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जंगल में छोड़ गए महज चार घंटे पहले जन्मी मासूम को, 2 स्टूडेंट ने दी जिंदगी

बच्ची को अस्थाई आश्रय दिलवाया गया है, लेकिन फिलहाल उसे डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 12, 2018, 07:11 AM IST

जंगल में छोड़ गए महज चार घंटे पहले जन्मी मासूम को, 2 स्टूडेंट ने दी जिंदगी

अशोक कुमार ( बच्ची को बचाने वाला छात्र).मैं अपने भाई विजय के साथ झरझनी गांव से कोटा आ रहा था। नयागांव के पहले मोदी कॉलेज के पास हम टॉयलेट करने के लिए रुके। लौट रहे थे कि अचानक रोने की आवाज आई... मैं बुरी तरह डर गया। जंगल जैसा माहौल रहता है, मुझे लगा कि कोई जानवर होगा। थोड़ी देर तक जब रोने की आवाज नहीं रुकी तो हमें इंसान की आवाज होने की पुष्टि हो गई। हम हिम्मत करके झाड़ियों में घुसे तो देखा एक फूल सी मासूम बेटी रो रही थी। मुझसे रहा नहीं गया... मैंने झाड़ी में घुसकर उसे निकाला और बाहर ले आया। हम दोनों उसे अपने साथ अपने कमरे में ले आए.. मन में बार-बार एक ही सवाल उठ रहा था कि अब इसे कहां और किसके सुपुर्द करें? हमने करणी नगर विकास समिति का नाम सुन रखा था तो हम सीधे बेटी को लेकर वहां गए और उन्हें पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने काफी तहकीकात करने के बाद हमसे उस बच्ची को ले लिया... मैं और मेरा भाई अपनी पब्लिसिटी नहीं चाहते। हमने इसे पुण्य का काम समझकर किया है, जो हमारा फर्ज भी था। बस, ऐसे इस बेटी के माता-पिता से निवेदन है कि उनकी बेटी बहुत सुंदर और अनमोल है, उसे वापस अपना लो।


हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती है मासूम, पुलिस ने दर्ज किया मामला
मासूम को गंभीर हालत में निजी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि पैदा होने के 3-4 घंटे बाद ही बच्ची को फेंक दिया गया। ठंड की वजह से उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी है। इधर, सीडब्ल्यूसी हरीश गुरुबक्शानी ने बताया कि मामले में आरकेपुरम पुलिस को शिकायत दी है, मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। बच्ची को अस्थाई आश्रय दिलवाया गया है, लेकिन फिलहाल उसे डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है।


61 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है 10 साल में पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन पर।
डॉ. नीता जिंदल ने बताया कि बच्ची जब हमारे पास लाई गई तो उसे पैदा हुए बमुश्किल 3 से 4 घंटे हुए थे। बेबी प्री-मेच्योर है। उसके शरीर में ऑक्सीजन लेवल घट जाने से उसका पूरा शरीर नीला पड़ा गया था। बच्ची सांस नहीं ले पा रही हैै। हमने उसे न्यूरो आईसीयू में शिफ्ट किया है, जहां ऑक्सीजन लेवल मेनटेन करने की कोशिश कर रहे हैं। बच्ची की स्थिति अभी क्रिटिकल है। हम उसे बचाने के सभी प्रयास कर रहे हैं।


#3 केस से समझिए हाड़ौती में फैले लिंग परीक्षण के नेटवर्क को

केस 1 :अक्टूबर 2017 में मध्यप्रदेश के गुना में कार्रवाई कर डॉ. रेशमा पठान को लिंग परीक्षण करते पकड़ा था। दलाल हर केस पर मिलने वाले मोटे कमीशन के चक्कर में झालावाड़, कोटा, बारां से केस पहुंचाती थी।

केस 2 : बूंदी की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. लाज व्यास 8 अगस्त 2017 को महज 18 हजार रुपए लेकर उसने लिंग परीक्षण करते पकड़ा। दलाल सुनील भी गिरफ्तार हुआ था।

केस 3 :फरवरी 2017 में बूंदी से ही डॉ. अब्दुल रहीम अंसारी व कोटा की महिला दलाल रुकमणि को लिंग परीक्षण करते गिरफ्तार किया गया था।


एक्सपर्ट : नवजात को फेंकने पर 2 साल की जेल
माता-पिता या अभिभावक द्वारा 12 वर्ष के कम आयु के शिशु को फेंक दिया जाए या उसका जीवन संकट में डाल दिया जाए तो उसे 7 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। अगर नवजात को जीवित या मृत अवस्था में फेंक दिया जाए तो भी 2 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। - श्रीराम बड़ेसरा, इंचार्ज, पीसीपीएनडीटी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन सेल

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Web Title: jngal mein chhode gae mhj Char Ghante pehle jnmi maasum ko, 2 student ne di jindgai
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