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Bhaskar Impact: कैलाश नगरी में डिस्पेंसरी, रोड और ट्यूबवेल की सुविधा मिलेगी

राजावत बोले- 1 हजार गांव गरीबी-भुखमरी के शिकार

Dainik Bhaskar

Dec 21, 2017, 07:36 AM IST
भास्कर की खबर के बाद गांव पहुंचे राजावत भास्कर की खबर के बाद गांव पहुंचे राजावत

कोटा. गांव और उसमें बसे लोगों की गरीबी को देखते हुए डिजिटल इंडिया का सपना गरीबों के साथ मजाक है। अभी प्रदेश में करीब 1 हजार गांव ऐसे हैं जहां गरीबी व भुखमरी है। यह बात बुधवार को लाडपुरा विधायक भवानीसिंह राजावत ने भास्कर द्वारा गांवों की दुर्दशा की खबर प्रकाशित करने के बाद कैलाश नगरी गांव का दौरा करने के बाद कही है।


- उन्होंने कहा कि ग्रामीण जनसुविधाओं के अभाव में जीवन यापन नहीं कर पा रहे हैं। कैलाश नगरी गांव में अनजान व्यक्ति का जाना ही संभव नहीं है। गांव पक्की सड़क से 10 किलोमीटर पहले ही कट जाता है। वह वन विभाग के कर्मचारियों को साथ लेकर अभावों से भरे गांव में पहुंचे और वहां के लोगों की समस्याएं सुनीं।

- विधायक राजावत ने फोन पर ही कलेक्टर रोहित गुप्ता से बात की और तत्काल कैलाश नगरी में पेयजल के लिए ट्यूबवेल लगवाने को कहा। विधायक ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को भी इस संबंध में निर्देश दिए हंै।

पंचायत मुख्यालय तक बनवाएंगे सड़क
- विधायक ने कहा कि गांव में अस्थाई उप स्वास्थ्य केंद्र खुलवाया जाएगा। इसके लिए गुरुवार को वह सरकार के पास प्रस्ताव भेजेंगे। कैलाश नगरी गांव सांगोद विधानसभा में स्थिति है।

- वह सांसद ओम बिरला व विधायक हीरालाल नागर से 5 लाख रुपए स्वीकृत करवाते हुए गांव में खरंजा बनवाएंगे।

- विधायक ने बताया कि नरेगा के तहत दाता ग्राम पंचायत मुख्यालय से कैलाश नगरी तक ग्रेवल सड़क बनवाई जाएगी। ताकि गांव के पशुपालक दूध आसपास के कस्बों व गांव में जाकर बेच सकें।

बुधवार के अंक में दैनिक भास्कर ने बताया था कि कैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे कोटा जिले के कई गांवों के लोगों की आय नरेगा मजदूर से भी कम है। बुधवार के अंक में दैनिक भास्कर ने बताया था कि कैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे कोटा जिले के कई गांवों के लोगों की आय नरेगा मजदूर से भी कम है।
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भास्कर की खबर के बाद गांव पहुंचे राजावतभास्कर की खबर के बाद गांव पहुंचे राजावत
बुधवार के अंक में दैनिक भास्कर ने बताया था कि कैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे कोटा जिले के कई गांवों के लोगों की आय नरेगा मजदूर से भी कम है।बुधवार के अंक में दैनिक भास्कर ने बताया था कि कैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे कोटा जिले के कई गांवों के लोगों की आय नरेगा मजदूर से भी कम है।
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