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डॉक्टर ने प्रोस्टेट कैंसर के इलाज का नया तरीका ढूंढा, कीमोथैरेपी की जगह कैप्सूल से होगा तबीयत में सुधार

अमेरिका में मिला बेस्ट रिसर्च पेपर का अवार्ड, 103 साल में यह अवार्ड पाने वाले पहले भारतीय बने डॉ. हेमंत राठौर

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 07:54 AM IST

कोटा. डाॅ . हेमंत राठौर ने अमेरिका में भारत का मान बढ़ाया है। रेडियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ नार्थ अमेरिका की ओर से शिकागो में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में उनके रिसर्च पेपर को बेस्ट पेपर का अवार्ड दिया है। डॉ. राठौर यह अवार्ड हासिल करने वाले पहले भारतीय हैं। 103 साल से यह सोसायटी विभिन्न मेडिकल एकेडमिक प्रोग्राम आयोजित करवा रही है।


दरअसल, उनकी पायलट स्टडी प्रोस्टेट कैंसर पर थी। उन्होंने बिना कीमोथैरेपी और हारमोनल थैरेपी के कैंसर का इलाज ढूंढा है। इस ट्रीटमेंट को रेडियोआईसोटोप का नाम दिया गया है। डॉ. हेमंत ने बताया कि जिन पेशेंट्स पर कीमोथैरेपी और हारमोनल थैरेपी असर नहीं करती, उन पेशेंट्स को यह टारगेटेड थैरेपी दी गई। इसके तहत कैप्सूल के जरिए उनके कैंसर सेल को रोककर खत्म किया गया। 6 माह तक पेशेंट की मॉनिटरिंग करने के बाद टेस्ट में पॉजिटिव रिजल्ट आए हैं। यह कैप्सूल सीधे प्रोस्टेट ग्रंथि पर ही असर डालते हैं। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। 63 प्रतिशत मरीजों पर इसका रिजल्ट पॉजिटिव आया।

डॉ. हेमंत कोटा में आरकेपुरम में रहने वाले हैं। उनकी बेसिक एजुकेशन व मेडिकल एंट्रेंस की तैयारियां कोटा से हुई। इसके बाद उज्जैन से एमबीबीएस करने के बाद मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल से एमडी की और अभी वहीं पर प्रैक्टिस कर रहे हैं।

66 हजार रिसर्चर ने भेजे थे पेपर

डॉ. राठौर ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में 66 हजार विशेषज्ञों ने रिसर्च पेपर थे। इसमें से 11 हजार पेपर शार्ट लिस्टेड किए। डॉ. राठौर का पेपर इन 11 हजार पेपर में बेस्ट रहा। इनको एक हजार डॉलर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


3 साल से चल रही थी रिसर्च
डॉ. राठौर ने बताया कि उनके सामने कई ऐसे केस आए जब पेशेंट पर कैंसर ट्रीटमेंट के प्रचलित तरीके असर नहीं कर रहे थे। इस पर उन्होंने 3 साल पहले यह रिसर्च शुरू की। शुरुआत में कुछ पेशेंट को अलग ढंग से ट्रीटमेंट दिया। पॉजिटिव रिजल्ट आने पर अन्य पेशेंट्स को भी यह ट्रीटमेंट दिया।