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बोन कैंसर मरीजों को राहत, कोटा में खुलेगा राजस्थान का पहला बोन बैंक

विधानसभा में चिकित्सा विभाग की अनुदान मांगों के जवाब में चिकित्सा मंत्री ने की कई घोषणाएं, तीन विभागों के नए वर्क स्टेशन

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 01:05 AM IST
Rajasthan s first bone bank to open in Kota

कोटा. राजस्थान का पहला बोन बैंक कोटा में खुलेगा। राज्य के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने बुधवार रात विधानसभा में चिकित्सा विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब के दौरान इसकी घोषणा की। कोटा मेडिकल कॉलेज की ओर से 20 लाख रुपए की लागत के बोन बैंक का प्रस्ताव बजट घोषणा के लिए भिजवाया गया था। लेकिन बजट में इसकी घोषणा रह गई थी। वर्तमान में नॉर्थ इंडिया में दिल्ली के अलावा कहीं भी बोन बैंक नहीं है।


- बोन बैंक के अलावा तीन विभागों के लिए नए वर्क स्टेशन व अन्य उपकरणों की भी घोषणा की गई है। बोन बैंक के लिए लंबे समय से प्रयासरत कोटा मेडिकल कॉलेज में अस्थि रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश गोयल ने बताया कि इससे एक्सीडेंट या बोन कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

- असल में कई बार हमें ऑपरेशन के दौरान मरीज की हड्डी निकालनी पड़ती है, जिसे हम कोई यूज नहीं कर पाते। ऐसी हड्डियों को अब बोन बैंक में प्रिजर्व करके री-यूज कर पाएंगे।

- एक्सीडेंट के मामलों में कई लोगों की हड्डियां टूटकर साइट पर रह जाती है और कई मरीजों की हड्डियां कैंसर या इस तरह के ट्यूमर की वजह से खराब हो जाती है, जो निकालनी पड़ती है। अब ऐसे मरीजों को बोन बैंक से दूसरी हड्डियां लगाई जा सकेंगी।

- कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने बताया कि बोन बैंक को बजट घोषणा में शामिल नहीं करने के बाद व्यक्तिगत तौर पर चिकित्सा मंत्री से मुलाकात करके अवगत कराया था। मंत्री ने कोटा की जनता के आग्रह को स्वीकार करते हुए बुधवार को इसकी घोषणा की है।

क्या है बोन बैंक?
बोन बैंक सामान्यतः आई बैंक की तरह ही हैं, जिसमें डोनर द्वारा दान की गई या ऑपरेशन के दौरान निकाली जाने वाली अस्थियों का डीप फ्रीजर में -40 डिग्री से -70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर संग्रह किया जाता है।

क्या संग्रह किया जाता है?
ऑपरेशन के दौरान निकाली जाने वाली हड्डियाें का संग्रह इसमें किया जाता है।

क्या हैं इसके फायदे?

हड्डी के री-यूज से ऑपरेशन का समय कम हो जाता है। ऑपरेशन में ब्लड लॉस कम होता है। बोन ट्यूमर निकालने के बाद खाली जगह भरने के लिए, जोड़ प्रत्यारोपण में, हड्डी नहीं जुड़ने की स्थिति में और जोड़ जाम करने के लिए इसका उपयोग होता है।

जेकेलोन में 6 बेड की हाई डिपेंडेंसी यूनिट

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा ने बताया कि जेकेलोन के लिए 6 बेड की हाई डिपेंडेंसी यूनिट की घोषणा भी हुई है। यह यूनिट आईसीयू जैसे मानकों पर बनेगी, जहां गंभीर मरीज भर्ती किए जाएंंगे। इनके अलावा निश्चेतना, ईएनटी व पैथोलॉजी विभाग के वर्क स्टेशन बनेंगे। निश्चेतना विभाग का वर्क स्टेशन जेकेलोन, पैथोलॉजी विभाग का मेडिकल कॉलेज कैंपस तथा ईएनटी विभाग का वर्क स्टेशन एमबीएस में प्रस्तावित है। नेत्र रोग विभाग में ऑप्टिकल कोहरेंस टोपोग्राफी (ओसीटी) मशीन की घोषणा की गई है। करीब 40 लाख लागत की इस मशीन से रेटिना की बीमारियों की जांच व इलाज हो सकेगा।

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