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सुरक्षा देने के लिए टी-91 को ट्रेंक्यूलाइज करने की तैयारी

बूंदी की रामगढ़ विषधारी सेंचुरी में टी-91 बाघ घूम रहा है। वन विभाग का मानना है कि इस सेंचुरी में बाघ असुरक्षित है।...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:05 AM IST
सुरक्षा देने के लिए टी-91 को ट्रेंक्यूलाइज करने की तैयारी
बूंदी की रामगढ़ विषधारी सेंचुरी में टी-91 बाघ घूम रहा है। वन विभाग का मानना है कि इस सेंचुरी में बाघ असुरक्षित है। चूंकि 22 फरवरी को सेंचुरी में बाघ की टेरिटरी वाले इलाके में दो बंदूकधारी शिकारी बाघ की ट्रैकिंग के लिए लगाए कैमरा ट्रैप में कैद हुए थे। जिन्हें 24 मार्च को पकड़ा गया। उनसे दो टोपीदार बंदूकें बरामद की गई। इस घटना के बाद से वन विभाग बाघ की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। वह कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। चूंकि सरिस्का में एसटी 5 बाघिन लापता है।

वहीं, 19 मार्च को खेत में लगे फंदे में फंसने से एसटी 11 की मौत हुई है। सूत्रों के अनुसार वन विभाग बाघ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे कभी भी ट्रेंक्यूलाइज करने की कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए मुकंदरा से बाघ के लिए रामगढ़ सेंचुरी पिंजरा भेजा है। शनिवार को पूर्णिमा की चांदनी रात में बाघ को वन विभाग की टीमें उसकी ट्रैकिंग में जुटी हुई थी। सूत्रों ने बताया कि बाघ को रविवार व सोमवार को ट्रेंक्यूलाइज किया जा सकता है। बस उसके ओपन स्पेस में आने का वन विभाग इंतजार कर रहा है। ट्रेंक्यूलाइज होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा। बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने यह सारी कार्रवाई गोपनीय रखी गई है।

रामगढ़ में सुरक्षित नहीं हैं बाघ

वन विभाग रामगढ़ सेंचुरी में ज्यादा दिन बाघ को रखकर कोई खतरा नहीं उठाना चाहता है। क्योंकि रामगढ़ सेंचुरी का बाघों की सुरक्षा को लेकर रिकॉर्ड ठीक नहीं है। सूत्रों के अनुसार वर्ष 1986 में तलवास अजीतगढ़ किले के पास शिकारियों ने बाघ को मार डाला था। बाद में उसे अवशेष मिले थे। इसके बाद बाघिन के शावक शिकारियों ने गुफा में बंद कर दिए थे। वर्ष 1993 में रंगलाल नामक शिकारी बाघ शिकार मामले में पकड़ा गया था। उसकी निशानदेही से जले हुए बाघ के अवशेष खाल, हड्डियां व बंदूक बरामद की गई थी। उसकी मौत होने पर समर्थित लोगों ने रामगढ़ में चौकी फूंक दी थी। धीरे-धीरे रामगढ़ से बाघ ही लुप्त हो गए।

सिटी रिपोर्टर | कोटा

बूंदी की रामगढ़ विषधारी सेंचुरी में टी-91 बाघ घूम रहा है। वन विभाग का मानना है कि इस सेंचुरी में बाघ असुरक्षित है। चूंकि 22 फरवरी को सेंचुरी में बाघ की टेरिटरी वाले इलाके में दो बंदूकधारी शिकारी बाघ की ट्रैकिंग के लिए लगाए कैमरा ट्रैप में कैद हुए थे। जिन्हें 24 मार्च को पकड़ा गया। उनसे दो टोपीदार बंदूकें बरामद की गई। इस घटना के बाद से वन विभाग बाघ की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। वह कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। चूंकि सरिस्का में एसटी 5 बाघिन लापता है।

वहीं, 19 मार्च को खेत में लगे फंदे में फंसने से एसटी 11 की मौत हुई है। सूत्रों के अनुसार वन विभाग बाघ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे कभी भी ट्रेंक्यूलाइज करने की कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए मुकंदरा से बाघ के लिए रामगढ़ सेंचुरी पिंजरा भेजा है। शनिवार को पूर्णिमा की चांदनी रात में बाघ को वन विभाग की टीमें उसकी ट्रैकिंग में जुटी हुई थी। सूत्रों ने बताया कि बाघ को रविवार व सोमवार को ट्रेंक्यूलाइज किया जा सकता है। बस उसके ओपन स्पेस में आने का वन विभाग इंतजार कर रहा है। ट्रेंक्यूलाइज होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा। बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने यह सारी कार्रवाई गोपनीय रखी गई है।

सूत्रों के अनुसार मुकंदरा में बाघों को बसाया जाना है। यहां बाघों को रखने के लिए 28 हेक्टेयर का एनक्लोजर व 80 वर्ग किलोमीटर का बड़ा चारदीवारी का एनक्लोजर बनाया गया है। ऐसे में बाघ की सुरक्षा की दृष्टि से मुकंदरा सबसे उपयुक्त स्थान है। वन विभाग रामगढ़ सेंचुरी से ट्रंेक्यूलाइज करके रणथंभौर शिफ्ट नहीं करेगा। चूंकि उसकी वहां कोई टेरिटरी नहीं है। टेरिटरी की तलाश में बाघ ने रणथंभौर को छोड़ा था। फिर भी बाघ को वहां छोड़ा गया, तो टेरिटरी को लेकर टी-95 व टी-86 की भांति किसी दूसरे बाघ से उसकी फाइटिंग की संभावना है। इस कारण बाघ के लिए रणथंभौर सुरक्षित नहीं है। सूत्रों ने कहा 90 फीसदी चांस है टी-91 बाघ को सुरक्षा देते हुए वन विभाग उसे मुकंदरा में शिफ्ट करेगा। यह काम वन विभाग रविवार को भी कर सकता है। जो बाघ के मूड पर डिपेंड करेगा। वह कब ट्रंेक्यूलाइज की स्थिति में आएगा।


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