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हर साल कॉपी चेकिंग में 3 करोड़ रुपए खर्च, फिर भी गलतियां जारी

कोटा यूनिवर्सिटी में एक के बाद एक परीक्षा से संबंधित मामलों में सामने आ रही है गड़बड़ी

Bhaskar News | Last Modified - Jan 16, 2018, 06:57 AM IST

  • हर साल कॉपी चेकिंग में 3 करोड़ रुपए खर्च, फिर भी गलतियां जारी
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    कोटा. कोटा यूनिवर्सिटी की ओर से हर साल तीन करोड़ रुपए कॉपी चैक करने वालों पर खर्च करने के बावजूद गलतियां रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब तक काॅलेजों से ही कॉपी सही चेक नहीं करने, गणना ठीक से नहीं करने, आंसर नहीं जांचने सहित अन्य शिकायत आती थी। पर अब यूनिवर्सिटी कैंपस के स्टूडेंट्स की कॉपियां में गलतियां सामने आ रही है।


    - औसतन एक स्टूडेंट से 1500 रुपए एग्जामिनेशन शुल्क लिया जाता है। ऐसे में कुल दो लाख तीस हजार से हर साल 34 करोड़ रुपए का राजस्व स्टूडेंट्स से होता है।

    - रविवार को हाल में जारी पहले व तीसरे सेमेस्टर के परिणामों में गलतियां पाए जाने के बाद भास्कर ने कॉपी चेक करने के संबंध में पड़ताल की ताे चौंकाने वाली बातें सामने आई।

    कॉपी जांचने में रिवेल करवाया था तो 15 में से 12 पास
    1. साल 2016 में बीएससी ऑनर्स में 35 में से 20 स्टूडेंट्स ही पास हुए थे। 15 बच्चों ने जब रिवेल के लिए एप्लाई किया तो उसमें से करीब 12 स्टूडेंट्स ने पेपर पास कर लिया और अगले सेमेस्टर के लिए एलिजिबल
    हो गए।
    2.साल 2016 में डिजीटल इलेक्ट्रोनिकल के पेपर में एक स्टूडेंट्स के 80 में से मात्र 21 नंबर आए और उसको बैक देने की नौबत आ गई। रिवेल करवाया तो उसके 50 प्रतिशत अंक बढ़कर 21 से 43 पर आ गया। मेन पेपर भी क्लियर कर लिया।

    रिजल्ट तैयार में मैथ्स में 29 में से 18 की बैक
    1. साल 2017 में हुए सेमेस्टर एग्जाम में 29 में से 18 स्टूडेंट्स के बैक आई। जबकि इन स्टूडेंट्स के दूसरे पेपर में 60 से 65 प्रतिशत अंक आए थे।
    2.एमएड के लर्निंग एंड डवलपमेंट के पेपर मे स्टूडेंट्स के तीन-तीन अंक भी आए हैं। वहीं, इसके दूसरे पेपर में स्टूडेंट्स ने 60 प्रतिशत अंक स्कोर किए हैं। यूनिवर्सिटी तब भी अपने असेसमेंट को गलत नहीं बताती।

    पैटर्न में गलती पुराने पैटर्न पर ही तैयार कर दिया पेपर
    1. फिजिकल कैमेस्ट्री में 27 नंबर के सवाल सिलेबस से नहीं आए हैं। शिक्षकों ने भी माना था कि यह सवाल सिलेबस में नहीं है। जबकि परीक्षा विभाग इस पर सहमत नहीं हुआ।
    2.इस साल बीए का रिजल्ट देरी से घोषित किया गया। इसमें भी परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को अनुपस्थित बता दिया और कई छात्रों को नंबर ही नहीं दिए। इस पर भी यूनिवर्सिटी में जबरदस्त प्रदर्शन किया था।

    2011 में हुई थी कार्रवाई

    कॉपी जांचने में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ साल 2011 में आखिरी बार कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कोई एक्शन नहीं लिया गया। दूसरी ओर आरटीयू हर सेमेस्टर एग्जाम लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ डिबार की कार्रवाई करते हुए उनके नाम सार्वजनिक करता है।

    जानिए परीक्षा का गणित

    यूजी की कॉपी जांचने वाले का भुगतान: 20 रुपए प्रति कॉपी
    पीजी की कॉपी जांचन वालों का भुगतान: 30 रुपए प्रति कॉपी
    कुल यूजी स्टूडेंट्स: 1 लाख 80 हजार
    कुल पेपर: एक स्टूडेंट औसतन छह पेपर देता है
    कुल खर्च होने वाली राशि:दो करोड़ 16 लाख रुपए
    कुल पीजी स्टूडेंट्स:50 हजार
    कुल पेपर:एक स्टूडेंट आैसतन चार पेपर देता है
    कुुल खर्च होने वाली राशि:60 लाख रुपए

    ऐसे मिलता है राजस्व

    - 2.30 लाख कुल स्टूडेंट्स

    - 1500 औसतन एग्जाम फीस

    - 34 करोड़ कुल राजस्व

    नोट: इसके साथ ही लॉ व अन्य कुछ विषयों में अधिक पेपर होने के कारण कुल राशि तीन करोड़ तक पहुंच जाती है।

    यह है प्रावधान: कोटा यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार ही अगर फर्स्ट एग्जामिनर व सेकंड एग्जामिनर के बीच जांच कई एक कॉपी में 30 प्रतिशत से अधिक अंकों का अंतर आता है तो फर्स्ट एग्जामिनर के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

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Web Title: Three Crore Rupees Spent In Copy Checking Every Year
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