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7 माह में 5 अफसरों से गुजर गई फाइल, एक्सीडेंट करने वाली कार को नहीं ढूंढ पाई पुलिस

एक्सीडेंट में डॉक्टर की मौत के मामले में थाने व पुलिस अफसरों के चक्कर काट रही लेक्चरर पत्नी,

Bhaskar News | Last Modified - Jan 19, 2018, 06:22 AM IST

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    कोटा. जेकेलोन अस्पताल के शिशु रोग विभाग में कार्यरत डॉ. सूर्यकांत शर्मा की रोड एक्सीडेंट में मौत का मामला घटना के 7 माह बाद भी पुलिस की फाइलों में पहेली बना हुआ है। तालेड़ा बाइपास पर हुए एक्सीडेंट के करीब 37 दिन बाद डॉ. सूर्यकांत की दिल्ली के निजी हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। न्याय के लिए उनकी पत्नी बूंदी कॉलेज में केमिस्ट्री की लेक्चरर महिमा शर्मा पिछले 5 माह से पुलिस अफसरों के चक्कर लगा रही हैं। महिमा ने गुरुवार को कोटा में सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश महासचिव डॉ. दुर्गाशंकर सैनी व जिलाध्यक्ष डॉ. अमित गोयल के साथ आईजी को ज्ञापन भी दिया।

    महिमा ने भास्कर को बताया कि 1 मई, 2017 को कोटा से बूंदी जाते वक्त मेरे पति की कार का दूसरी कार से एक्सीडेंट हुआ। इसके बाद वे खुद क्षतिग्रस्त कार चलाकर घर पहुंच गए। बाद में जब उन्हें तकलीफ होने लगी तो कोटा लेकर गए और मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में दिखाया। वहां से बाद में जयपुर और फिर दिल्ली के बड़े निजी हॉस्पिटलों में एडमिट रखा। दिल्ली में ही 7 जून, 2017 को उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि पेट की तिल्ली फटने से काफी ब्लीडिंग हो गई जो डॉ. सूर्यकांत की मौत की वजह बनी। 12 मई को मेरे देवर शिवकांत तालेड़ा थाने जाकर एफआईआर दर्ज करा आए। इसमें उस कार का नंबर भी लिखाया।

    इलाज पर 40 लाख से ज्यादा हुए थे खर्च
    महिमा ने बताया कि इलाज पर सबकुछ खर्च हो गया। पति एक माह से ज्यादा समय तक दिल्ली-जयपुर के हॉस्पिटलों में वेंटिलेटर पर एडमिट रहे। दिल्ली के जिस अस्पताल में मौत हुई, वहां तो रोजाना का खर्च ही एक लाख रुपए था। करीब 40 लाख रुपए इलाज में खर्च हो गए। मेरी दो मासूम बेटियां अनादि (4) व युक्ति (8) के सिर से पिता का साया उठ गया। वृद्ध ससुर 6 साल से लकवाग्रस्त हैं और सास को कैंसर है। हमने जिस कार के नंबर दिए, उन्हें लेकर पुलिस उल्टा हम लोगों पर ही सवाल उठा रही है। यह कार झालावाड़ जिले के किसी व्यक्ति की है।

    अब 5वें अफसर के पास है फाइल

    इस मामले की सबसे पहले जांच तालेड़ा थाने के हैड कांस्टेबल प्रकाशचंद ने की। इसके बाद फाइल थानाधिकारी पवन मीणा के पास चली गई। उनके ट्रांसफर के बाद तालेड़ा थाने में 2 थानाधिकारी जितेंद्र सिंह और वर्तमान थानाधिकारी पुरुषोत्तम महरिया के पास भी यह फाइल रही। हाल ही में जांच बदलकर हिंडोली वृत्ताधिकारी नानगराम मीणा को सौंपी गई है।

    मैंने जुर्म प्रमाणित माना था, बाद में जांच बदल गई
    मैंने गवाहों के बयानों के आधार पर जुर्म प्रमाणित मानते हुए बकानी के रहने वाले कार मालिक को बुला लिया था। लेकिन, इसी बीच कार मालिक ने उच्चाधिकारियों को परिवाद पेश किया। इसके बाद जांच थानाधिकारी को सौंप दी गई थी। बाद में क्या हुआ, मुझे नहीं पता।
    - प्रकाशचंद, हैड कांस्टेबल (शुरुआती जांच अधिकारी)

    फाइल आई है, लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में व्यस्त हूं
    हां, मुझे ध्यान है कि इस तरह की फाइल मेरे पास आई है।

    अभी टाइगर हिल में लॉ एंड ऑर्डर में ड्यूटी लगी हुई है, इसलिए मुझे तो ऑफिस बैठे ही काफी दिन हो गए। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वैसी कार्रवाई करेंगे।
    - नानगराम मीणा, वृत्ताधिकारी, हिंडोली (वर्तमान जांच अधिकारी)

    मुझसे ही सबूत मांग रही पुलिस : मृतक की पत्नी
    मैं जब भी थाने या अफसरों के पास जाती हूं तो कहते हैं कि जो कार नंबर आप बता रहे हैं उसके मालिक की लोकेशन घटना के वक्त तालेड़ा बाइपास नहीं आ रही। कार का नंबर उनके हाथ पर लिखा था। हमने उसी वक्त मोबाइल में फीड कर लिया था। एफआईआर कराने में हम लोगों से देरी जरूर हुई, क्योंकि हम उनके इलाज में व्यस्त थे। आखिर जांच तो पुलिस ही करेगी। अब ये उल्टा मुझसे ही सबूत मांग रहे हैं। क्या एक्सीडेंट के बाद कोई घायल मौके पर सबूत इकट्ठा करता है? मेरा सबकुछ चला गया और अब मुझे बेवजह चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
    - महिमा शर्मा, डॉ. सूर्यकांत की पत्नी

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Web Title: Police Can Not Locate An Accident Car
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