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प्रकृति पूजा, स्वाद और सेहत का संदेश देती है तारणा तेरस

Kota News - स्वदेशी जागरण मंच कोटा महानगर एवं कुटुंब प्रबोधन के संयुक्त तत्वावधान में तारणा त्रयोदशी को प्राचीन जैव विविधता...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 04:05 AM IST
प्रकृति पूजा, स्वाद और सेहत का संदेश देती है तारणा तेरस
स्वदेशी जागरण मंच कोटा महानगर एवं कुटुंब प्रबोधन के संयुक्त तत्वावधान में तारणा त्रयोदशी को प्राचीन जैव विविधता दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर बुधवार को संघ कार्यालय सूरज भवन पर 13 विविध प्रकार के अनाजों के सम्मिश्रण से तैयार व्यंजनों से भगवान का भोग लगाया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संघ के वरिष्ठ प्रचारक नंदलाल थे। वहीं विभाग संघचालक बृजमोहन शर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। नंदलाल ने कहा कि कृति पूजा को सर्वोपरि मानने वाली भारतीय संस्कृति में वैज्ञानिक रहस्यों और शाश्वत सत्य से परिपूर्ण सदियों पुरानी परंपराएं विद्यमान हैं। जिन्हें ऋषि-मुनियों ने दिव्य अनुसंधानों के माध्यम से लोक तक पहुंचाया और पिंड से लेकर ब्रह्मांड तक के कल्याण के प्रयोग सुझाए। इनमें कई समय के साथ समाप्त हो गए और बहुत से रामबाण नुस्खों और इनसे जुड़ी परंपराओं को हमने भुला दिया।

धार्मिक आयोजन

प्राचीन जैव विविधता दिवस के रूप में मनाई गई तारणा त्रयोदशी

तारणा त्रयोदशी पर संघ कार्यालय में हुए कार्यक्रम को संबोधित करते वक्ता।

13 तरह के अनाजों से लगाया भोग : स्वदेशी जागरण मंच के विभाग संयोजक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि ब्राउन राइस, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, माल, कुलथ, चीणा, कांगणी, सामा, मूंग, चना एवं गेहूं के आटे को मिलाकर रोटी बनाई गई। इसी तरह 13 सब्जियों लौकी, कद्दू, तुरई, कीकोड़ा, करेला, टिंडोरी, भिंडी, पालक, चंदलोई, गिलकी, परवल, चंवला फली एवं ग्वार फली को मिलाकर मिक्स सब्जी बनाई गई थी, जिसका भोग लगाया गया।

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