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यहां बेटी देने पर ही आती है घरों में बहू, चारों ओर पसरी है सिर्फ गरीबी

न गांवों में नरेगा मजदूर से भी कम है प्रति व्यक्ति आय

Dainik Bhaskar

Dec 20, 2017, 06:35 AM IST
कोटा जिला मुख्यालय से 74 किमी. दूर है यह कैलाश नगरी गांव। भास्कर टीम ने जब गांव की सीमा से बात की, तो उसने अपने घर का हाल बताते हुए कहा कि पूरे गांव में सिर्फ गरीबी ही पसरी पड़ी है। कोटा जिला मुख्यालय से 74 किमी. दूर है यह कैलाश नगरी गांव। भास्कर टीम ने जब गांव की सीमा से बात की, तो उसने अपने घर का हाल बताते हुए कहा कि पूरे गांव में सिर्फ गरीबी ही पसरी पड़ी है।

कोटा. राजस्थान सरकार 4 साल का जश्न मना रही है। इस मौके पर दैनिक भास्कर ने कोटा के 4 सबसे गरीब गांवों तक अपनी टीम भेजी और वहां के हालात को चेक कराया। इन गांवों में सड़क, पानी और चिकित्सा सुविधा की बात करना बेमानी है। हमारी टीम यह जानकर चौंक गई कि इन गांवों की प्रति व्यक्ति आय (करीब 4 हजार रु.) नरेगा मजदूर (5760 रु.) से भी कम है। वहीं, कोटा की प्रति व्यक्ति आय 29217 व राजस्थान की 23669 रु. है।

कैलाशनगरी: 3 किमी दूर मिलता है पानी

- कोटा शहर से 74 किलोमीटर दूर कैलाश नगरी गांव पहुंचने में पूरा दिन लग जाता है। यहां के लोग पशुपालन करके आजीविका चलाते हैं। यहां से एक बूंद दूध बाहर नहीं जाता, क्योंकि रोज शहर तक पहुंचना नामुमकिन है, इसलिए गांव वाले मावा बेचते हैं।

- पेयजल के लिए 3 किमी दूर डांडिया गांव जाना पड़ता है। कोई बीमार हो जाए तो एएनएम भी इसी शर्त पर आती है कि उसे वापस हैडक्वार्टर तक छोड़ा जाए। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के लिए 10 किमी दूर दाता जाना पड़ता है या 15 किमी दूर धूलेट।

- गांव में केवल 5वीं तक का स्कूल है। यहां आज तक पंचायत का सचिव तक नहीं पहुंचा है। जनप्रतिनिधि भी वोट मांगने ही आते हैं।

- गांव के जन्नालाल ने बताया कि 30 साल पहले तत्कालीन सांसद दाऊदयाल जोशी आए थे। इसके 23 साल बाद तत्कालीन मंत्री भरतसिंह गांव पहुंचे। हीरालाल नागर भी चुनाव में सिर्फ वोट मांगने एक बार आए थे।

बेटी देने पर ही आती है बहू

- यहां के परिवारों में बहू तभी आती है, जब वह बेटी देते हैं। भंवरलाल ने 3 बेटियां देकर 3 बेटों की शादी कर दी। 2 बेटे अभी भी कुंवारे हैं।

- नंदाराम ने 2 बेटों की शादी 2 बेटियां देकर की। तीसरे की शादी बहन की बेटी देकर की। अब घर में बेटियां नहीं होने से श्योजीराम व मुकेश की शादी नहीं हो पा रही है।

- 4000 रुपए है प्रति व्यक्ति आय

- 200 है गांव की कुल आबादी

- 10 किमी दूर दाता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

खणी : आजादी के बाद पहली बार बन रहे हैं पक्के मकान। खणी : आजादी के बाद पहली बार बन रहे हैं पक्के मकान।

- शहर से 111 किमी दूर स्थित खणी गांव में जरूरत का सामान तक नहीं मिलता। भील मजदूरों के गांव के लोगों को राशन लेने के लिए भी 5 किमी दूर अलोद तक जाना पड़ता है। रात में कोई बीमार हो जाए तो 10 किमी दूर चेचट सीएचसी तक पहुंचना मुश्किल है।

- किसी गर्भवती या बुजुर्ग को ले जाना हो तो वाहन भी दूसरे गांव के लोगों से मंगाना पड़ता है। गांव में एक भी पक्का मकान नहीं है। अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुछ मकान बन रहे हैं। एएनएम माह में केवल एक बार आती है।

- अलोद स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रहे शंभू भील ने बताया कि गांव के बच्चों को 8वीं पढ़ने रिछी या अलोद जाना पड़ता है। इस गांव में कोई भी 12वीं तक पढ़ा लिखा नहीं है। 200 घरों वाले इस गांव में किसी को भी सरपंच तक का नाम नहीं पता।

- आज तक जनप्रतिनिधि गांव के सामने से गुजरकर कांटा के हनुमान मंदिर तक जाते हैं, लेकिन कभी यहां के ग्रामीणों की परेशानी नहीं सुनते। कलेक्टर भी साढ़े 4 साल पहले आए थे।

 

बिजली बिल तक नहीं भर पाते : गांव के लोगों की हालत ये है कि वे गरीबी के कारण बिजली का बिल तक नहीं भर पाते।

 

- 01 हजार है गांव की कुल आबादी

- 3500 रुपए है प्रति व्यक्ति आय

- 10 किमी दूर है चेचट सीएचसी

- कोटा मुख्यालय से 111 किमी दूरी

 

 

 

 

सांगाहेड़ी : कंधे पर उठाकर 18 किमी दूर ले जाते हैं मरीजों को। ऐसी संकरी पगडंडी से होकर पहुंचते हैं गांव तक। सांगाहेड़ी : कंधे पर उठाकर 18 किमी दूर ले जाते हैं मरीजों को। ऐसी संकरी पगडंडी से होकर पहुंचते हैं गांव तक।

- जिला मुख्यालय से 88 किमी दूर स्थित सांगाहेड़ी गांव में कोई बारिश ऐसी नहीं गुजरती जब किसी की मौत नहीं होती, क्योंकि 4 माह तक पूरा गांव टापू बन जाता है। मानसून से पहले गर्भवती महिलाओं को पीहर शिफ्ट कर दिया जाता है। कोई बीमार पड़ता है तो उसे कंधों पर लादकर 15 से 20 लोग बीहड़ पार ले जाते हैं। सबसे नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 18 किलोमीटर दूर कोटड़ा दीपसिंह में है। गांव में 5वीं तक का स्कूल है। गांव के स्कूल में भी शिक्षक नहीं आ पाते हैं। गांव वालों ने 2015 में विधायक विद्याशंकर नंदवाना को बड़ी मान मनुहार  से गांव में बुलाया था। साफा बांधा, ताकि उनकी वे किस्मत बदल दे। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। गांव के लोगों का रोजगार पशुपालन व कृषि है। यहां सिर्फ रबी सीजन की फसल ही होती है। बारिश में नदियों के उफान से खेती नहीं होती है। गांव में दो हैंडपंप हैं, लेकिन पानी में फ्लोराइड है। एएनएम   किसी की मदद से एक-दो माह में कोटड़ा दीपसिंह से आती है।

 

इंजेक्श्न लगवाने 18 किमी. दूर जाना पड़ा बुजुर्ग पाना बाई को। इंजेक्श्न लगवाने 18 किमी. दूर जाना पड़ा बुजुर्ग पाना बाई को।

- 300 के करीब है गांव की कुल आबादी

- 5000 रुपए है प्रति व्यक्ति आय

- 18 किमी दूर है कोटड़ा दीपसिंह पीएचसी

- कोटा मुख्यालय से 88 किमी दूरी

 

कैलाशनगरी : 3 किमी  दूर मिलता है पानी। कैलाशनगरी : 3 किमी दूर मिलता है पानी।
लालगंज : सड़क के नाम पर गड्‌ढे, साथ लेकर जाएं फावड़ा लालगंज : सड़क के नाम पर गड्‌ढे, साथ लेकर जाएं फावड़ा

- लालगंज गांव कोटा जिला मुख्यालय से 98 किलोमीटर दूर पार्वती नदी के किनारे बसा है। जिले के अंतिम छोर पर बसे गांव की मुख्यालय से 95 किमी की दूरी खत्म हो जाने के बाद का 3 किमी का रास्ता पार करने के लिए किस्मत साथ होनी चाहिए। वाहन लेकर गांव में जाओ तो पास में फावड़ा जरूर चाहिए। भास्कर टीम भी ऐसे ही पहुंची। बारिश यहां की प्रसूताओं के लिए दुस्वप्न की तरह है।

- ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सिर्फ विधायक प्रत्याशी आते हैं, विधायक आज तक नहीं आए। एएनएम यहां महीने में एक बार आती है। गांव में चिकित्सा, आंगनबाड़ी और राशन की दुकान तक नहीं है। स्कूल 8वीं तक है। हैंडपंप खराब पड़ा है।

- भास्कर टीम ने जब गांव के किशनलाल से पूछा कि कलेक्टर कभी गांव आए हैं, तो उन्होंने गुस्से में कहा कि हमारे गांव तक का रास्ता ऐसा खराब है कि उन जैसे बड़े अधिकारी मरेंगे क्या यहां आकर। सरपंच ही पिपल्दा रहता है वह 6 माह पहले गांव आया था।

 

दिन में 17 बार कटती है बिजली

- दो साल पहले पीने के पानी का बंदोबस्त हुआ। दिन में 17 बार कटती है। कभी-कभी 10 से 15 दिनों तक बिजली नहीं मिलती।

 

- 250 के करीब है गांव की कुल आबादी

- 4500 रुपए है प्रति व्यक्ति आय

- 09 किमी दूर है पीपल्दा की पीएचसी

- कोटा मुख्यालय से 98 किमी दूरी

 

 

 

जिन गांवों में कलेक्टर, विधायक व पटवारी तक नहीं पहुंचे, वहां पहली बार गई भास्कर टीम। जिन गांवों में कलेक्टर, विधायक व पटवारी तक नहीं पहुंचे, वहां पहली बार गई भास्कर टीम।
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कोटा जिला मुख्यालय से 74 किमी. दूर है यह कैलाश नगरी गांव। भास्कर टीम ने जब गांव की सीमा से बात की, तो उसने अपने घर का हाल बताते हुए कहा कि पूरे गांव में सिर्फ गरीबी ही पसरी पड़ी है।कोटा जिला मुख्यालय से 74 किमी. दूर है यह कैलाश नगरी गांव। भास्कर टीम ने जब गांव की सीमा से बात की, तो उसने अपने घर का हाल बताते हुए कहा कि पूरे गांव में सिर्फ गरीबी ही पसरी पड़ी है।
खणी : आजादी के बाद पहली बार बन रहे हैं पक्के मकान।खणी : आजादी के बाद पहली बार बन रहे हैं पक्के मकान।
सांगाहेड़ी : कंधे पर उठाकर 18 किमी दूर ले जाते हैं मरीजों को। ऐसी संकरी पगडंडी से होकर पहुंचते हैं गांव तक।सांगाहेड़ी : कंधे पर उठाकर 18 किमी दूर ले जाते हैं मरीजों को। ऐसी संकरी पगडंडी से होकर पहुंचते हैं गांव तक।
इंजेक्श्न लगवाने 18 किमी. दूर जाना पड़ा बुजुर्ग पाना बाई को।इंजेक्श्न लगवाने 18 किमी. दूर जाना पड़ा बुजुर्ग पाना बाई को।
कैलाशनगरी : 3 किमी  दूर मिलता है पानी।कैलाशनगरी : 3 किमी दूर मिलता है पानी।
लालगंज : सड़क के नाम पर गड्‌ढे, साथ लेकर जाएं फावड़ालालगंज : सड़क के नाम पर गड्‌ढे, साथ लेकर जाएं फावड़ा
जिन गांवों में कलेक्टर, विधायक व पटवारी तक नहीं पहुंचे, वहां पहली बार गई भास्कर टीम।जिन गांवों में कलेक्टर, विधायक व पटवारी तक नहीं पहुंचे, वहां पहली बार गई भास्कर टीम।
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