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मुकंदरा में इसी माह टी-91 को बसाने के लिए ट्रेंक्यूलाइज करने की तैयारी

वन विभाग मार्च में मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ टी-91 को बसाने की तैयारी में जुट गया है। मुकंदरा में बाघ को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:00 AM IST

मुकंदरा में इसी माह टी-91 को बसाने के लिए ट्रेंक्यूलाइज करने की तैयारी
वन विभाग मार्च में मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ टी-91 को बसाने की तैयारी में जुट गया है। मुकंदरा में बाघ को लाने के लिए रामगढ़ सेंचुरी में रणथंभौर की टीम उसे ट्रेंक्यूलाइज करने में लगी हुए हैं। इसके लिए उसे बीच-बीच में मीट दिया जा रहा हैं। रणथंभौर के फील्ड डायरेक्टर वाईके साहू ने बताया कि टी-91 को मार्च में मुकंदरा में शिफ्ट कर दिया जाएगा। साहू ने कहा कि टाइगर की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उसके पहले वन विभाग को मुकंदरा में बाघों को बसाने के लिए उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने जरूरी हो गया हैं। चूंकि टी-91 बाघ पिछले तीन माह से बूंदी जंगलों व रामगढ़ सेंचुरी में घूम रहा है। वहीं, बाघ पर खतरा मंडरा रहा है। 22 फरवरी की रात 10:20 बजे दो शिकारी कैमरा ट्रैप में ट्रेस हुए। उनके हाथों में टॉर्च और दो बंदूक थी। जो छह दिन बाद भी वन विभाग के हाथ नहीं लगे। इस बारे में डीसीएफ सुनील चिद्री ने ज्यादा कुछ नहीं बताया।

टाइगर रिजर्व में सुरक्षा बढ़ाई जा रही है

डीसीएफ डॉ. मोहनराज ने बताया कि रामगढ़ सेंचुरी में शिकारियों के सामने आने के बाद मुकंदरा में सुरक्षा बढ़ा दी हैं। बाघों को बसाने के लिए 31 मार्च के पहले एनक्लोजर का बाकी काम कंपलीट कर लिया जाएगा। वनकर्मियों से नियमित ट्रेकिंग करवाई जा रही हैं। वायरलेस सेट काम कर रहे हैं। रणथंभौर से मिले जवानों को दरा व सावनभादो वनक्षेत्र में तैनात किया गया हैं।

बाघों के जच्चा गृह रामगढ़ में हुआ था शिकार

पीपुल फॉर एनिमल के प्रतिनिधि बिट्ठल सनाढ्य ने बताया कि वर्ष 1986 तक रामगढ़ सेंचुरी में करीब 22 बाघ थे। इस वक्त तलवास अजीतगढ़ किले के पास बाघ को शिकारियों ने मार डाला था। दस के बाद में अवशेष मिलने से शिकार की पुष्टि हुई थी। इसके बाद बाघिन के शावकों को शिकारियों ने गुफा में बंद कर देने की घटना हुई। ऐसे धीरे-धीरे रामगढ़ में बाघ लुप्त हो गए।

राजस्थान अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष जसवंत सिंह तंवर ने बताया कि वर्ष 1993 तक रामगढ़ सेंचुरी में 8 से 10 बाघ थे। उस दौर में रंगलाल शिकारी को बाघ शिकार मामले में वन विभाग ने पकड़ा। वह अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ा था। जिसकी निशानदेही से जले हुए बाघ की खाल, हड्डियों के टुकड़े, बंदूक आदि बरामद की। तब रंगलाल ने वन विभाग की कस्टडी से भागने का प्रयास किया। वह पहाड़ी से गिरकर गंभीर घायल हुआ था। जिसे जेल प्रशासन ने लेने से मना कर दिया था। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वी सिंह राजावत ने बताया कि वर्ष 1990 से 95 तक बाघों के शिकार हुए। शिकारियों ने सबसे ज्यादा बाघों के प्रेबेस शाकाहारी वन्यजीवों का शिकार किया। डेढ़ से दो साल पहले रणथंभौर से टी-62 बाघ रामगढ़ आया था। तब भी शिकारी कैमरा ट्रेप में कैद हुए थे। वन विभाग ने उस वक्त भी कोई एक्शन नहीं लिया।

रणथंभौर से मुकंदरा के लिए 10 स्पेशल टाइगर फोर्स के जवान मिले हैं। जो बिना वनकर्मियों के पेट्रोलिंग पर नहीं जाते हैं।

बाघों की सुरक्षा के लिए यह करने होंगे इंतजाम

मुकंदरा में सूचना तंत्र ठीक से विकसित नहीं हुआ। टाइगर रिजर्व व अन्य सेंचुरी में अवैध गतिविधियों को रोकने में प्राथमिक रूप से सूचना तंत्र मजबूत होना बेहद जरूरी हैं। वायर लेस सेट है लेकिन नेटवर्क कमजोर हैं। नाकों पर स्टाफ हैं। आने जाने वालों से पूछता के बाद तलाशी नहीं होती। रात्रि पेट्रोलिंग नियमित नहीं हैं। नाकों में वाहन का अभाव हैं। जवाहर सागर , गागरोन व रावठां रेंज कार्यालयों में हथियार नहीं हैं। तीन फीट के डंडे की दम पर वन कर्मचारी अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वालों को नहीं सक्षम नहीं हैं।

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Web Title: मुकंदरा में इसी माह टी-91 को बसाने के लिए ट्रेंक्यूलाइज करने की तैयारी
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