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मेडिकल कॉलेज में उपकरणों के लिए आए 2 करोड़ रुपए हुए लैप्स

पूरे साल पाई-पाई को मोहताज रहने वाले कोटा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में बीते वित्त वर्ष में उपकरणों की खरीद के लिए...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 05:10 AM IST
पूरे साल पाई-पाई को मोहताज रहने वाले कोटा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में बीते वित्त वर्ष में उपकरणों की खरीद के लिए आए 2 करोड़ रुपए लैप्स हो गए। हालांकि इसकी वजह जयपुर में बैठे अधिकारी रहे, जिन्होंने इस बजट के उपयोग में हर कदम पर रोड़े अटकाए और वित्त वर्ष समाप्ति के अंतिम दिन (31 मार्च) को पत्र भेजकर कई तरह की क्वेरी के जवाब मांगे। वित्त वर्ष का आखिरी दिन था, ऐसे में क्वेरी का जवाब भेजना और उसके बाद की प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था। आखिरकार उपकरणों के लिए आया यह पैसा लैप्स हो गया।

यह पैसा बीएफसी में की गई डिमांड के बाद अक्टूबर, 2017 में यूरोलॉजी वर्क स्टेशन के लिए मिला था। इससे सी-आर्म मशीन, टेबल और वीडियो यूरो डायनेमिक की खरीद की जानी थी। दिसंबर में टेंडर भी हो गए। लेकिन इसी बीच किसी ने जयपुर में चिकित्सा मंत्री को शिकायत कर दी और कहा कि उक्त उपकरणों की खरीद गैरजरूरी की जा रही है।

ऐन मौके पर कहा-दूसरे उपकरण खरीद लो

शिकायत के आधार पर जयपुर से जवाब मांगा गया तो मेडिकल कॉलेज ने जस्टिफिकेशन भी भेज दिया कि इन उपकरणों की जरूरत क्यों है और इनके नहीं होने से क्या असर हो रहा है। इससे संतुष्ट होकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्त सलाहकार ने भी खरीद को वाजिब बताते हुए जवाब ऊपर भेज दिया। इसके बावजूद खरीद करने के ऑर्डर नहीं किए गए और पूरे मामले के विश्लेषण के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व सभी मेडिकल कॉलेजों के यूरोलॉजी विभाग को लिख दिया गया। मार्च के पहले सप्ताह में जयपुर से निर्देश मिले कि उक्त बजट से वे उपकरण खरीद लिए जाएं, जो आरएमएससीएल से अप्रूव है। आनन-फानन में कॉलेज प्रशासन ने सभी विभागों से डिमांड लेकर जयपुर भेज दी।


31 मार्च को मांगा जवाब : वित्त विभाग ने 31 मार्च को डिमांड पर जवाब मांग लिया। इसके बाद बजट लैप्स हो गया। यह बीएफसी में मिला हुआ पैसा था, ऐसे में ये 2 करोड़ रुपए स्थायी रूप से कोटा मेडिकल कॉलेज से छिन गए।