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खाली हो रहे अस्पताल, सर्जरी विभाग के 150 पलंग पर बचे सिर्फ 30 पेशेंट

हड़ताल के दौरान भी यहां के रेजीडेंट अपने व दूसरे विभागों के मरीज देख रहे हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 06:51 AM IST
New patients not being admitted due to resident strike

कोटा. सेवारत चिकित्सकों व रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से एमबीएस, जेकेलोन व नए अस्पताल की व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। प्लान्ड ऑपरेशन 3 दिन से बंद हैं। आउटडोर-इनडोर सेवाएं भी बेपटरी हो गई हैं। अस्पताल में नए मरीज आ ही नहीं रहे और जो पहले से भर्ती हैं, वे भी प्राइवेट हॉस्पिटलों में शिफ्ट होते जा रहे हैं।


गुरुवार को एमबीएस के सर्जरी विभाग की 3 यूनिटों के 150 पलंगों पर मात्र 30 मरीज बचे थे। जबकि इन यूनिटों में एक भी पलंग खाली नहीं रहता था। कई बार तो पलंग के लिए विधायकों की सिफारिश तक लगानी पड़ती है। तीनों अस्पतालों में गुरुवार को 15 इमरजेंसी सर्जरी हो सकी। आम दिनों में तीनों जगह करीब 60 सर्जरी होती है। ऐसी ही स्थिति सोनोग्राफी जांच की है। तीनों जगह 250-300 सोनोग्राफी होती थी, लेकिन हड़ताल से सिर्फ इमरजेंसी सोनोग्राफी की जा रही है, जो औसत 10 प्रति अस्पताल हो रही है। उधर, गुरुवार को सीएमएचओ के अधीन कार्यरत सेवारत चिकित्सकों में से 113 हड़ताल पर रहे और 48 ड्यूटी पर आए। जबकि रेजीडेंट सारे हड़ताल पर हैं।

न्यूरोलॉजी विभाग के रेजीडेंट कभी नहीं जाते हड़ताल पर
मेडिकल कॉलेज में एक विभाग ऐसा है, जहां के रेजीडेंट कभी हड़ताल पर नहीं जाते। बात एमबीएस अस्पताल में संचालित न्यूरोलॉजी विभाग की है, जहां का एक भी रेजीडेंट हड़ताल में शामिल नहीं है। इस विभाग में कुल 8 रेजीडेंट हैं, इनमें से 1 लंबी छुट्टी पर है और शेष सातों रेजीडेंट काम कर रहे हैं।

विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि डीएम कर रहे रेजीडेंट्स को वैसे भी पढ़ाई से फुर्सत नहीं मिलती, इसलिए वे सामान्य तौर पर हड़ताल पर नहीं जाते। कई रेजीडेंट तो ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक गुमानपुरा तक नहीं देखा। वे अपने हॉस्टल या रूम से हॉस्पिटल आते हैं और ड्यूटी करके लौट जाते हैं। केरल के एक रेजीडेंट ने तो सालभर तक कोई छुट्टी ही नहीं ली। हड़ताल के दौरान भी यहां के रेजीडेंट अपने व दूसरे विभागों के मरीज देख रहे हैं।

गिरफ्तारी के विरोध में दिया ज्ञापन
डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा है कि सेवारत डॉक्टरों की गिरफ्तारी लोकतंत्र के खिलाफ है। इससे सरकार का तो कुछ नहीं बिगड़ रहा, बल्कि आम मरीज परेशान है। ज्ञापन देने वालों में दिग्विजय सिंह, प्रतीक, दिनेश खटीक, जगदीश मोहिल, अभिषेक सुमन आदि शामिल थे।


आज आईएमए की 2 घंटे पेन डाउन स्ट्राइक
गुरुवार को डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. जसवंत सिंह व सचिव डॉ. अमित यादव ने बताया कि शुक्रवार को सभी डॉक्टर सुबह 9 से 11 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक रखेंगे। वहीं, राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. एचजी मीणा व महासचिव डॉ. नवीन सक्सेना ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सेवारत चिकित्सकों से बातचीत के जरिए मामले का हल निकाले अन्यथा मजबूरन हमें भी आंदोलन में शामिल होना पड़ेगा।

रामपुरा अस्पताल में सेना के डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा

जिला प्रशासन के आग्रह पर गुरुवार को सेना ने डॉक्टर उपलब्ध करा दिए। मिलिट्री हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने रामपुरा अस्पताल में मरीज देखे। रक्षा प्रवक्ता ले. कर्नल मनीष ओझा ने बताया कि जिला प्रशासन के आग्रह पर कोटा के रामपुरा अस्पताल में 2 एंबुलेंस के साथ 2 डॉक्टर व 4 नर्सिंग स्टाफ लगाए हैं, इन्होंने गुरुवार को आउटडोर में 114 मरीजों को परामर्श दिया।

कुछ डॉक्टर आ रहे हैं, साइन करके जा रहे हैं

असिस्टेंट प्रोफेसर्स ने गुरुवार को प्रिंसिपल से मुलाकात की और कहा कि सुपर स्पेशियलिटी विभागों के असिस्टेंट प्रोफेसर व रेजीडेंट्स को इमरजेंसी में लगाया जाए। यह भी कहा कि कई सेवारत चिकित्सक साइन करके गायब हो रहे हैं। प्रिंसिपल ने निर्देश दियाया कि उपस्थित चिकित्सकों से इमरजेंसी सेवाएं ली जाएं और ड्यूटी पर मौजूद रहने के लिए पाबंद किया जाए।

सैनी बोले-मंत्री कर रहे गुमराह

चिकित्सा मंत्री एक बार मीडिया के सामने आकर कह दें कि हम चिकित्सकों की एक भी मांग नहीं मानेंगे, उसके अगले दिन से हम ड्यूटी पर आ जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं, लेकिन आप खुद बताइए हमारे घर, परिवार, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहां पुलिस दबिश दे रही है। आखिर कैसे ड्यूटी पर आएं। - डॉ. दुर्गाशंकर सैनी, प्रदेश महासचिव, राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ

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