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जिले के तीनों केंद्रों पर सरकारी चने की खरीद बंद, किसान दुखी

नेफेड द्वारा जारी दिशा निर्देशों के चलते जिले के बूंदी, देई, कापरेन सरकारी खरीद केंद्र पर खरीद स्थगित कर दी गई। उप...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:45 AM IST

जिले के तीनों केंद्रों पर सरकारी चने की खरीद बंद, किसान दुखी
नेफेड द्वारा जारी दिशा निर्देशों के चलते जिले के बूंदी, देई, कापरेन सरकारी खरीद केंद्र पर खरीद स्थगित कर दी गई। उप रजिस्ट्रार अमरसिंह ने बताया कि अच्छी गुणवत्ता वाला चना होने के बाद भी नेफेड द्वारा भंडारण नहीं किया जा रहा। सभी खरीद केंद्रों पर चने की खरीद कर भेजे गए ट्रक नेफेड के सर्वेयरों द्वारा नापास कर वापस बांटने से जिले के बूंदी, देई, कापरेन में खरीद बंद कर दी गई। सिंह ने बताया कि चना खरीद करने के लिए बूंदी खरीद केंद्र पर गणित गुणवत्ता निर्धारण कमेटी द्वारा किसानों के चने के सैंपल लेकर बताया कि किसानों का चना अच्छी क्वालिटी का है लेकिन नेफेड द्वारा जारी दिशा निर्देशों में चने की किस्म को एडमिचर मानने से समस्या उत्पन्न हो गई।

सरकार द्वारा चना खरीद केंद्र बनाकर चना खरीदने के लिए किसानों को टोकन जारी कर दिए गए। किसान चने की फसल को लेकर मंडी में पहुंच रहे है। खरीद बंद होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन से खरीद बंद होने से किसान कम दामों पर अपनी जिंस बेचने का मजबूर है।

नेफेड द्वारा जारी दिशा निर्देशों में 6 नंबर पर जारी दिशा निर्देश अन्य किस्म का मिश्रण पर दी गई पांच प्रतिशत छूट जी जा जंजाल बन गई। नेफेड द्वारा तीन प्रकार की चने की किस्म मानी गई है। कांटे दार, विशाल, मौसमी। जबकि मंडी में चने की सभी किस्म मिक्स आ रही है। चना कांटे वाला, विशाल, मौसमी, मोटा, भूरा, देशी काला पांच तरह का आ रहा है। किसान अपनी उपज के सभी प्रकार के चनों को एक साथ मिक्स करके मंडी ला रहा है। चने की एक किस्म में दूसरी किस्म मिल जाती है तो उसे एडमिचर मानकर राजफेड के सर्वेयरों द्वारा गोदामों पर खाली नहीं ं करवाया जा रहा।

किसान को किस्म का पता लगना संभव नहीं: इस संबंध में कृषि पर्यवेक्षक जसवंत सिंह द्वारा बताया गया चने की एक पौधे पर भी चने के एक पौधे पर भी सभी चने समान आकार व सामान रंग के नही होते है। जिससे चने के ढेर में भिन्न भिन्न प्रकार के चने दिखाई देते है। चने के ढेर में यह निर्धारण करना कि उसमें कौनसा चना किस किस्म का है, कृषक द्वारा पता लगाना संभव नहीं है। ऐसे में नेफेड द्वारा जारी एक ढेर में 5 प्रतिशत तक अन्य प्रकार का चना निर्धारण करना तर्कसंगत नहीं है। सहकारी समितियों के उप रजिस्ट्रार अमरसिंह ने बताया कि जब तक खरीद केंद्रों पर पड़ा चना नेफेड द्वारा जमा नहीं किया जाता। सरकार द्वारा खरीद केंद्रों पर सर्वेयर नहीं लगाए जाते तब तक जिले में चने की खरीद बंद रहेगी।

जिले में गुणवत्ता मापदंड कमेटी द्वारा किसानों की जिंसों को खरीदने के लिए मापदंडों में शिथिलता बरतने के लिए संभागीय आयुक्त को पत्र लिखा है। -शिवांगी स्वर्णकार, कलेक्टर, बूंदी

देई। कृषि उपज मंडी क्रय केंद्र पर लगे सरकारी चने के स्टॉक भरी पडी मंडी।

देई। केंद्र पर वापस आए चने को देखते नैनवां क्रय-विक्रय प्रबंधक कमलेश जैन।

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