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चेतन ने कहा- मेरे 10वीं आए थे 76% मार्क्स, STD बूथ डालने का था प्लान

कोटा आए मोटिवेशनल स्पीकर व नॉवेल राइटर चेतन भगत, कॅरियर उत्सव का उद्‌घाटन करते हुए कहा-मेहनत करो लेकिन प्लान बनाकर

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 06:19 AM IST
काॅर्मस काॅलेज परिसर मंे कॅरियर उत्सव के दौरान कोचिंग स्टूडेंट्स के साथ सेल्फी लेते चेतन भगत। काॅर्मस काॅलेज परिसर मंे कॅरियर उत्सव के दौरान कोचिंग स्टूडेंट्स के साथ सेल्फी लेते चेतन भगत।

कोटा. आईआईटी, मेडिकल और आईआईएम के एंट्रेंस एग्जाम में सफल होना लंबी व कड़ी मेहनत का काम है। इसे हासिल करने के लिए धक्कामार मोटिवेशन से काम नहीं चलेगा। अपनी औकात यानी क्षमता से बढ़कर काम करोगे, तभी सफलता मिलेगी। यह बात मोटिवेशनल स्पीकर व नॉवेल राइटर चेतन भगत ने शुक्रवार को कोचिंग स्टूडेंट्स से कही। वे कॉमर्स कॉलेज ग्राउंड पर कॅरियर उत्सव के उद्‌घाटन के अवसर पर बोल रहे थे।


- उन्होंने कहा कि मेहनत दो तरह की होती है। छोटी मेहनत व लंबी मेहनत। घर व रोज के काम छोटी मेहनत में आते हैं, लेकिन इसका रिवार्ड नहीं मिलता। माहौल में हंसी का समावेश करने के लिए उदाहरण दिया कि अगर कोई दो किलो टमाटर लेकर घर आता है तो काेई यह नहीं कहता कि उसने बड़ा काम किया है, क्योंकि यह रोज का काम है। आईआईटी, मेडिकल व आईआईएम एंट्रेंस पास करना, डाइटिंग करना, फिटनेस बनाना, फिल्म मेकिंग, नॉवेल राइटिंग बड़ी मेहनत है। इन्हें अचीव करने पर आपको रिवार्ड मिलता है।

- उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान आप नर्वस होंगे, कभी कभी पढ़ाई के घंटे भी कम होंगे, लक्ष्य से भटककर गिरोगे भी, लेकिन आपको फिर से उठकर प्लांड टाइम टेबल पर आना होगा।

मंच पर कहा-पांच साल बाद कोटा आया हूं मैं

- मंच पर आते ही कहा कि पांच साल बाद कोटा आया हूं। यह देखकर अच्छा लगा कि इस बार लड़के व लड़कियां साथ-साथ बैठे हुए हैं। इस पर स्टूडेंट्स ने जोर से कहा कि अलग-अलग ही बैठे हैं। चेतन ने जवाब दिया कि अगले पांच साल में साथ-साथ बैठे हुए मिल जाओगे।

ऐसे समझाया लंबी मेहनत को

- उन्होंने कहा कि मैं हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म के सेट मौजूद रहा था। वहां 12 घंटे की शिफ्ट के दौरान मात्र 60 सैकंड की फिल्म तैयार होती थी। तब मुझे लगा कि एक फिल्म को बनाने में इतनी मेहनत लगती है। जब रिजल्ट सामने आता है तब कहा जाता है कि पिक्चर बन गई।

उदाहरण से बताया सक्सेस को

- भगत ने उदाहरण देते हुए पूछा कि वरुण धवन और गरीब परिवार में जन्मी महिला जो जर्नलिस्ट बन गई, इन दोनों में से किसे सक्सेसफुल मानेंगे। अधिकांश बच्चों ने महिला जर्नलिस्ट को सक्सेसफुल बताया, क्योंकि उसने विपरीत परिस्थितियों में सफलता हासिल की।

एसटीडी बूथ डालने का फैसला

भगत ने कहा कि दसवीं में 76 प्रतिशत अंक आए थे। इसके बाद मैंने एसटीडी बूथ डालने का फैसला किया। बाद में मैंने देश के टॉप कॉलेज में जाने का निर्णय किया।

सवालों के ये जवाब दिए
Q. सर, मैं राइटर बनना चाहता हूं, इसकी बेसिक्स क्या है?
A.
राइटिंग नीड्स लर्निंग। जितना पढ़ोगे, उतना अच्छा लिख पाओगे।
Q. मोटिवेशन स्पीच सुनने के बाद कुछ दिन तक कर दिखाने का जज्बा रहता है, बाद में खत्म हो जाता है?
A.
खुद को बार बार लिफ्ट करो। मोटिवेशन गिरेगा, लेकिन फिर उठाना होगा। निगेटिव बातों को दूर करो।
Q. दूसरों से तुलना करने की भावना आती है। इसे दूर करने के लिए 24 घंटे तो पढ़ा नहीं जा सकता?
A.
चार से छह घंटे की सेल्फ स्टडी काफी है। बाकी क्लासरूम स्टडी होती है। इसलिए तुलना मत करो।