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अमेरिका और सऊदी से मिल रहे इस आम के लिए ऑर्डर, इस वजह से है खास

यह आम का पेड़ बेहद खास है। एक साल में 3 बार फल देता है। देश-विदेश में इसे इतना पसंद किया जा रहा है।

अर्जुन अरविंद | Last Modified - Dec 03, 2017, 01:40 AM IST

  • अमेरिका और सऊदी से मिल रहे इस आम के लिए ऑर्डर, इस वजह से है खास
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    इस सदाबहार आम में दूसरी किस्मों की तुलना में मिठास ज्यादा होती है।

    कोटा.यह आम का पेड़ बेहद खास है। एक साल में 3 बार फल देता है। देश-विदेश में इसे इतना पसंद किया जा रहा है कि ऑर्डर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। दिल्ली में एक एग्जीबिशन के दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तो आम की इस किस्म से इतना प्रभावित हुए कि चार पौधे राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन में लगवा दिए। अब इस आम की इटली, अमेरिका व सऊदी अरब से डिमांड आ रही है।

    - सदाबहार आम की इस किस्म के जनक हैं कोटा जिले के गिरधरपुरा के 50 साल के काश्तकार श्रीकिशन सुमन। वे बताते हैं कि मेरे पास आज इतनी डिमांड है कि मैं ऑर्डर पूरे करने लायक पौधे तैयार नहीं कर पा रहा हूं।

    - वे बताते हैं कि इस सदाबहार आम में दूसरी किस्मों की तुलना में मिठास ज्यादा होती है। इसमें रेशे भी कम होते हैं। फल का बाहरी रंग ऑरेंज होता है और गूदा केसरिया रंग का होता है।

    - इसमें फल गुच्छों में लगते हैं, जबकि दूसरी किस्मों में ऐसा नहीं होता है। परंपरागत खेती करने वाले श्रीकिशन के परिवार को प्राकृतिक आपदा से नुकसान हो रहा था। तभी विचार आया कि ऐसी खेती क्यों नहीं हो सकती, जिसमें प्राकृतिक आपदा का खतरा ही नहीं रहे। इसके बाद देसी गुलाब पर अलग-अलग किस्म के गुलाब की ग्राफ्टिंग की तो एक ही पौधे पर कई तरह के गुलाब आने लगे। फूलों के बाद फलों में आम याद आया।

    - अलग-अलग किस्म की 100 से ज्यादा गुठलियां बोई, पौधे बने, उनमें से कई किस्म के पौधे छांटे और मिक्स वैरायटी का आम तैयार किया। इस पौधे पर सर्दी, गर्मी व बारिश में फल आने लगे।

    - बस, यहीं से उन्होंने इस पर नए प्रयोग करने शुरू कर दिए। अभी उनके पास 322 मदर प्लांट हैं। हर पौधे की शाखा से वह ग्राफ्टिंग करके शिशु पौधे तैयार कर रहे हैं। यूपी के सहारनपुर से 20 हजार देसी आम के पौधे मंगवा रखे हैं। एक पौधा 3 महीने में ग्राफ्टिंग से तैयार हो पाता है।

    - श्रीकिशन ने बताया कि सितंबर में इटली के लोगों की डिमांड पर जयपुर के कृष्णकांत 10 पौधे इटली ले गए, वहां उन पर फल आने लगे हैं।

    - अमेरिका में रहने वाले गुजरात मूल के गलफत भाई पटेल ने वहां के लोगों के कहने पर श्रीकिशन से पौधे मंगवाए हैं। कोलकाता मूल के एक शख्स ने सऊदी अरब से इंटरनेट के माध्यम से उनका मोबाइल नंबर तलाशा और ऑर्डर किया है।

    विदेशों से मिले ऑर्डर की डिमांड पेंडिंग

    - श्रीकिशन ने बताया कि फिलहाल अमेरिका व सऊदी अरब से आई डिमांड पेंडिंग है, क्योंकि नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन इंडिया, गुजरात से जुड़े ब्रिगेडियर विजय गणेशम द्वारा हैदराबाद के लिए 4 हजार पौधों की डिमांड पूरी करनी है। वहां भी दिसंबर तक सिर्फ 700 पौधे ही भेज पाएंगे। बेंगलुरु, बिहार, कर्नाटक, दिल्ली व त्रिपुरा से भी लोगों ने ऑर्डर किए हैं।

    राष्ट्रपति दे चुके हैं अवॉर्ड

    - श्रीकिशन को अपने इस आम की वजह से कई पुरस्कार मिल चुके हैं। दिल्ली में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन इंडिया की एग्जीबिशन लगी थी।

    - 4 मार्च को प्रदर्शनी में पहुंचे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस आम को खूब पसंद किया।

    - मुखर्जी ने श्रीकिशन को राष्ट्रीय तृणमूल टेक्नोलॉजी एनोवेशन एवं पारंपरिक ज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया है।

    - केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने भी श्रीकिशन को साल 2016 में जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार व जगजीवन राम इनोवेटिव फार्मर अवाॅर्ड 2015 दिया था।

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    इस आम में रेशे भी कम होते हैं। फाइल फोटो
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    एक पौधा 3 महीने में ग्राफ्टिंग से तैयार हो पाता है। फाइल फोटो
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    श्रीकिशन को अपने इस आम की वजह से कई पुरस्कार मिल चुके हैं। फाइल फोटो।
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