताया कि वह 5-6 बार यहां का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अभी तक नकल नहीं मिली।

2. 3.30 बजे तक इंतजार, नहीं मिले कलेक्टर 2. 3.30 बजे तक इंतजार, नहीं मिले कलेक्टर

सीमलिया क्षेत्र के हनोतियां में रहने वाले रामस्वरूप एडीएम की ओर से दिए फैसले को लागू करवाने के लिए कलेक्टर से मिलने आए थे। उन्होंने बताया कि जमीन का फैसला हो गया, लेकिन वह लागू नहीं हो पा रहा। कई जगह शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो अब कलेक्टर को आवेदन देने आए। रामस्वरूप दोपहर 3.30 बजे तक इंतजार करने के बाद कलेक्टर से बिना मिले ही लौट गए।

 

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लंच के बाद खाली कार्यालय।लंच के बाद खाली कार्यालय।
ये कलेक्ट्रेट का नोटिस बोर्ड है जहां लिखा है बातें कम, काम ज्यादा।ये कलेक्ट्रेट का नोटिस बोर्ड है जहां लिखा है बातें कम, काम ज्यादा।
1. एकल खिड़की से नहीं मिली जमीन की नकल1. एकल खिड़की से नहीं मिली जमीन की नकल
2. 3.30 बजे तक इंतजार, नहीं मिले कलेक्टर2. 3.30 बजे तक इंतजार, नहीं मिले कलेक्टर
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