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70 डेसिबल तक ही सुनें म्यूजिक उससे ज्यादा खतरनाक : डॉ. गुप्ता

मोबाइल और ईयरफोन की वजह से युवाओं में बहरेपन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। युवा पीढ़ी के लिए मोबाइल व ईयरफोन का बहुत...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:55 AM IST
मोबाइल और ईयरफोन की वजह से युवाओं में बहरेपन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। युवा पीढ़ी के लिए मोबाइल व ईयरफोन का बहुत ज्यादा उपयोग घातक साबित हो रहा है। यदि समय रहते इसे लेकर जागरूकता नहीं लाई गई तो आने वाले समय में इसके घातक दुष्परिणाम सामने आएंगे। यह कहना है कि पीजीआई चंडीगढ़ के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. अशोक गुप्ता का। कोटा में ईएनटी सर्जन्स की दो दिवसीय काॅन्फ्रेंस “कॉकलियर क्रूज’ में बतौर स्पीकर भाग लेने आए डॉ. गुप्ता ने कहा कि संचार क्रांति के दौर में जितनी तेजी से हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल पहुंचा है, उतनी तेजी से कोई अन्य उपकरण नहीं पहुंचा। लेकिन इसके दुष्प्रभाव को लेकर अभी कोई सतर्क नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी म्यूजिक साउंड 70 डेसिबल तक ध्वनि वाला होना चाहिए। इससे ज्यादा साउंड होने से कान के पर्दों पर गलत असर आता है।

आमतौर पर शादी-पार्टियों में इससे ज्यादा ध्वनि पर डीजे बजता रहता है और उसके ठीक पास में छोटे-छोटे बच्चे डांस करते रहते हैं। पैरेंट्स खुद ऐसी स्थिति से बच्चों को बचाएं। काॅन्फ्रेंस में मुंबई से डॉ. मिलिंद, दिल्ली से डॉ. शरद माहेश्वरी, जयपुर से डॉ. मोहनीश ग्रोवर समेत देशभर से 150 ईएनटी सर्जन्स ने भाग लिया।

डॉ. अशोक गुप्ता।

जन्मजात बहरेपन से बचने के लिए रिश्तेदारों में शादियों से बचें: डॉ. नीलम

कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी का लंबा अनुभव रखने वाली पुणे की वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. नीलम वैद का कहना है कि इसमें सर्जरी से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके बाद मरीज व उसके परिजनों को दी जाने वाली ट्रेनिंग होती है। यदि सर्जरी के बाद बच्चे की स्पीच थैरेपी व अन्य ट्रेनिंग ठीक हो गई और बच्चा उसी अनुरूप अभ्यास कर रहा है तो रिजल्ट बेहतर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जन्मजात बच्चों का बहरा होना एक जेनेटिक समस्या है। इससे तभी बचा जा सकता है, जब रिश्तेदारों में शादियों से बचा जाए। तमिलनाडु में रिश्तेदारों में शादियां ज्यादा होती है, वहां यह समस्या बहुत ज्यादा है। इनके अलावा कम वजन वाले प्री मेच्योर बच्चों में भी यह समस्या हो सकती है। उन्होंने काॅन्फ्रेंस के दौरान अपने व्याख्यान में नए सर्जन्स को वे सभी गलतियां बताईं, जो इस सर्जरी के दौरान किसी भी सर्जन से हो सकती है। साथ ही वे तरीके भी बताए, जिनसे इन गलतियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम लोगों को सिखाने वाला कोई नहीं था, हमने ठोकरें खा-खाकर यह सर्जरी सीखी। हम चाहते हैं कि अब हमारी नई पीढ़ी ट्रेंड होकर सर्जरी करे।

चिकित्सकों ने देखी लाइव सर्जरी : पुणे से आई डॉ. नीलम वैद, एम्स की डॉ. क्रांति भावना ने कॉकलियर इंप्लांट लाइव सर्जरी की। ऑडिटोरियम में चिकित्सकों ने इनके द्वारा की गई सर्जरी को लाइव देखा। रविवार को जयपुर से डॉ. सतीश जैन व डॉ. विक्रांत माथुर लाइव सर्जरी करेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत माथुर ने बताया कि काॅन्फ्रेंस उन बच्चों ने डांस परफॉर्म किया, जिनकी कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी हुई और वे आज सुन पा रहे हैं। पहले दिन वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान भी किया गया।