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सेफ्टी वॉल नहीं बनी, जनवरी के आखिरी सप्ताह तक ही आ सकेंगे टाइगर

मुकंदरा हिल्स रिजर्व में दिसंबर में टाइगर छोड़ने की है योजना। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने भास्कर को बताया सही समय

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2017, 07:58 AM IST
Tiger shifting plans at the Mukandra Hills Reserve

कोटा. मुकंदरा रिजर्व में अब दिसंबर में बाघ नहीं आएंगे। इसके लिए डेढ़ से 2 माह का इंतजार करना पड़ेगा। बाघों की सुरक्षा में किसी तरह का खलल नहीं पड़े और रिलोकेट मिशन सुरक्षित ढंग से हो, इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों ने दिसंबर में टाइगर शिफ्टिंग की योजना टाल दी है। भास्कर से विशेष बातचीत में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जीवी रेड्डी ने यह जानकारी दी। रेड्डी ने बताया कि अब जनवरी के आखिरी हफ्ते या 15 फरवरी तक मुकंदरा में बाघों को छोड़ा जाएगा। इससे पहले सुरक्षा के सारे इंतजाम किए जाएंगे।


दिसंबर में बाघ न छोड़ने की वजह बताते हुए रेड्डी ने कहा कि सुरक्षा दीवार पूरी नहीं बनी है। बजरी खनन पर रोक के चलते दीवार बनाने में देरी हो रही है। ऐसी स्थिति में बाघ छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। दीवारें नहीं बनेंगी तो रिजर्व एरिया में आने वाले मवेशियों को टाइगर शिकार बनाएंगे। इसके चलते पशुपालकों की ओर से टकराव की स्थिति बनेगी। यहां तक कि टाइगर को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में वन विभाग ग्रेजिंग के संवेदनशील प्वाइंट पर दीवारें बनाकर उन्हें कवर करने की मशक्कत कर रहा है। ताकि पशुपालक टाइगर रिजर्व में मवेशियों को नहीं चरा सके। बोराबांस, भैरूपुरा, जामुनिया बावड़ी आदि गांवों के हजारों मवेशी हैं। यह गांव सेल्जर वनक्षेत्र से सटे हुए हैं।

25 तक पूरा होना है एनक्लोजर का काम, नींव के लिए भी बजरी नहीं

सेल्जर वनक्षेत्र को कवर करने के लिए भैरुपुरा से जवाहर सागर हनुमान मंदिर तक करीब 4 किलोमीटर दीवार बनी है। अभी सिर्फ 800 से 900 मीटर का काम हुआ है। भैरुपुरा से सेल्जर घाटी तक करीब 5 किलोमीटर दीवार बननी है। यहां भी केवल 1300 मीटर दीवार ही बन सकी है। मुकंदरा दरा व गागरोन रेंज को मिलाकर 8000 हैक्टेयर में एनक्लोजर बनाना है। इसके लिए 34 किलोमीटर की दीवार स्वीकृत है, लेकिन अभी सिर्फ 1 किमी दीवार ही बन पाई है। वहीं, एनक्लोजर की नींव भरने के लिए भी बजरी का अभाव बना हुआ है। इस एनक्लोजर को 25 दिसंबर तक पूरा करना है जो अब संभव नहीं दिख रहा है।

पत्थर चूरी भी नहीं मिल रही आसानी से

16 नवंबर को राजस्थान में बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था बिना पर्यावरण मंजूरी के बजरी खनन नहीं हो सकता। बजरी नहीं मिलने से मुकंदरा में बाघों की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही दीवारों का काम ठप पड़ गया। बाद में जैसे-तैसे काम शुरू करवाने के लिए बजरी के विकल्प में सरकार से अप्रूव्ड मैन्यूफैक्चरिंग सैंड (क्रेशर पत्थर चूरी) से दीवार बनवाना शुरू किया। अब पत्थर चूरी भी आसानी से नहीं मिल रही है। इस वजह से दीवारें समय पर नहीं बन पाएंगी।

बजरी खनन से रोक हटाना वन विभाग के हाथ में नहीं था
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बजरी खनन पर रोक लगाने से रेत नहीं मिल पाई। बजरी खनन से रोक हटाना वन विभाग के हाथ में नहीं था। रेत नहीं मिलने से ही सुरक्षा दीवारों को बनाने का काम लेट होता चला गया। बाघों की सुरक्षा को लेकर जोखिम नहीं लिया जा सकता है। जब तक दीवारें कंपलीट नहीं हो जाएंगी बाघ नहीं छोड़ा जाएगा। बाघों को मुकंदरा में जनवरी अंत व 15 फरवरी तक ही बसाया जाएगा। बीच में विशेष परिस्थितियां बनी तो मुकंदरा में बाघ छोड़ दिए जाएंगे। -जीवी रेड्डी, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन

जाली आने में देरी से सेल्जर में भी रुक गया था काम
सेल्जर में 1 हैक्टेयर का एनक्लोजर बनाया जा रहा है। इसे नवंबर तक कंपलीट करना था। जाली आने में हुई देरी के कारण अभी 75 फीसदी ही काम हो पाया है। इसे तैयार करने में सप्ताहभर का समय लेगा। डीसीएफ सेडूराम यादव ने कहा कि तीन दिन में काम पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि जाली को पैक करने लिए नीचे डेढ़ मीटर की फाउंडेशन भरी जानी है।


स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के 10 जवान लगाए
डीसीएफ ने बताया कि मुकंदरा में रणथंभौर से स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के 10 जवानों की तैनाती कर दी गई है। साथ ही पुलिस प्रशासन की ओर से 30 आरएसी के जवानों की तैनाती के ऑर्डर मिल गए हैं। इन्हें जल्द मुकंदरा में तैनात किया जाएगा।


...और दो दिन से नहीं मिल रहे टी-91 के पगमार्क
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में आने वाले बाघों की लिस्ट में टी-91 का नाम टॉप पर है। यह अभी रामगढ़ सेंचुरी में है। पिछले दो दिन से उसके पगमार्क नहीं मिल रहे हैं। हालांकि, सेंचुरी का स्टाफ व रणथंभौर से आए 5 ट्रैकर नियमित ट्रैकिंग में जुटे हुए है। आखिरी बार 11 दिसंबर की सुबह वनकर्मियों ने ट्रैकिंग के दौरान उसके फुटप्रिंट लिए थे।

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