• Home
  • Rajasthan
  • Kota
  • राजीव गांधीनगर में 400 हॉस्टल, 25 हजार स्टूडेंट्स, रोज खरीदते हैं 4.50 लाख का पानी
--Advertisement--

राजीव गांधीनगर में 400 हॉस्टल, 25 हजार स्टूडेंट्स, रोज खरीदते हैं 4.50 लाख का पानी

अर्जुन अरविंद | कोटा सरकारी मशीनरी की लापरवाही से शहर का राजीव गांधी नगर डार्क जोन बन गया है। जलदाय विभाग की...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 05:10 AM IST

अर्जुन अरविंद | कोटा

सरकारी मशीनरी की लापरवाही से शहर का राजीव गांधी नगर डार्क जोन बन गया है। जलदाय विभाग की लापरवाही के चलते यहां पेयजल की सप्लाई नाम मात्र की होती है। इसके चलते यहां के लोगों और कोचिंग स्टूडेंट्स को पानी खरीदना पड़ता है। हालत ये है कि यहां रोज साढ़े 4 लाख रुपए का पानी खरीदा जाता है। राजीव गांधी नगर, महावीर नगर फर्स्ट का कुछ हिस्सा व डकनिया इलाके के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पलेक्स में करीब 25 से 30 हजार स्टूडेंट्स रहते हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों और स्टूडेंट्स के लिए टैंकरों से रोज 75 लाख लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। गर्मी में सप्लायर पानी का रेट भी बढ़ा देते हैं। राजीव गांधीनगर के हर हॉस्टल में ट्यूबवेल लगा हुआ है। यहां का भूजल स्तर 1 हजार फीट पर पहुंच गया है। सर्दियों में भी हालत ये रहती है कि ट्यूबवेल 20 से 25 मिनट ही पानी दे पाता है। गर्मियों यहां के ट्यूबवेल का दम टूट जाता है। विश्वकर्मा नगर व डकनिया इलाके में ग्राउंड वाटर लेवल 300 से 500 फीट से नीचे जा चुका है।

हर हॉस्टल में 5 हजार ली. का टैंक

कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल बताते हैं कि राजीव गांधी नगर वर्ष 2004 में बसना शुरू हुआ था। आज 450 भूखंड में से 400 में हॉस्टल हैं। हर हॉस्टल में नीचे 5000 लीटर का टैंक बना हुआ है। छत पर 1000 लीटर की 10 टंकियां रखी हुई हैं। हॉस्टल में हर समय 10 हजार लीटर पानी रखना होता है। ऐसा ही हॉल डकनिया इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पलेक्स का है। यहां 40 से 50 हॉस्टल हैं। हॉस्टल एसोसिएशन पेयजल संकट की बात जलदाय मंत्री तक को बता चुकी है। इसके बावजूद राहत नहीं मिली। हर हॉस्टल संचालक पानी पर 20 से 27 हजार रुपए महीने खर्च करता है।

वाटर सप्लाई के लिए जान भी जोखिम में

विश्वकर्मा नगर स्पेशल में टैंकर सप्लायर मजदूरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। स्थानीय निवासी चेतन सोलंकी ने बताया कि टैंकर सप्लायर अवैध ट्यूबवेल से पानी सप्लाई कर रहे है। नाले के किनारे सरकारी जमीन पर ट्यूबवेल खोद रखे हैं। बिजली के पोल पर ट्यूबवेल के पाइप बांध रखे हैं। कभी टैंकर भरते समय पाइप से निकली पानी की बौछार बिजली के तारों को छू सकती है। इससे टैंकर में करंट फैल सकता है। अवैध पानी के कारोबार के चलते आए दिन झगड़े होते हैं।

500 रुपए में मिलता है मई-जून में टैंकर

जलदाय V/S यूआईटी

सिस्टम डवलप करने का काम यूआईटी के जिम्मे


बजट का अभाव, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में होगा काम


हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार मई व जून में भीषण गर्मी पड़ती है। पानी की डिमांड बढ़ जाती है। टैंकर सप्लायर 300 रुपए के टैंकर के 500 रुपए लेते हैं।

राजीव गांधी नगर के हॉस्टलाें में पानी सप्लाई करते हुए टैंकर।