--Advertisement--

ठाकुरजी को छुड़वाने के लिए 5 साल से चक्कर काट रहा पुजारी, नहीं लौटा रहा UIT

यूआईटी ने 2012 में अतिक्रमण मानकर मंदिर को तोड़ते समय जब्त की थी राधा-कृष्ण की मूर्ति।

Danik Bhaskar | Jan 01, 2018, 02:22 AM IST

कोटा. 77 साल के पुजारी 3 जनवरी 2012 से यूआईटी के लेकर लोकायुक्त तक चक्कर काट रहा है। मांग सिर्फ इतनी है कि अतिक्रमण मानकर तोड़े गए मंदिर से जो ठाकुरजी की मूर्ति जब्त की थी वह लौटा दी जाए। पहले तो यूआईटी ने मूर्ति परिसर में रख रखी थी, लेकिन बाद में वह मूर्ति वहां से चोरी हो गई।

- औद्योगिक क्षेत्र के प्रेमनगर इलाके में पंडित मदनमोहन शर्मा बृजवासी ने एक मंदिर बना रखा था। यूआईटी के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने 2 जनवरी 2012 को उस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था। उस दौरान उस मंदिर को भी अतिक्रमण मानते हुए तोड़ दिया गया था।

- पुजारी बृजवासी का कहना है कि यूआईटी का दस्ता वहां से राधा कृष्ण की अष्टधातु की मुख्य मूर्ति सहित 15 छोटी-बड़ी मूर्तियां व सामान उठाकर ले गया था। उसके बाद से वह मुख्य मूर्ति को वापस लेने के लिए यूआईटी के चक्कर काट रहे हैं। पहले तो ये मूर्ति यूआईटी परिसर में ही एक पेड़ के नीचे रखी हुई थी। तब तक किसी भी अधिकारी ने उसकी मांग पर कोई तवज्जो नहीं दी।

- इस संबंध में वो यूआईटी के तब से लेकर अब तक के अध्यक्षों व सचिवों तथा लोकायुक्त से लेकर मंत्री तक से गुहार कर चुका है, लेकिन मूर्ति नहीं मिली। अब कहते हैं कि मूर्ति यहां है ही नहीं। दस्ते ने कोई सामान जब्त नहीं किया था।

यूआईटी परिसर में रखीं मूर्तियां

- यूआईटी द्वारा शहर में कई स्थानों पर अतिक्रमण करके बनाए गए मंदिरों को ध्वस्त किया गया। दोबारा मंदिर नहीं बना लें इसके लिए यूआईटी द्वारा वहां से भगवान की प्रतिमा भी जब्त कर ली जाती हैं। इन मूर्तियों की बेकद्री न हो इसके लिए यूआईटी परिसर में एक पेड़ के नीचे इन मूर्तियों को रखा गया है, जहां इनकी पूजा-अर्चना भी की जाती है।

ये सामान ले गए थे यूआईटी वाले

- पंडित बृजवासी के अनुसार, दस्ता उस समय अष्टधातु निर्मित राधाकृष्ण की मुख्य मूर्ति, भगवान श्रीकृष्ण की छोटी सोने की बांसुरी, राधाजी की सोने की बिंदी, लड्डू गोपाल की चांदी, पीतल व स्टील की तीन मूर्तियां तथा मंदिर में पूजा संबंधी भगवान के वस्त्र, अन्य कपड़े, बर्तन घंटे-घड़ियाल आदि 15 सामान थे।


^ये मामला मेरे से पहले का है। मेरे सामने अभी तक कोई मूर्ति मांगने नहीं आया। वो एक बार आकर मुझे मामला समझा दे। उनकी मूर्तियां वापस दिलाने में हमसे जो भी मदद होगी की जाएगी।
- आनंदीलाल वैष्णव, सचिव यूआईटी