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नए अस्पताल के द्वितीय तल का निर्माण तो दूर अभी तो नक्शा भी नहीं बनवा सका पीडब्ल्यूडी

कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने शून्यकाल में नियम 295 विशेष उल्लेख के तहत सदन में कोचिंग छात्रों की समस्याओं से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:40 AM IST

कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने शून्यकाल में नियम 295 विशेष उल्लेख के तहत सदन में कोचिंग छात्रों की समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने राज्य सरकार से कोटा में कोचिंग छात्रों की सुविधा के लिए स्टूडेंट्स फेसिलिटी सेंटर और अलग से कोचिंग थाना खोलने की मांग की। विधायक ने कहा कि कोटा में पूरे देश से स्टूडेंट्स कोचिंग करने आते हैं। लेकिन पढ़ाई और कॉम्पिटिशन के चलते तनाव का शिकार हो जाते हैं। तनाव को दूर करने के लिए लंबे समय से स्टूडेंट फेसिलिटी सेंटर जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसा फेसिलिटी सेंटर स्थापित हो, जहां लाइब्रेरी, इनडोर गेम्स, काउंसलिंग, मनोचिकित्सक और योग शिक्षकों का भी परामर्श मिले। विधायक ने कहा कि इसके लिए शहर के कोचिंग संचालक भी सहयोग को तैयार है। विधायक ने अनुदान की मांग संख्या 26 चिकित्सा और लोक सफाई पर बोलते हुए कोटा में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा अधिकारियों और नर्सिंग कर्मचारियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग की। साथ ही बजट घोषणाओं में विलंब का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोटा में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का निर्माण मार्च, 2017 में पूरा होना था, लेकिन निर्माण व उपकरणों से जुड़ी दोनों एजेंसियों में तालमेल के अभाव से यह निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने वर्ष 2017-18 की बजट घोषणा में नए अस्पताल के द्वितीय तल के निर्माण के लिए 30 करोड़ की घोषणा का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी ने आर्किटेक्ट से द्वितीय तल के निर्माण का नक्शा ही तैयार नहीं करवाया है, निर्माण तो जाने कब शुरू होगा। पिछले बजट में 8 करोड़ रुपए किडनी ट्रांसप्लांट के लिए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन साल भर होने को आया। संबंधित निर्माण एजेंसियों द्वारा कोई काम शुरू नहीं किया गया। राज्य सरकार ने 2.5 करोड़ रुपए नए अस्पताल में ऑपरेटिव माइक्रो न्यूरो उपकरण के लिए दिए थे, इसका वर्क आर्डर तो हो गया लेकिन मशीन अभी तक नहीं आई।

मेघवाल ने अवैध खनन का मुद्दा उठाया

रामगंजमंडी विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने कराहेढ़ी नदी व ताकली नदी पर हो रहे अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खनिज विभाग के अधिकारियों व पुलिस की मिलीभगत से क्षेत्र मे निरंतर अवैध हो रहा है। इसमें दो व्यक्तियों की जान चली गई व तीन व्यक्ति घायल हो चुके हैं।

सफाई कर्मचारियों को हटाकर सरकार ने गांवों में स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ा दी : राजावत

विधायक भवानी सिंह राजावत ने कहा कि सरकार ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लगाए गए सफाई कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान बंद कर गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ा दी। मंगलवार को विधानसभा में महानरेगा पर अपने पूरक प्रश्न पर बोलते हुए विधायक ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पंचायत मुख्यालय पर 2 सफाई कर्मचारियों को रखा गया था, जिसकी मजदूरी का भुगतान महानरेगा योजना से किया जाता था। ये ऐतिहासिक फैसला था, लेकिन इसे सरकार ने वापस ले लिया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शहरों और कस्बों में तो नगर पालिका, निगम जैसे नगरीय निकाय हैं, जिनमें दूषित जल निकास के लिए आधारभूत ढांचा बना हुआ है, उनके पास आय के साधन भी हैं और सफाई के लिए बजट व कर्मचारी भी है। लेकिन, गांवों की स्थिति दयनीय है। गांवों में या तो नालियां ही नहीं हैं या नालियां हैं तो फिर उनकी सफाई नहीं होने से सड़ रही हैं, ऐसे में महानरेगा योजना के तहत सफाई कर्मचारियों को लगाने का निर्णय बहुत अच्छा था। इससे गांवों को गंदगी से मुक्ति मिलती और स्वच्छ भारत अभियान को भी बल मिलता। सरकार इन सफाई कर्मचारियों को फिर से काम पर रखे। राजावत के प्रश्न का जवाब देते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में महानरेगा के तहत 150 घरों पर 2 सफाईकर्मी रखने का प्रावधान था। इसके तहत हमने प्रदेश में 18 हजार सफाईकर्मी रखे थे, लेकिन केंद्र सरकार की आपत्ति के कारण उन्हें हटा दिया गया है। अब मुख्यमंत्री और मैं केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इसकी अनुमति प्रदान करने की मांग करेंगे और केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलते ही इन सफाई कर्मियों को फिर लगा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो सफाई कर्मचारी लगाए गए थे, उनकी मजदूरी उन्हें जरूर दी जाएगी।

एमबीएस अस्पताल की पलंग क्षमता बढ़ाएं :कोटा उत्तर विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि एमबीएस अस्पताल को 1 हजार पलंग का अस्पताल घोषित किया जाए। यदि ऐसा नहीं कर सकती तो सरकार कम से कम यह तो करें कि वर्तमान में जितने मरीज इस अस्पताल में भर्ती रहते हैं, उतने पलंग जरूर स्वीकृत करें। इस अस्पताल में औसत ऑक्यूपेंसी 750 बेड रहने लगी है, इसलिए इतने बेड जरूर मंजूर हो, ताकि उसके अनुरूप बजट मिले। उन्होंने एमबीएस अस्पताल में बीपीएल मरीजों के लिए रियायती दर पर शुरू किए गए दवा काउंटर पर आमजन को भी इसी दर पर दवा देने की स्वीकृति देने का मुद्दा उठाया।

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Web Title: नए अस्पताल के द्वितीय तल का निर्माण तो दूर अभी तो नक्शा भी नहीं बनवा सका पीडब्ल्यूडी
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