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लाइलाज हड़ताल: 4 घंटे तक नहीं बनी पर्ची, स्ट्रेचर पर तड़पते रहे मरीज

Bhaskar News | Last Modified - Feb 07, 2018, 08:18 AM IST

हड़ताली कर्मचारियों से सवाल-हमें परेशान किए बिना मांगें नहीं मनवाई जा सकती क्या?
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    कोटा. एमबीएस, जेकेलोन व न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 1100 से ज्यादा ठेका कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार शाम को खत्म हो गई, लेकिन इससे पहले दिनभर दिनभर अस्पतालों में हंगामा चलता रहा। आउटडोर के बाहर तीनों अस्पतालों में कर्मचारी धरना देकर बैठे रहे और नारेबाजी करते रहे। सुबह तीनों अधीक्षकों व प्रिंसिपल की मौजूदगी में कलेक्टर रोहित गुप्ता से हुई वार्ता और शाम को प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा द्वारा सरकार को पत्र लिखे जाने के बाद हड़ताल समाप्त हो गई। शाम करीब 6 बजे ज्यादातर कर्मचारी काम पर लौट आए।


    इससे पहले सुबह से शाम तक अस्पतालों में हालात विकट रहे। स्ट्रेचर चलाने वाले ट्रॉलीमैन नहीं होने से दिव्यांग व दुर्घटनाग्रस्त मरीज रेंगते हुए आउटडोर तक पहुंचे। एमबीएस अस्पताल के सर्जिकल बी वार्ड में किसी ने कचरा फैला दिया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीके तिवारी ने आशंका जताई कि यह हरकत हड़ताली कर्मचारियों ने की। वहीं नए अस्पताल में सुबह के समय दूसरे कर्मचारियों को काम करने से रोकने का प्रयास किया, जहां पुलिस ने समझाइश से मामला शांत कराया।

    एक माह में मांगें नहीं मानी, तो फिर करेंगे आंदोलन
    सुबह एमबीएस अस्पताल में धरना स्थल पर कर्मचारियों से बात करने के लिए प्रिंसिपल व तीनों अधीक्षक पहुंचे और कर्मचारी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को साथ लेकर कलेक्टर से वार्ता कराई। तय हुआ कि मांगपत्र ले लिया जाए, जिसे सिफारिश के साथ सरकार को भेज दिया जाए। इसके बाद कर्मचारी नेताओं ने मांग रखी कि हमें लिखित में पत्र चाहिए। शाम को प्रिंसिपल ने पत्र के साथ अपना सिफारिशी पत्र सरकार को भेजा और उसकी प्रति कर्मचारियों को दी, तब शाम को हड़ताल टूट सकी। ठेका कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष भरत व्यास ने बताया कि हमें एक माह का आश्वासन दिया गया है। यदि एक माह में हमारा मानदेय नहीं बढ़ाया गया, तो हम फिर से आंदोलन करेंगे।

    पिछले साल बड़े अस्पतालों में हुई थीं पांच हड़ताल

    अस्पतालों में अलग-अलग संवर्ग के कर्मचारियों की हड़ताल आम हो चुकी है। बीते साल जनवरी में भी ठेका कर्मचारियों ने समय पर मानदेय नहीं मिलने से काम का बहिष्कार कर दिया था। वहीं जून में जब ठेकेदार बदला गया, तब भी हड़ताल की थी। दिसंबर में रेजीडेंट सहित अन्य डॉक्टरों की करीब 10 दिन हड़ताल रही। सितंबर में 3-4 दिन तक लैब टेक्नीशियन हड़ताल पर रहे। वहीं अगस्त में 3 दिन तक अस्पताल के मंत्रालयिक कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। इमरजेंसी सेवाएं होने के बावजूद बार-बार होने वाली इस हड़ताल से मरीजों को खासी परेशानी हो रही है।

    जयपुर में चिकित्सा मंत्री से मिले विधायक शर्मा

    ठेका कर्मचारियों की मांगों को लेकर कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ से मुलाकात की। विधायक ने कहा कि अन्य जिलों में संविदाकर्मियों के वेतन का भुगतान सीधे आरएमआरएस द्वारा किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज कोटा से जुड़े अस्पतालों में संविदाकर्मियों को वेतन का भुगतान ठेका पद्धति से हो रहा है। इनका मानदेय भी काफी कम है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। सालों से कार्यरत कर्मचारियों को भी 3 से 4 हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है। मंत्री ने शीघ्र ही उचित कार्रवाई कर कर्मचारियों को राहत देने का आश्वासन दिया।

    हम पहले दिन से कह रहे थे कि ये मांगें हमारे स्तर की नहीं है। सुबह कलेक्टर से हुई वार्ता में भी यही बात आई। मैंने इनके मांगपत्र के साथ अनुशंसा पत्र चिकित्सा शिक्षा सचिव को भेज दिया। इसके बाद सभी काम पर लौट आए।
    - डॉ. गिरीश वर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज

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Web Title: Medical Staff Strike In Kota Main Hospital
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