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भूमिगत डॉक्टर घर पहुंचे, बेटी बोली-पापा ! हड़ताल पर मत जाना, घर आती है पुलिस

सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश महासचिव डॉ. सैनी घर पहुंचे तो लिपट गई 7 साल की बेटी

Dainik Bhaskar

Dec 29, 2017, 04:51 AM IST
बेटी निष्ठा व बेटे भव्य के साथ डॉ. दुर्गाशंकर सैनी। बेटी निष्ठा व बेटे भव्य के साथ डॉ. दुर्गाशंकर सैनी।

कोटा. “पापा! अब हड़ताल पर मत जाना, घर पर बार-बार पुलिस आ जाती है’ हड़ताल के दौरान करीब 12 दिन तक भूमिगत रहने के बाद जैसे ही सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश महासचिव डॉ. दुर्गाशंकर सैनी अपने घर पहुंचे तो 7 साल की बेटी निष्ठा उनसे यह बात कहते हुए लिपट गई। बोलीं- घर पर इतनी बार पुलिस आई, एक-एक कमरे में घुसती और आपको ढूंढती थी तो मुझे डर लगता था। हालांकि बाद में डॉ. सैनी ने बच्ची को तसल्ली दी और कहा कि अब ऐसी नौबत नहीं आएगी।


- चार साल का बेटा भव्य भी पिता को इतने दिन बाद देख खुश हुआ। डॉ. सैनी ही नहीं बल्कि सेवारत चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अमित गोयल, महासचिव डॉ. राजेश सामर समेत सभी प्रमुख पदाधिकारियों के घर गुरुवार को ऐसा ही माहौल था। वजह यह थी कि हड़ताल के दौरान सरकार द्वारा रेस्मा लगा देने से पुलिस ने डॉक्टरों की गिरफ्तारियां शुरू कर दी।

- इसी के चलते सभी प्रमुख पदाधिकारी 15 दिसंबर की रात से ही घरों से गायब थे। स्थिति ऐसी थी कि वे घरों पर बात भी नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि मोबाइल लोकेशन के आधार पर उन्हें पकड़े जाने का डर था। सभी के घर पहुंचने के बाद परिजनों ने भी राहत की सांस ली है।

- डॉ. सैनी गुरुवार को ईएसआई अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने पहले मेन गेट पर मत्था टेका और फिर अंदर जाकर रजिस्टर में साइन किए।


- वहीं रेजीडेंट हॉस्टल्स में भी गुरुवार को चहल-पहल दिखी। इतने दिनों बाद कोटा आए रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजमल मीणा व उनकी टीम का स्थानीय रेजीडेंट्स ने स्वागत किया।

-हड़ताल समाप्त होने के बाद गुरुवार से सेवारत चिकित्सक और रेजीडेंट डॉक्टर काम पर लौट आए। इमरजेंसी सेवाएं भी सुचारू हो गई और वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी हैं।

- मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में पहले दिन आउटडोर में भी अच्छी खासी भीड़ नजर आई। हालांकि ऑपरेशन थिएटर शुरू होने में अभी भी दो-तीन दिन लगेंगे, क्योंकि दोनों बड़े अस्पतालों के ओटी में मेंटिनेंस का काम चल रहा है।

- अस्पतालों के अधीक्षकों ने बताया कि कमोबेश सभी डॉक्टर काम पर लौट आए हैं, इक्कादुक्का डॉक्टर शाम तक आए हैं।

यह कोई जीत-हार नहीं
- ईएसआई अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारी डॉ. सैनी का स्वागत करने लगे तो उन्होंने माला पहनने से मना कर दिया और कहा कि यह कोई हार-जीत का मसला नहीं था, इसलिए इसे इस रूप में पेश नहीं किया जाए कि डॉक्टरों की जीत हो गई। यह सिर्फ दमनात्मक कार्रवाई का विरोध था, जिसमें मरीजों को काफी नुकसान हुआ।

- भगवान से प्रार्थना करते हैं कि दोबारा ऐसी परिस्थितियां कभी पैदा नहीं हो। उन्होंने संघ से जुड़े सभी चिकित्सकों से अपील भी की कि अगले कुछ दिन तक सरकार द्वारा निर्धारित समय से ज्यादा समय अस्पताल में देकर मरीजों की ज्यादा से ज्यादा सेवा करें।


ताउम्र याद रहेंगे ये 12 दिन
- सेवारत चिकित्सकों ने बताया कि ये 12 दिन पूरी जिंदगी याद रहेंगे। एक-एक दिन कैसे बिताया, यह हम ही जानते हैं।

- किसी ने लोकेशन बदलने के लिए अपने मोबाइल दूसरे शहरों में भेजे तो किसी ने खेत-खलिहानों में रात बिताई।

- एक डॉक्टर ने अपना मोबाइल उदयपुर भेजा हुआ था और वे खुद अलग-अलग शहरों में घूम रहे थे, ताकि पुलिस लोकेशन ट्रेस नहीं कर सके। इसी तरह एक अन्य डॉक्टर दूसरे राज्य में शरण लिए हुए थे। आश्रम में भी रात बिताई और ज्यादातर समय दोस्तों के घरों पर रहे।

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बेटी निष्ठा व बेटे भव्य के साथ डॉ. दुर्गाशंकर सैनी।बेटी निष्ठा व बेटे भव्य के साथ डॉ. दुर्गाशंकर सैनी।
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