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शिकायत पर गोशाला पहुंची पुलिस, गायों को मुक्त कराया

देईखेड़ा| आजंदा ग्राम पंचायत के खेड़ली बंधा स्थित श्रीकेशव गोशाला में लगातार हो रही गायों की मौत को लेकर ग्रामीणों...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:45 AM IST
देईखेड़ा| आजंदा ग्राम पंचायत के खेड़ली बंधा स्थित श्रीकेशव गोशाला में लगातार हो रही गायों की मौत को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस को परिवाद पेश किया था। जिस पर कार्रवाई करने के लिए जांच अधिकारी जितेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने गोशाला की अव्यवस्थाओं को लेकर रोष प्रकट किया तथा गायों को गोशाला से मुक्त करते हुए बाहर निकाल दिया। जांच अधिकारी ने बताया कि गोशाला संचालक रामप्रसाद सुवालका के पास संबंधित किसी तरह के दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। संचालक ने कहा कि यहां सुरक्षित स्थान नहीं होने से सभी दस्तावेज घर पर ही रखे हुए हैं। गौरतलब है कि जांच इंचार्ज व ग्रामीणों ने गोशाला की अव्यवस्था पर संचालक को भी लताड़ लगाई तथा पर्याप्त चारे-पानी की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। इसी दौरान जांच अधिकारी के साथ आए ग्रामीण पप्पू लाल चांदीजा अरनेठा, धनराज गुर्जर, धर्मराज गुर्जर हांडया खेडा, नंदराज अरनेठा, बलराम गौतम, शिवरतन शर्मा, महेंद्र राठौड़ आदि ने रोष प्रकट किया। उन्होंने बाड़े में बंद सभी गायों व बछड़ों को गोशाला से बाहर निकाल दिया। गोशाला बंद करने की बात कहते हुए वहां से निकल गए। जब जांच अधिकारी व ग्रामीणों ने गायों के मरने का ब्यौरा मांगा तो कर्मचारियों ने एक कागज पर मुर्दा मवेशियों को उठाने वाले व्यक्ति द्वारा लिखी गई इबारत दिखाई। जिसमें मार्च महीने में तकरीबन 50-60 गोवंश की मौत की पुष्टि हुई। जिससे लोगों के रौंगटे खड़े हो गए। पुलिस ने भी संचालक से रिकॉर्ड तलब किया है। पुलिस के अनुसार क्षेत्र के आजंदा, कोड़क्या, कोटड़ी, ढीकोली, खेडलीबंधा आदि गांवों के ग्रामीणों ने गोशाला में व्याप्त अव्यवस्थाओं से मर रहे गोवंशों की जांच व कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

श्रीकेशव गोशाला खेड़ली बंधा का मामला, गायों की मौत से नाराज हैं ग्रामीण

देईखेड़ा। गोशाला से गायों को निकालते हुए लोग।

देईखेड़ा| आजंदा ग्राम पंचायत के खेड़ली बंधा स्थित श्रीकेशव गोशाला में लगातार हो रही गायों की मौत को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस को परिवाद पेश किया था। जिस पर कार्रवाई करने के लिए जांच अधिकारी जितेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने गोशाला की अव्यवस्थाओं को लेकर रोष प्रकट किया तथा गायों को गोशाला से मुक्त करते हुए बाहर निकाल दिया। जांच अधिकारी ने बताया कि गोशाला संचालक रामप्रसाद सुवालका के पास संबंधित किसी तरह के दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। संचालक ने कहा कि यहां सुरक्षित स्थान नहीं होने से सभी दस्तावेज घर पर ही रखे हुए हैं। गौरतलब है कि जांच इंचार्ज व ग्रामीणों ने गोशाला की अव्यवस्था पर संचालक को भी लताड़ लगाई तथा पर्याप्त चारे-पानी की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। इसी दौरान जांच अधिकारी के साथ आए ग्रामीण पप्पू लाल चांदीजा अरनेठा, धनराज गुर्जर, धर्मराज गुर्जर हांडया खेडा, नंदराज अरनेठा, बलराम गौतम, शिवरतन शर्मा, महेंद्र राठौड़ आदि ने रोष प्रकट किया। उन्होंने बाड़े में बंद सभी गायों व बछड़ों को गोशाला से बाहर निकाल दिया। गोशाला बंद करने की बात कहते हुए वहां से निकल गए। जब जांच अधिकारी व ग्रामीणों ने गायों के मरने का ब्यौरा मांगा तो कर्मचारियों ने एक कागज पर मुर्दा मवेशियों को उठाने वाले व्यक्ति द्वारा लिखी गई इबारत दिखाई। जिसमें मार्च महीने में तकरीबन 50-60 गोवंश की मौत की पुष्टि हुई। जिससे लोगों के रौंगटे खड़े हो गए। पुलिस ने भी संचालक से रिकॉर्ड तलब किया है। पुलिस के अनुसार क्षेत्र के आजंदा, कोड़क्या, कोटड़ी, ढीकोली, खेडलीबंधा आदि गांवों के ग्रामीणों ने गोशाला में व्याप्त अव्यवस्थाओं से मर रहे गोवंशों की जांच व कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

देईखेड़ा| आजंदा ग्राम पंचायत के खेड़ली बंधा स्थित श्रीकेशव गोशाला में लगातार हो रही गायों की मौत को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस को परिवाद पेश किया था। जिस पर कार्रवाई करने के लिए जांच अधिकारी जितेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने गोशाला की अव्यवस्थाओं को लेकर रोष प्रकट किया तथा गायों को गोशाला से मुक्त करते हुए बाहर निकाल दिया। जांच अधिकारी ने बताया कि गोशाला संचालक रामप्रसाद सुवालका के पास संबंधित किसी तरह के दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। संचालक ने कहा कि यहां सुरक्षित स्थान नहीं होने से सभी दस्तावेज घर पर ही रखे हुए हैं। गौरतलब है कि जांच इंचार्ज व ग्रामीणों ने गोशाला की अव्यवस्था पर संचालक को भी लताड़ लगाई तथा पर्याप्त चारे-पानी की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। इसी दौरान जांच अधिकारी के साथ आए ग्रामीण पप्पू लाल चांदीजा अरनेठा, धनराज गुर्जर, धर्मराज गुर्जर हांडया खेडा, नंदराज अरनेठा, बलराम गौतम, शिवरतन शर्मा, महेंद्र राठौड़ आदि ने रोष प्रकट किया। उन्होंने बाड़े में बंद सभी गायों व बछड़ों को गोशाला से बाहर निकाल दिया। गोशाला बंद करने की बात कहते हुए वहां से निकल गए। जब जांच अधिकारी व ग्रामीणों ने गायों के मरने का ब्यौरा मांगा तो कर्मचारियों ने एक कागज पर मुर्दा मवेशियों को उठाने वाले व्यक्ति द्वारा लिखी गई इबारत दिखाई। जिसमें मार्च महीने में तकरीबन 50-60 गोवंश की मौत की पुष्टि हुई। जिससे लोगों के रौंगटे खड़े हो गए। पुलिस ने भी संचालक से रिकॉर्ड तलब किया है। पुलिस के अनुसार क्षेत्र के आजंदा, कोड़क्या, कोटड़ी, ढीकोली, खेडलीबंधा आदि गांवों के ग्रामीणों ने गोशाला में व्याप्त अव्यवस्थाओं से मर रहे गोवंशों की जांच व कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

गोशाला संचालक का तर्क: गोशाला संचालक रामप्रसाद सुवालका ने कहा कि कुछ लोग गोशाला में आए तथा एक पुलिस जवान भी साथ में था। लोगों ने मुझे धमकाते हुए कहा कि गोशाला को बंद कर दें। यहां पर कोई व्यवस्था नहीं होने की बात कहते हुए सभी गायों को बाहर निकाल कर भगा ले गए। जबकि, अब तीन लाख रुपए का चारा खरीदकर खिला चुका हूं। करीब 12 गायें जो वृद्ध व कमजोर थीं उनकी मौत हुई हैं। गाये भगाने के बाद आसपास से खेतों के मालिक आकर गायों द्वारा खेतों में नुकसान की शिकायत करने लगे। उन्होंने जिला प्रशासन व पुलिस से गायें वापस लौटाने की मांग की है।