--Advertisement--

चार माह में लगाए तीन कार्डियक सर्जन; 2 ने ज्वाइनिंग से पहले ही करा लिया ट्रांसफर

बाइपास या वाल्व रिप्लेसमेंट जैसे बड़े ऑपरेशन के लिए कोटा में अब तक शुरू नहीं हो पा रहा विभाग

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 06:42 AM IST

कोटा. कोटा मेडिकल कॉलेज में बाइपास सर्जरी या वाल्व रिप्लेसमेंट जैसे ऑपरेशन करने के लिए पिछले 4 माह में सरकार ने 3 कार्डियक थोरेसिक सर्जन लगाए, लेकिन 3 में से 2 ने तो ज्वाइन करने से पहले ही तबादला जयपुर करा लिया। तीसरे सर्जन ने ज्वाइन किया तो 10 दिन बाद ही उनके भी ट्रांसफर ऑर्डर आ गए। फिलहाल उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। सिल्वर जुबली मना चुके कोटा मेडिकल कॉलेज में यह विभाग लंबे समय से बंद ही रहा है।

इस साल चिकित्सा मंत्री के आश्वासन के बाद विभाग शुरू होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन फिर से इस महत्वपूर्ण विभाग पर “तालाबंदी’ की नौबत है। अब कोटा में 150 करोड़ की लागत से केंद्र सरकार की पीएमएसएसवाई योजना के तहत सुपर स्पेशियलिटी विंग बन रहा है और अगले 4 माह में इसे शुरू करने की तैयारी है, ऐसे में कार्डियक सर्जन नहीं होना पूरे सिस्टम के लिए चिंताजनक है। कार्डियक सर्जन नहीं होने से इनकी सेवाओं के लिए पूरा कोटा संभाग प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर है, जहां लाखों रुपए इलाज पर खर्च होते हैं।

इन्हें लगाया, फिर हटाया

इसी साल अगस्त में डॉ. रामस्वरूप सेन, फिर डॉ. हेमलता वर्मा को कोटा लगाया गया था। दोनों ने कोटा में ज्वाइन करने से पहले ही जयपुर ट्रांसफर करा लिया। इसके बाद डॉ. मोहित शर्मा को लगाया गया, जिन्होंने 24 अक्टूबर को ज्वाइन किया और 6 नवंबर को जयपुर ट्रांसफर का आदेश जारी हो गया। फिलहाल डॉ. मोहित को रिलीव नहीं किया गया है। पूर्व में लगाई गई डॉ. हेमलता तो पूरे राज्य में सरकारी क्षेत्र में इकलौती पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन हैं, लेकिन उन्होंने कोटा में ज्वाइन ही नहीं किया।


कार्डियक सर्जन के क्या फायदे
कोटा में इसी साल मई से कैथ लैब शुरू हुई है। अब कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भंवर रणवां व डॉ. हंसराज मीणा सेवाएं दे रहे हैं। हर माह 20 से 25 एंजियोग्राफी भी की जा रही हैं। यदि कार्डियक सर्जन हों तो कार्डियोलॉजिस्ट को मरीज में कॉम्पलिकेशन होने पर बैकअप मिलेगा। इसके अलावा बाइपास सर्जरी, हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट, बच्चों के जन्मजात दिल में छेद जैसे ऑपरेशन हो सकेंगे।

कारण : क्यों नहीं टिक रहे सर्जन?
कार्डियक थोरेसिक सर्जन महत्वपूर्ण डिग्री है। इसे यूं समझिए कि पूरे राज्य में 20 डॉक्टरों के पास यह डिग्री है। कोटा ज्वाइन नहीं करने वाले कार्डियक सर्जन्स से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि स्पेसिफिक ऑपरेशन थिएटर, कार्डियक एनेस्थेटिक, 24 घंटे कार्डियक का ट्रेंड स्टाफ वाला आईसीयू और परफ्यूजनिस्ट हो, जो ओपन हार्ट सर्जरी में मशीन को ऑपरेट करता है। कोटा में इनमें से एक भी बेसिक सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में तीन ही क्या, आगे भी कोई सर्जन यहां नहीं रहना चाहेगा। यदि दबाव बनाकर ज्यादा दिन किसी कार्डियक सर्जन को यहां रोका भी गया तो वह सरकार सेवा छोड़ना उचित समझेगा, लेकिन समय खराब नहीं करेगा। इसकी वजह यह भी है कि ज्यादा समय तक कोई भी सर्जन बिना सर्जरी के रहने पर उसका अनुभव प्रभावित होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी जगह कार्डियक सर्जरी विभाग तब शुरू हो पाता है, जब वहां कार्डियोलॉजी विभाग सालों से पूरी क्षमता से चल रहा हो। कोटा में तो अभी कार्डियोलॉजी विभाग ही नया है।

सॉल्यूशन : डॉ. वासवानी की सेवाएं ली जाए

कोटा मेडिकल कॉलेज में कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. राजेश वासवानी हैं, लेकिन वे अभी जनरल सर्जरी में पोस्टेड हैं। सुपर स्पेशियलिटी विंग शुरू होने से पहले ही उनकी सेवाओं को जनरल सर्जरी की बजाय इस विभाग में लिया जाए और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर उन्हीं के हिसाब से तैयार कराया जाए तो शायद इस विभाग की सेवाएं कोटावासियों को मिल सकती है। जब इसे लेकर भास्कर ने जब डॉ. वासवानी से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरे दिमाग में यह बात पहले से है कि सुपर स्पेशियलिटी विंग शुरू होने पर कार्डियक थोरेसिक का काम करेंगे। इसे लेकर मेरी उच्च स्तर पर बात भी हुई है।

अब फ्री हो पाएगी बीपीएल-भामाशाह मरीजों की एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी
नए अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग को एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी के लिए जरूरी कंज्यूमेबल्स की सप्लाई मिल गई है। अब अस्पताल में बीपीएल व भामाशाह मरीजों को यह दोनों सुविधाएं फ्री मिलेंगी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि जयपुर के एसएमएस अस्पताल में सप्लाई कर रही फर्मों ने जरूरी सामान की सप्लाई की है। इसमें स्टेंट, बैलून, एंजियोप्लास्टी वायर, गाइड वायर आदि मिल गए हैं। अब टाइगर कैथेटर, लीवर लॉक सीरिंज, प्रेशर लाइन व मेनिफॉल्ड की जरूरत है, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर उपभोक्ता भंडार को ऑर्डर दिया जा रहा है, इनकी भी सप्लाई अगले दो-चार दिन में हो जाएगी। अब तक बीपीएल व भामाशाह के मरीजों को भी एंजियोग्राफी पर 3 से 4 हजार तथा एंजियोप्लास्टी वाले मरीजों को 54 से 55 हजार रुपए का सामान बाजार से लाना पड़ रहा था, क्योंकि अस्पताल प्रशासन के पास यह सामान उपलब्ध नहीं था।