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200 बीघा चट्टानी क्षेत्र में लगा दिए एक लाख पौधे

नला की माता मंदिर के पास 200 बीघा चट्टानी जमीन पर लगभग 1 लाख पौधे लगा दिए।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 09:06 AM IST

कोटा | डाबी में 10 साल पहले तक औसत बारिश होती थी। पूरे इलाके की जमीन इतनी पथरीली थी कि वाटर लेवल लगभग 500 फीट पर था। इसके चलते इलाके के पत्थर व्यवसायियों ने स्थिति बदलने की ठानी। नला की माता मंदिर के पास 200 बीघा चट्टानी जमीन पर लगभग 1 लाख पौधे लगा दिए। इसका असर ये हुआ कि 214 एमएम ज्यादा बारिश होने लगी।


देखरेख पर खर्च होते हैं 30 लाख
विश्वनाथ शर्मा बताते हैं कि हर साल पौधे रोपने और उनकी देखरेख पर साल में 30 लाख रुपए खर्च होते हैं। सुरेश बैरागी ने बताया कि पौधे लगाने का निर्णय लिया तो सबसे बड़ी समस्या ये थी कि इन चट्टानों पर घास का तिनका तक नहीं उगता। इसलिए 4 से 5 फीट मिट्टी और खदानों का मलबा बिछाया जिसके ऊपर पौधे रोपे। सिंचाई के लिए दो पानी के टैंकर व एक चौकीदार लगाया।
भास्कर एक्सपर्ट : प्लांटेशन से 30% बढ़ती है बारिश
जहां प्लांटेशन किया। वहां भवानीपुरा की पहाड़ी है। पहाड़ी क्षेत्र में प्लांटेशन से आर्द्रता ज्यादा होती हैं। इससे बादलों में संघनन क्रिया जल्दी और अधिक होती है। इससे बारिश 30 फीसदी ज्यादा होती है। प्लांटेशन जितना बढ़ेगा, बारिश का आंकड़ा बढ़ता जाएगा। -डॉ. एमजेड खान, भूगोल लेक्चरर

यूं बढ़ा बरसात का आंकड़ा
साल बारिश
2007 708
2008 534
2009 441
2010 447
2011 931
2012 591
2013 737
2014 700
2015 828
2016 1004
बारिश एमएम में
पहले ऐसे पत्थर थे। नला माता मंदिर के पास जिन पर घास तक नहीं उगती थी।