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फेसबुक पर लिखा- मैं सुसाइड करता हूं तो नर्सिंग अधीक्षक होंगे जिम्मेदार

टीबी वार्ड में काम करने के दौरान टीबी हो गया था नर्सिंग कर्मी को, कर्मचारी का आरोप-ड्यूटी बदलने की मांग पर की गई अभद्रता

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 06:09 AM IST
Nursing employee wrote on Facebook post about suicide

कोटा. न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में पोस्टेड नर्सिंग कर्मचारी (नर्स ग्रेड-द्वितीय) अजय मेहरा की एक फेसबुक पोस्ट से पूरा चिकित्सा महकमा हरकत में आ गया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि “मैं आत्महत्या कर लेता हूं तो मेरी मौत के जिम्मेदार अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक हंसराज शर्मा होंगे। साथ ही यह भी लिखा कि हंसराज शर्मा मुझे लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं और जातिसूचक शब्दों से भी अपमानित किया जा रहा है।’

- अजय की इस टिप्पणी के बाद लोगों ने उन्हें फोन करना शुरू कर दिए और दिलासा दिलाई। कर्मचारी ने सोमवार को अपनी पूरी व्यथा लिखित में अस्पताल अधीक्षक डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय को दी है। अधीक्षक ने अस्थि रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी मीणा को जांच सौंपी है।

- मेहरा की पीड़ा है कि नए अस्पताल में टीबी वार्ड में काम करने के दौरान उन्हें टीबी हो गया। फेफड़ों में पानी भर गया और एक माह तक अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती रहना पड़ा।

- इसके बाद जब दोबारा ड्यूटी ज्वॉइन की तो वो नॉन इनफेक्शन वाली जगह पर काम करना चाह रहे थे, लेकिन नर्सिंग अधीक्षक ने जानबूझकर ऐसी जगह लगाया, जहां इनफेक्शन का खतरा था।

#कर्मचारी बोला-नर्सिंग अधीक्षक ने जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया

मैं अप्रैल, 2016 से जून, 2017 तक नए अस्पताल के टीबी वार्ड में था। वहीं मुझे टीबी का इनफेक्शन हो गया और इलाज के लिए मुझे कोटा के 2 निजी हॉस्पिटलों में भर्ती रहना पड़ा। स्वस्थ होने के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौटा तो पहले तो नर्सिंग अधीक्षक हंसराज शर्मा ने मुझे टीबी वार्ड में ही ड्यूटी करने को कहा, बाद में अनुरोध करने पर माइनर ऑपरेशन थिएटर में लगा दिया। मैंने उनसे आग्रह किया कि मैं बीमार हूं और मुझे ऐसी जगह लगा दीजिए, जहां इनफेक्शन का खतरा नहीं हो। लेकिन वे नहीं माने। ऐसे में मैंने एमबीएस अस्पताल में डेपुटेशन करा लिया। वहां आउटडोर में काम करता रहा। हाल ही में जब दोबारा नर्सिंग अधीक्षक से मिला तो उन्होंने कहा कि किसी से फोन करवा दो और रिकॉर्ड रूम में लगे कर्मचारियों को हटवा दो, मैं तुम्हें वहां का प्रभारी बनवा दूंगा। मैंने ऐसा करने से मना कर दिया और डेपुटेशन निरस्त करवाकर फिर से नए अस्पताल में ज्वॉइनिंग दे दी। इसके बाद मुझे यूरोलॉजी विभाग के अधीन संचालित ईएसडब्ल्यूएल (किडनी स्टोन को शॉक वेव से खत्म करने की मशीन) पर लगा दिया। यहां भी बार-बार ऑपरेशन थिएटर में जाना पड़ता है, इसलिए मैंने अनुरोध किया तो अस्पताल अधीक्षक ने मुझे जन्म-मृत्यु के काम में लगा दिया, लेकिन कुछ दिन वहां काम करने के बाद नर्सिंग अधीक्षक ने मुझे फिर ईएसडब्ल्यूएल में भेज दिया। इसी बात को लेकर मैंने शनिवार को महावीर नगर रोड पर उनसे बात करनी चाही तो वे नाराज हो गए और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। लिखित शिकायत अधीक्षक को दी है।

- जैसा कि नर्सिंगकर्मी अजय मेहरा ने भास्कर को बताया

अजय अभी प्रोबेशन में ही है और मेरे पड़ोस में ही रहता है। मैंने तो उसे ईएसडब्ल्यूएल में लगाया ही इसलिए था कि वह रिलैक्स रहे। वहां बहुत ज्यादा काम ही नहीं है। अब वह जो आरोप लगा रहा है तो उससे सबूत मांग लीजिए। यदि वह किसी भी आरोप को सबूत देता है तो मैं हर कार्रवाई झेलने को तैयार हूं।

- हंसराज शर्मा, नर्सिंग अधीक्षक, नया अस्पताल

कर्मचारी ने लिखित में शिकायत दी है, इस पर डॉ. आरपी मीणा को जांच सौंपी है। उनसे कहा है कि दो दिन में रिपोर्ट सौंप दें। प्रथम दृष्ट्या तो दोनों का निजी मामला लग रहा है। घटना भी अस्पताल के बाहर की है। फिर भी जांच से ही स्थिति स्पष्ट होगी।
- डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय, अधीक्षक, नया अस्पताल

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